पंकज कुमार शर्मा की तीन कविताएं

पंकज कुमार शर्मा

निवासी:  पिड़ावा जिला झालावाड़ राजस्थान,

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत

1. आईने.. बरसो से जड़े हैं..तेरे घर में जो आईनेउनका खयाल करनाउनमें तेरे हर दौर की शक्ल है.उन्होंने तेरी शक्ल कोसंवारा है..हर दाग को मिटाया है. 2. आकार लेती तस्वीरे अभी तो सवेरा हुआ है…सूरज ने दस्तक दी हैअभी औऱ चटख रंगबिखरेंगे…नयी तस्वीरे बनेगी..इनको सहेज कर रखनाइनमें एक एक लम्हा बोलेगा..जब अवसान होता है..अक्सर रंग उड़ जाते है.. 3. मैं तुमसा नजर आऊँ… रंगों की परम्परा औऱ खुशियों में झूमेंआओ फिर पुरानी गलियों में घूमें..जहां मैं तुमसा ही नजर आऊँ… बरसों बाद निभा ले फिर रस्मेंतोड़ दें अहम की दीवारेंहोने दें आसमां को गुलालजहां तुम गुलाब नजर आओऔऱ…मैं तुम जैसा नजर आऊं आज फिर चुरा लाऊं,तेरे चित्रों की डायरीकुछ अधूरे चित्रों को पूरा कर दूं आज के दिनइन रंगों के सहारे सहीतु मुझमें नजर आयेमैं तुझमे नजर आऊं..।

2 comments

  1. पंकज जी तीनों कविताऐं शानदार हैं।बहुत अच्छी।

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