हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिका

नदियों के तलछट का भी अपना एक रोना है
उसमे नदियों का होना तो है
पर बहुत कुछ का खोना भी
और इस रुदन में अपना एक कम्पन होता है
कारण और वजूद भी

उठते , बैठते , जागते , दौड़ते हुए 
हममें से हर किसी को सपने देखने ही चाहिए 
सपने , राख होती इस दुनियाँ की आखिरी उम्मीद हैं

नफ़रतें दिल की पिघल कर आँखों तक जा पहुँची
नफ़रतों को क़ैद से दे दी रिहाई मैंने

कवि-कथा

कथा कवियों की नहीं, उनकी कविताओं की। हर रविवार एक कवि की कविताओं का सम्यक मूल्यांकन। लिखेंगे शहंशाह आलम, जिन्होंने खुद भी हिन्दी  कविता में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
द लास्ट कोच
संजय स्वतंत्र दुनिया को बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। मेट्रो के आखिरी डिब्बे में बैठकर  वो जो अनुभव करते हैं, उसे ही  हर शनिवार को आप इस साप्ताहिक स्तम्भ में पढ़ते हैं।

एक कवि की डायरी

वरिष्ठ कवि-संपादक जयप्रकाश मानस की डायरी में साहित्य की दुनिया की  रोचक और प्रेरक जानकारियां दर्ज हैं। हर हफ्ते शुक्रवार को आप उनकी डायरी के अंश यहां पढ़ सकते हैं।

कहानियां

ये कहानियां हमारी-आपकी ज़िन्दगी से जुड़ी हैं, इसलिए ये आपको झकझोरेंगी,  सोचने पर मज़बूर कर देंगी

सूर्यनाथ सिंह

रज़ामन्दी

सूर्यनाथ सिंह

SUSHANT 18 JULY

इंडियन काफ्का

सुशान्त सुप्रिय

SUSHMA SINHA

रिश्ता

सुषमा सिन्हा

RAJA GOPAL VERMA

...सोलह प्रेम पत्र

राजगोपाल सिंह वर्मा

कविताएं

santwana

सांत्वना श्रीकांत

ऊंघता, दौड़ता और चिल्लाता अजनबियों में अपनापन ढूंढ़ता सफर। एकाकी मील के पत्थरों से गुजरता/ नई मंजिलें बनाता, बिगाड़ता सफर

NISHANT (2)

निशान्त

बियाबां में एक पेड़ खिंचता है समुद्र में एक डोंगी भीड़ में तुम अकेले में तुम्हारी उपस्थिति

jyoti shah

ज्योति शाह

चलो फिर/निकलो घरों से/ढूंढ लायें एक कतरा उम्मीद /दरख्तों से /अंगोछे में भर,/डाल दें/शहर के बीचों-बीच हर कोई /नहाये/डूबे और इतराये, किताबें

bhaskar

भास्कर चौधुरी

बुजुर्ग होता है/ बुजुर्गों का प्रेम / यात्रा तय कर चुका होता है / प्रेम बुजुर्गों का.../ जब ऊब चुके होते हैं जवान / शुरु होता है बुजुर्गों का प्रेम

बात जब हद से गुजर जाय ग़ज़ल कहता हूं

आपको प्रकाशित कर हम गौरवान्वित महसूस करते हैं

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