प्रेरणा शर्मा ‘प्रेेरणा’ की सात प्रेम कविताएं

प्रेरणा शर्मा ‘प्रेरणा’

पेशे से अध्यापिका

विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं , समाचार पत्रों  में लेख, कविताएं प्रकाशित

बोधि प्रकाशन द्वारा  प्रकाशित पुस्तक ‘ स्त्री होकर सवाल करती है ‘  में कविताएं प्रकाशित  हो चुकी हैं ।

एक

प्रभात  के
आगमन  से ..
निशा  के
अवसान  तक ..
घूमती  रहती  हूँ मैं
तुम्हारी ही
स्मृतियों  की
धुरी  पे …!

दो

देह  के
बंधनों  के परे ..
नेह  के
बंधन  बँधे ..
प्रीत  के
अभिसार  से ,
प्रणय  के
चिर – ज्वार  में
आकुल अंतर बहे …!

तीन

प्रेम  में  तुम्हारे
डूब के   मैंने
देखो , कैसे -कैसे
सुख – स्वप्न रच लिए ..
अनजाने  में  जैसे
वेदनाओं के
संधि – पत्र में
नेह के
अनुबंध लिख दिए…!

चार

तुम्हारे
प्रणय का
अटल विश्वास..
खिला देता है
मेरे अंतस में
अनंत  पलाश ….!

पांच

नहीं जान पाई ..
कब ह्रदय – द्वार पर
आये तुम ले कर
सन्देश नेह का चिर..
कब तुमने  थाप दी
बंद – से इस द्वार  पर
और जाने कब खुल गई
अर्गला लाज की.. झनझना कर..!

छह

सहेजती हूँ
दिन – रात ..
तुम्हारे होने का अहसास
अपने आस – पास ….!

सात

नीले  अम्बर का
सारा  विस्तार ..
पाना  चाहती हूँ ,
मैं  तुम्हारे  प्यार का
पारावार  पाना चाहती हूँ ….!

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