बाज़ार

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

 

एक लड़की
छपवाती है
दुनिया की
सबसे प्रतिष्ठित
फैशन पत्रिका में
अपना नग्न चित्र।

बताते हैं
वह दुनिया की
सबसे महंगी
मॉडल है
शायद इसलिए
उसकी नग्नता में
सौंदर्य नहीं
ज्यामिति झलकती है।

शरीर की ज्यामिति
अर्थ की ज्यामिति
जो देती है आमंत्रण
विज्ञापनदाताओं को
लो देखो
मेरा कौन सा अंग
तुम्हारे काम आएगा
मेरे किस अंग के
उपयोग से
बढ़ सकती है
तुम्हारे उत्पाद की बिक्री

दरअसल
वह मॉडल
अब लड़की नहीं रही
अब
वह सिर्फ़ ज्यामिति है
जिसे विभिन्न कोणों से
नापते हैं
विज्ञापनदाता
बेचते हैं
अपना सामान
महंगी होती जाती है
वह मॉडल
किसी महानगर के
घटते भूखंड की तरह

मैं पूछता हूं उससे–
मनुष्य से
ज्यामिति बन जाने का
दुख नहीं है तुम्हें?
फफक-फफक कर
रो पड़ती है वह

बताती है-
उसे पता ही नहीं चला कि
बाज़ार ने उसे कब
लड़की से ज्यामिति
बना दिया।
बाज़ार उसे
अब लड़की नहीं
बनने देता।

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