बीएचयू में बेटियों पर बर्बरता से गुस्से में साहित्यकार

अब महिषासुर को टॉलरेट नहीं करेंगे

भारती गौड़

मैंने तीन दिन पहले नवरात्रि की शुभकामनाएँ दी थी, क्योंकि मैं उस समय आशावादी थी।

डंडों से खेला जा रहा है देश में हर तरफ। कहीं पर गरबों के नाम पर तो कहीं पर छेड़छाड़ का विरोध कर रही लड़कियों को हटाने के नाम पर। डांडिया रास मुबारक हो हम सबको। नवरात्रि में डंडो का ऐसा उपयोग हमें तो पहले कभी सूझा ही नहीं।

महादेव की नगरी में देवियों पर तांडव हो रहा है। इतिहास में दर्ज है जब देवी ने तांडव किया था तब महादेव ने उनके पैरों में आकर उन्हें शांत किया था। अब महादेव तो आने से रहे तो देवियों पर डंडे बरसाए जा रहे हैं।

औरत की जितनी झंड उसे देवी बोल बोलकर की गई है इस देश में उतनी झंड तो उसे एक इन्सान मान लेने पर भी नहीं होती। लेकिन नहीं बे, तुम बोलो हमको देवी और खा जाओ नोंचकर। विरोध करें तो बक दो कि खेल रहे हैं विक्टिम कार्ड, बक दो कि नारीवाद नारीवाद नारीवाद। जैसे ही लड़की ने मुँह खोला नहीं कि आ जाओ नाचते हुए और बोल दो कि हुंह आ गयी विक्टिम कार्ड खेलने, आ गई नारीवाद का झंडा लेकर। और कुछ है क्या तुम्हारे पास बोलने को? है क्या?

खैर हमको क्या हम तो नौ दिन देवी के नौ रूपों को पूजेंगे ना! पूजेंगे नहीं क्या! लडकियाँ तो खुद ही छिड़ती हैं उन्हें कोई नहीं छेड़ता। 7 बजे बाहर निकल रही हो (शर्म आनी चाहिए, 7 बजे बाद क्या सोचकर तुम बाहर निकल जाती हो यार, हद है बेशर्मी की) तो किसको पूछ के निकल रही हो अब ऐसे में कोई तुम्हारे कुरते में हाथ डाल दे और पूछ ले कि, "हॉस्टल जाओगी या रेप करवाओगी" तो उसमें अब तुमको विरोध करने की क्या ज़रूरत आन पड़ी। ऊपर से तुमने बताया भी नहीं कि तुम वामी हो या दक्षिणपंथी! खैर वो छोड़ो वो हम पता लगा लेंगे।

"हर हर महादेव" की नगरी में जब "हर हर मोदी" के नारे लगते हो और "वही हर हर मोदी जी" अपना रास्ता बदल कर निकल लेते हो तब "काशी का अस्सी" में काशीनाथ सिंह का ये कहना कि, "आने वाले वक़्त में ये भारत सोचेगा कम बोलेगा ज़्यादा" ठीक नहीं जान पड़ता क्या!

राजनीति का हाल ये है कि आप बस मुँह खोलिए आपके मुँह में राजनीति घुसेड़ दी जाएगी फिर चाहे भले ही आपने वो मुँह चाय पीने के लिए ही क्यों ना खोला हो।

ज्ञान बाँटने मत आना कि मोदी बैठेंगे क्या तुम्हारे घरों के बाहर! जब देश में नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी को पूजा जा रहा है और राजस्थान के 12 जिलों में 105 महिलाओं को डायन करार देकर उन पर अमानवीय यंत्रणाओं से उन्हें मार मारकर कुओं में फेंका जा रहा है, जब बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में से बनारस और हिन्दू को अलग अलग निकाल कर उसका महिमामंडन किया जा रहा है जबकि वहाँ लड़कियों पर डंडे बरसाए जा रहे हैं, जब मेरे एनजीओ में एक 13 बरस की बच्ची का अबॉर्शन कराकर मैं आधी रात को घर लौट रही हूँ क्योंकि उसका बाप उसके साथ बलात्कार करता आ रहा था, जब तबकी साला हर जगह ये हो रहा है, तब... तब आना मत यहाँ ज्ञान बाँटने।

करोड़ो लोग एक प्रतिनिधि को इस आस में चुनते हैं कि हर जगह नहीं तो कम से कम किसी एक या दो जगह तो वो प्रतिनिधि अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा ही, वो भी तब जबकि वो प्रतिनिधि उसी वक़्त उसी जगह पर मौजूद हो। लेकिन नहीं, हमको तो मालूम है कि प्रधानमन्त्री जी ने रास्ता क्यों बदला क्योंकि उनको तो किसी ने पता ही नहीं लगने दिया कि उनके संसदीय क्षेत्र में आखिर हो क्या रहा था। और ये हमको कैसे मालूम है कि उन्हें नहीं मालूम था, ये हम नहीं बताएँगे, क्योंकि हमको सिर्फ बोलने से और भक्ति से मतलब है क्योंकि कहा ना हम अंधे भक्त है।

