साहित्यिक ई पत्रिका

शंकर

अगले क्षण दो परछाइयाँ रेंगते हुए मजार के पिछवाड़े जा पहुँचीं। दोनों ने अंधेरे में हाथों से दीवारों को टटोलना शुरू किया। अचानक उनमें से एक की अंगुलियाँ किसी नुकीली चीज से टकरायीं। उसने पत्थर का टुकड़ा धीरे-धीरे बाहर खींचा। अब सामने एक छोटा-सा छेद था। दूसरे ने छेद पर अपनी आँख गड़ायी। भीतर कोठरों में जो कुछ भी था, वह अब उसकी आँखों की पहुँच में था

ईश मिश्र

देखो बाकी आरोप तो फिर भी उतने संगीन नहीं हैं. लेकिन घुसपैठ का मामला संगीन है. बात अब हाथ से निकल चुकी है. कुनबानामा में छपी तुम्हारी कहानी की प्रामाणिकता पर सवाल उठ गया है. वैसे मैं क्या सारा निदेशक मंडल जानता है कि कुनबानामा में छपी तुम्हारी कहानी तुम्हारी ही है. वस वही कुनबे की तुम्हारी आजीवन नागरिकता के लिए पर्याप्त है.

चर्चित कहानियां

रविशंकर सिंह की कहानी ‘पान, प्रसाद और पेंशन’ स्वतंत्रता सेनानी पेंशन के नाम पर चल रही घपलेबाजी का प्रभावी ढंग से बेनकाब करती है।

विवेक मिश्र की कहानी ‘कारा’ आपको यातना और अत्याचार के ऐसे कारागार में ले जाएगी कि आप सहम उठेंगे। 

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी प्रीमियम कर्ज और ईएमआई के जाल में उलझे मध्यवर्गीय जीवन की कहानी है।

कविता की दुनिया

हमारी आपकी जिंदगी की हर धड़कन को पकड़ने में कामयाब कविताएं

राकेश तिवारी के इस कहानी संग्रह में हमारे आसपास के  किरदारों  की कहानियां हैं। यह वक्त की नब्ज टटोलती है और बताती है कि हमारी आपकी ज़िन्दगी में वक्त के साथ कितना कुछ बदल गया है।

जयनंदन का कहानी संग्रह आईएसओ 9000 मज़दूरों की ज़िन्दगी की व्यथा कथा है। बाजार और भौतिकतावाद के  चक्कर में मध्यवर्गीय जीवन कैसे पिस रहा है, वह इस संग्रह की कहानियों में प्रतिबिंबित होता है।

हरियश राय के कहानी संग्रह ‘किस मुकाम तक’  की अधिकांश कहानियां मध्यमवर्गीय चरित्रों को लेकर रची गई हैं। हरियश राय के पात्र अपनी वैचारिक दुनिया में खोए रहते हैं, अपने परिवेशगत परिवर्तनों के बारे में खूब सोचते हैं।