नीरजा मेहता की कविता ‘ज़िन्दगी एक पहेली’

ज़िन्दगी
आदि से अंत तक
शाश्वत किन्तु क्षणिक
विस्तृत किन्तु संक्षिप्त
विचित्र किन्तु सत्य
अलबेली किन्तु नित्य
चिर परिचित किन्तु अकाल्पनिक
रहस्यमयी किन्तु दिलचस्प
विस्मयकारी किन्तु प्रभावकारी
अभिशापित किन्तु अलौकिक वरदान सी
उलझी डोर सी किन्तु
सपनों को साकार करती सी
प्रवाहमयी अद्भुत अभिव्यक्ति सी
भावानुकूल सुसंस्कृत आदर्शमयी
कविता की समीक्षा सी,
चक्रव्यूह समान
मानो हो
एक अनबूझी
अनसुलझी पहेली।
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नाम—नीरजा मेहता
तख़ल्लुस– ‘कमलिनी’
शिक्षा– एम. ए. हिन्दी साहित्य (मेरठ वि.वि.), एम. ए. संस्कृत साहित्य (हिमाचल वि. वि.), बी.एड. ( अन्नामलाई वि. वि.),
एल एल. बी. ( लखनऊ वि. वि.)
व्यवसाय– सेवानिवृत्त शिक्षिका
सम्प्रति—कवयित्री / लेखिका
विधा—–छंदमुक्त, गीत, मुक्तक, हाइकू, कहानी, लघुकथा, संस्मरण, लेख आदि
मनपसन्द विधा—छंदमुक्त (स्वतंत्र भाव)
सम्पर्क सूत्र —
पता—
बी 201 सिक्का क्लासिक होम्स,
जी.एच.– 249, कौशाम्बी
गाज़ियाबाद (यू. पी.)
पिन-201010
ई-मेल

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