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“आज हिन्दी साहित्य में एक आंदोलन की जरूरत है,  लेकिन एक सामाजिक आंदोलन चलना चाहिए, जो साहित्य को भी प्रेरित करे। उस आंदोलन को शुरू करने के लिए यह देखना होगा कि समाज में जो प्रवृत्तियां चल रही हैं, उनमें कौन सी प्रवृत्ति ऐसी है, जो नया आन्दोलन खड़ा कर सकती है।”  -रमेश उपाध्याय

हिन्दी कहानी में रमेश उपाध्याय नाम को किसी परिचय की जरूरत नहीं।  उनसे बात की है सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने। 

रमेश उपाध्याय से ख़ास बातचीत

दिव्या विजय की कहानी 'यारेग़ार'

संज्ञा उपाध्याय की टिप्पणी

हरा पत्ता पीला पत्ता

डॉ हंसा दीप की कहानी

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