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कवि से पहले मैं ये मानता हूं कि आदमी को एक नेक इंसान होना चाहिए। कविता सबसे पहले कवि को ही संस्कारित करती है और वो  ये कहती है कि जिस दिन तुम इन शर्तों को नहीं मानोगे मैं उछट के चली जाऊंगी। यानि कि जब तुम्हारे जीवन में पतन आएगा  तब मैं  तुम्हारे पास नहीं रहूंगी। ये संकेत देती रहती है कविता। 

दिव्या विजय की कहानी 'यारेग़ार'

संज्ञा उपाध्याय की टिप्पणी

हरा पत्ता पीला पत्ता

डॉ हंसा दीप की कहानी

कविता

संजीव ठाकुर

आयोजन

कथा-कहानी की 13वीं गोष्ठी

कविता

धर्मपाल महेंद्र जैन

लिटरेचर प्वाइंट प्रकाशन

Literature Point Publication

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