हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिका

नीलय उपाध्याय

नीलय उपाध्याय को गंगा पुत्र कहने को मन करता है। गंगा बचाने के उनके अभियान के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। अभी वो यमुना के किनारे-किनारे पदयात्रा कर रहे हैं और उसकी हाल पर व्यथित हैं। पढ़िए उनका ये आलेख

 

अभी-अभी प्रकाशित 3 रचनाएं

पचमढ़ी के बारे में पढ़िए आरती तिवारी का संस्मराणत्मक  यात्रा  वृतान्त

हिन्दी के महान कथाकार भैरव प्रसाद  गुप्त के बारे में पढ़िए मशहूर साहित्यकार कर्णसिंह चौहान का आलेख

चलो फिर/निकलो घरों से/ढूंढ लायें 

एक कतरा उम्मीद /दरख्तों से /अंगोछे में भर,/डाल दें/शहर के बीचों-बीच

हर कोई /नहाये/डूबे और इतराये,

एक कवि की डायरी

वरिष्ठ कवि-संपादक जयप्रकाश मानस की डायरी में साहित्य की दुनिया की  रोचक और प्रेरक जानकारियां दर्ज हैं। हर हफ्ते शुक्रवार को आप उनकी डायरी के अंश यहां पढ़ सकते हैं।

द लास्ट कोच

जनसत्ता में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार संजय स्वतंत्र दुनिया को बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। मेट्रो के आखिरी डिब्बे में बैठकर सामने की पंक्ति में खड़ी दुनिया का मुआयना वो अपने अनोखे अंदाज़ में करते हैं। उनकी नज़र केवल एक पत्रकार की नहीं है बल्कि एक संवेदनशील इंसान की है। जो वो देखते हैं, उसे प्रभावी ढंग से पन्ने पर उतार भी देते हैं। उनके इन्हीं अनुभवों को हर शनिवार को आप इस साप्ताहिक स्तम्भ में पढ़ते हैं।

कहानियां

ये कहानियां हमारी-आपकी ज़िन्दगी से जुड़ी हैं, इसलिए ये आपको झकझोरेंगी,  सोचने पर मज़बूर कर देंगी

सूर्यनाथ सिंह

रज़ामन्दी

सूर्यनाथ सिंह

SUSHANT 18 JULY

इंडियन काफ्का

सुशान्त सुप्रिय

SUSHMA SINHA

रिश्ता

सुषमा सिन्हा

mahavir-raji

पंच

महावीर राजी

कविताएं

santwana

सांत्वना श्रीकांत

ऊंघता, दौड़ता और चिल्लाता अजनबियों में अपनापन ढूंढ़ता सफर। एकाकी मील के पत्थरों से गुजरता/ नई मंजिलें बनाता, बिगाड़ता सफर

VINITA

डॉ विनीता राहुरिकर

तुम नहीं होती तो/ अलसाया रहता है/ खिड़की का पर्दा/ सोया रहता है देर तक/ सूरज से नजरें चुराता/उदास रहता है/ चाय का कप

ANUPAM NISHANT

अनुपम निशान्त

क्या तुम आओगी मुझसे मिलने...?/ जब बारिश होगी, जब फूल खिलेंगे/ जब काले बादल छाएंगे, गरजेंगे, बरसेंगे/ तब...क्या तुम आओगी मुझसे मिलने..??

bhaskar

भास्कर चौधुरी

बुजुर्ग होता है/ बुजुर्गों का प्रेम / यात्रा तय कर चुका होता है / प्रेम बुजुर्गों का.../ जब ऊब चुके होते हैं जवान / शुरु होता है बुजुर्गों का प्रेम

बात जब हद से गुजर जाय ग़ज़ल कहता हूं

आपको प्रकाशित कर हम गौरवान्वित महसूस करते हैं

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