अनुपमा शर्मा की कविता ‘अस्तित्व की जड़’

अदृश्य है ,है दृश्य भी,
सजीव में है,निर्जीव में भी,
ज्ञान में है, अश्रु में है,

मुस्कान में है,
आवाज़ में है, साज़ में भी,
नृत्य की मुद्राओ में भी,

अभिनय में भी, शिक्षा में भी,
आत्मविश्वास में भी,

विश्व की हर काबिलियत में भी,

उसकी प्राथमिकता है केवल सम्मान,

नाम है उसका स्वाभिमान !

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