भोलेनाथ की कसम, अब तो ऐसा लगता है कि कहीं कोई फॉर्म भरते वक़्त उसमे हमसे ये पूछा जाए कि, "सेक्स?" और हम कहें "फीमेल" और उधर से कोई कस के तमाचा झड़ दे और फीमेल सुनते ही बक दे कि, "अच्छा! विक्टिम कार्ड खेल रही हो।" बस अब यही दिन देखना बाकी रह गया है।

तुम तो चलाओ रे डंडे लड़कियों पर। साला 7 बजे बाद बाहर जाओगी! हम यहाँ गरबों में चला लेते हैं।

तुम हर हर महादेव कर लो हम यहाँ जय माता दी कर लेंगे।

मारो रे लाठियों से लड़कियों को, शाम को जाकर दुर्गा सप्तशती पढ़ लेना नहीं तो महादेव की नगरी में गंगा मैया तो है ही, डुबकी लगा लेना, काहे कि पाप धुल जाता है न!

वो क्या था, "नारी तुम केवल श्रद्धा हो... छोड़ा ना यार!

पी.एस.- फर्ज़ी का ज्ञान बाँटने मत आना, काहे कि देवी हैं हम और महिषासुर को टॉलरेट नहीं करेंगें। राजनैतिक रोटियाँ सेकने तो बिल्कुल ही नहीं आइएगा।

रमेश शर्मा

तुम्हारा इस तरह उठ खड़ा होना

तुमने ठीक जगह मारा है मुक्का 
और ठीक जगह लगी है चोंट

एक छटपटाहट पसर चुकी 
इस तरह तुम्हारे उठ खड़े होने से 
तुमसे ही सीखेंगे लोग
कि जीतने की पहली सीढ़ी है उठ खड़ा होना

जिन्हें मालूम ही नहीं 
कि जीतने के लिए 
उठकर खड़ा भी होना होता है तुम्हारी तरह 
उन मुर्दों में भी 
जान फूकेंगी तुम्हारी ये निराली हरकतें
जिसे कभी दिल से स्वीकारा नहीं किसी ने 
और मुर्दों सा जिया जीवन

तुम्हारी हिम्मत के बीज 
धरती पर रोपित होंगे एक दिन 
और तुम्हारी तरह हजार आकांक्षाएं लहलहा उठेंगी यहां

अलग अलग रूप लिए
तुम इसी तरह आते रहना 
इस धरती को हरा भरा करने

यह धरती कितनी बेजान ,मुर्दा और बंजर ही लगती रहेगी 
तुम्हारे आए बिना ।
#बीएचयूकीआकांक्षाकेलिए

 

स्मिता सिन्हा

लड़कियों लड़ो ! हम तुम्हारे साथ हैं !!

चीखो 
कि हर कोई चीख रहा है 
चीखो 
कि मौन मर रहा है 
चीखो 
कि अब कोई और विकल्प नहीं 
चीखो 
कि अब चीख ही मुखरित है यहाँ 
चीखो 
कि सब बहरे हैं 
चीखो 
कि चीखना ही सही है 
चीखो 
बस चीखो 
लेकिन कुछ ऐसे 
कि तुम्हारी चीख ही 
हो अंतिम 
इतने शोर में.............

मैने तो सुना--1

शिव की नगरी थी, 
यूनिवर्सिटी का कैम्पस था , छेड़खानी की गई
लडकी ने आवाज दी, वो हमने नहीं सुना

प्रेम के लिए आकुल लडको ने सुना 
और चुप रहे

प्रशासन ने सुना 
और बंद कर दिया हास्टल में

प्रधान जी ने सुना 
और दिल्ली चले गए

पूरी बात
हास्टल की दीवारो ने धरती को बताया
धरती ने पेडो को, पेडों ने हवा को
हवा ने मेघो को

और जब बरस कर कहा मेघों ने
लडकी ने 
डरना बंद कर दिया 
भौचक रह गए सब के सब

लडकी जब डरना बंद कर देती है
सुंदर हो जाती है
सुना आपने
मैने तो सुना

 

फोटो --विहाग वैभव के वॉल से

 

 

मैने तो सुना २

भाड मे जाओ वामियों
भाड में जाओ दक्षिणा पंथियों
फ़जूल बहस मत कर

मां बहन की इज्जत पर
हाथ डालकर 
कोई काशी में नही रह सकता

तुलसी के राम है काशी में
जय शंकर प्रसाद का गुंडा
आज भी
घूमता है गलियो मे

मेरे त्रिशूल पर बसी है काशी, 
क्योटो नहीं हो सकती,

यह तो स्वयं शिव ने कहा
बी एच यू के गेट पर आकर लडकियों के बीच
सुना आपने
मैने तो सुना

 
 
 

राज्यवर्द्धन

अभिव्यक्ति

तुमने
नदी की धार को
प्रतिबंधित किया-
बहने से

मेड़ बांधे
आड़ लगाए
बड़े -बड़े बांध बनाये

जल की धार
कहाँ-कहाँ से फूटेगी
तुम्हें क्या पता?

 
नूर मुहम्मद नूर

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