डी एम मिश्र की 5 ग़ज़लें

1.
दूर से बातें करो अब वो विधायक है
कम मुलाकातें करो अब वो विधायक है।

खुद अँधेरे में रहो उसके लिए लेकिन
चॉदनी रातें करो अब वो विधायक है।

नोट की माला पिन्हाओ, थैलियाँ लाओ
धन की बरसातें करो अब वो विधायक है।

जन्मदिन उसका मनाओ खुद रहो भूखे
भेट सौगातें करो अब वो विधायक है।

वो इलाके का विधाता मानता खुद को

झुक के अब बातें करो अब वो विधायक है।

2
बजर बजता है तो उसको सुनाई कुछ नहीं देता।
उसे फिर लालबत्ती में दिखाई कुछ नहीं देता।

इलाके का वो जनप्रतिनिधि इलाके में नहीं आता,
उसे दिल्ली के आगे अब दिखाई कुछ नहीं देता।

ग़रीबों की मदद करता वो है धर्मात्मा लेकिन,
बिना चन्दा लिये कम्बल, रजाई कुछ नहीं देता।

वो भाई गाँव से लेकर चबैना शहर जाता है,
मगर जो है बड़ा साहब वो भाई कुछ नहीं देता।

ताज्जुब है कि उससे आपने उम्मीद कैसे की,
वो केवल जान लेता है कसार्इ कुछ नहीं देता।

3
सत्ता की कामयाबियों में देखिये उसे
जनता की परेशानियों में देखिये उसे।

जनता को सिर्फ़ आँकडे़ दिखा रहा है वो
यूँ झूठ की उपलब्धियों में देखिये उसे।

धनवान देश के मेरे कंगाल दोस्तो
दौलत है मगर कोठियों मे देखिये उसे।

कहने को तो वो माननीय हो गया मगर
इस मुल्क की बरबादियों में देखिये उसे।

अपराधियों में कल तलक उसका शुमार था
अब कर्णधार मंत्रियों में देखिये उसे।

लेागों के वास्ते वो था इक देवता समान
जब राज़़ खुला सुर्खि़यों में देखिये उसे।

4
मंत्री-अफ़सर दोनों भोग-विलास में डूबे हैं
जनता से बोलें हैं मगर विकास में डूबे हैं।

परदे के पीछे ये क्या -क्या खेल खेलते हैं
आँख मूँदकर लोग मगर विश्वास में डूबे हैं।

मेरे पूरे देश में जब पतझर ही पतझर है
मुगल गार्डेन के भँवरे मधुमास मे डूबे हैं।

कहाँ गये जो मासूमों के हक़ में लड़ते थे
बड़े-बडे़ कवि भाषा में , अनुप्रास में डूबे हैं।

आप सदन में बैठ के वहाँ मलार्इ काट रहे
सत्तर फ़ीसद लोग यहाँ संत्रास में डूबे हैं।

5
जनता हो लाचार तो राजा मजा करे
काटे कोई माल तो कोई लखा करे ।

राजा बदले जनता लेकिन वही रहे
जनता करे गुनाह तो किससे गिला करे ।

मेरा दिल तब और धड़कने लगता है
मेरा क़ातिल रहम करे जब दया करे ।

बहुत हसीं धोखे का चेहरा होता है
माफ़ी माँगे पल में , पल में ख़ता करें ।

साक़़ी की इस अदा के हम दीवाने हैं
मुस्काकर ज़्यादा पीने से मना करे ।

अच्छे दिन आयेंगे लेकिन क्या सबके
मालामाल हो नमो -नमो जो जपा करे ।

देश हमारा कई सुनामी देख चुका
देश रहे खुशहाल ये शायर दुआ करे

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2 Responses

  1. Kumar sushant says:

    बधाई स्वीकारें आदरणीय। सभी गजल एक से बढ़कर एक है।

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