नीलाम्बर द्वारा ‘लिटरेरिया’ साहित्योत्सव का आयोजन

आनन्द  गुप्ता

डॉ शम्भुनाथ

कोलकाता की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था नीलाम्बर द्वारा 12 से 15 अक्टूबर 2017 के बीच चार दिवसीय साहित्योत्सव ‘लिटरेरिया’ का शानदार आयोजन किया गया। गौरतलब है कि इस संस्था ने इस उत्सव के लिए किसी भी प्रकार का सरकारी या कॉरपोरेटी मदद नहीं लिया है। प्रथम दिन 12 अक्टूबर को भारतीय भाषा परिषद में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, इतिहास बोध व वर्चस्व की राजनीति’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।संगोष्ठी में जानेमाने कवि एवं आलोचक पंकज चतुर्वेदी ने  देश में बढ़ रही असहिष्णुता, धार्मिक कट्टरता एवं फासीवाद के प्रभाव पर चिंता जाहिर की।उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के खतरों से देश के लोगों को परिचित कराना बहुत जरूरी है।आलोचक वेद रमण ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की व्याख्या करते हुए उसे यूरोप की देन बताया। युवा आलोचक राहुल सिंह ने कहा कि आज सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भूमिका वर्चस्ववादी राजनीति तय कर रही है।परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक एवं सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ शंभुनाथ ने कहा कि भारत एक बहुसांस्कृतिक राष्ट्र है,यहाँ की सर्वसमावेशी संस्कृति ही हमारी एकता की आत्मा है।परिसंवाद का संचालन इतु सिंह ने एवं संयोजन संजय राय ने किया।

इस साहित्योत्सव के दूसरे दिन शरत सदन, हावड़ा में कविता पर्व आयोजित किया गया। तीन सत्रों में देशभर से आए कई चर्चित एवं युवा कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।कविता पाठ में शामिल कविगण थे – कुमार अंबुज, मदन कश्यप, पंकज चतुर्वेदी, मंदाक्रांता सेन,प्रियंकर पालीवाल,राज्यवर्द्धन, शहंशाह आलम,निर्मला तोदी,नील कमल,मनीषा झा,हेमंत देवलेकर,विमलेश त्रिपाठी, नीलोत्पल, विनय सौरभ, निशांत, विपिन चौधरी, वीरू सोनकर,रश्मि भारद्वाज, पंखुरी सिन्हा, प्रशांत विप्लवी, आनंद गुप्ता, कल्पना झा,सुदीप सोहनी,पूनम विश्वकर्मा , गौरव पाण्डेय, अंकिता रासुरी,मुकेश कुमार और विहाग वैभव । कविता पाठ के दौरान अत्याधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया गया। इस मौके पर हेमंत देवलेकर के काव्य संग्रह ‘गुल मकई’ और नील कमल द्वारा संपादित काव्य पुस्तिका ‘ हिन्दी कविता : संभावना के स्वर’ का लोकार्पण आलोचक शंभुनाथ ने किया। इसके अलावा नीलाम्बर की ओर से कविता कोलाज और माइम की प्रस्तुति की गई। अंत में ममता पाण्डेय द्वारा निर्देशित नाटक ‘एक रोज’ का मंचन किया गया जिसमें नीलू पाण्डेय ने एकल और साहसिक अभिनय किया। इस दिन के कार्यक्रम का संचालन ऋतेश पाण्डेय ,आनंद गुप्ता, निर्मला तोदी और संजय जायसवाल ने किया।

अमृता

लिटरेरिया उत्सव के तीसरे दिन’ गोर्की सदन,कोलकाता में ‘एक साँझ कहानी की’ कार्यक्रम के अंतर्गत वंदना राग ने अपनी बहुचर्चित कहानी ‘क्रिसमस कैरोल’ और चंदन पाण्डेय ने ‘जमीन अपनी ही तो थी’ शीर्षक कहानी का पाठ किया। इस दौरान इन कहानियों पर बनी लघु फिल्में भी कहानी पाठ के साथ-साथ दिखाई जाती रही जिसमे आशा पाण्डेय, कल्पना झा,ऋतेश पाण्डेय, विमलेश त्रिपाठी, विशाल पाण्डेय ने मुख्य भूमिका निभाई। दोनों फिल्मों का निर्देशन ऋतेश पांडेय ने किया और विजय शर्मा ने संगीत पर काम किया। इसके बाद विहान ड्रामा वर्क्स (भोपाल) द्वारा ‘हास्यचूड़ामणि’ नामक नाटक का मंचन किया गया। इसके निर्देशक थे सौरभ अनंत और संगीत दिया था अभिनेता हेमंत देवलेकर ने।  इस दिन के कार्यक्रम का संचालन ममता पाण्डेय ने किया।

अंतिम दिन सबसे पहले रश्मि बंदोपाध्याय एवं समूह  द्वारा काव्य नृत्य प्रस्तुत किया गया।इसके बाद सुशांत दास द्वारा ‘अ टेल ऑफ फिश’ शीर्षक माइम प्रस्तुत किया गया।अंत में विहान ड्रामा वर्क्स( भोपाल) द्वारा ‘अमृता’ नामक नाटक का मंचन हुआ। अमृता नाटक रसीदी टिकट पर आधारित था। इस नाटक के निर्देशक थे सुदीप सोहनी और संगीत दिया था नितेश मैंगरोल। इस अवसर पर कोलकाता की नाट्य संस्था लिटिल थेस्पियन को नाटक में योगदान के लिए वर्ष 2017 का रवि दवे स्मृति सम्मान प्रदान किया गया।  इस दिन के कार्यक्रम का संचालन कल्पना झा ने किया। मीडिया का भार संभाल रही थी सुषमा त्रिपाठी।

चार दिनों के इस कार्यक्रम में देश भर से आए 50 से ज्यादा लेखक कलाकार सम्मिलित हुए। पूरे कार्यक्रम के संयोजक दल में शामिल थे पूनम सिंह, आशा पांडेय, स्मिता गोयल, मनोज झा, विजय शर्मा, दीपक ठाकुर, पंकज सिंह, राहुल शर्मा, मधु सिंह,प्रियंका सिंह, प्रिया पांडेय, भरत साव, सुजीत राय, अवधेश शाह, निधि पांडेय, अभिषेक पांडेय। इनके अथक परिश्रम से ही लिटरेरिया कोलकाता सफलतापूर्वक संपन्न हो पाया।

 

 

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