भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

भास्कर चौधुरी

परिचय

जन्म: 27 अगस्त 1969

रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.)

शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड

प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

यात्रा:    सुनामी के बाद दो दोस्तों के साथ नागापट्टिनम की यात्रा. वहाँ ‘बच्चों के लिए बच्चों के द्वारा’ कार्यक्रम के तहत बच्चों को मदद पहुँचाने की कोशिश, आनंदवन, बस्तर, उत्तराखंड,  शांतिनिकेतन की यात्रायें।

संपर्क
1/बी/83
बालको (कोरबा)
छत्तीसगढ़ 
495684
मो. 9098400682

bhaskar.pakhi009@ gmail.com

 

1

प्रेम

एक

बुजुर्ग होता है 
बुजुर्गों का प्रेम 

यहाँ कोई हल्का 
या भारी नहीं होता 
पानी होता है बुजुर्गों का प्रेम –

 पानी की तरह साफ 
पानी की तरह पारदर्शी 
पानी की तरह नम 
पानी की तरह लम्बी

यात्रा तय कर चुका होता है 
प्रेम बुजुर्गों का…

जब ऊब चुके होते हैं जवान 
शुरु होता है बुजुर्गों का प्रेम !!

दो

झील किनारे

जिसे प्रेमियों का झील कहते हैं

बैठे थे दोनों –

लड़की की जुल्फें

हवा में लहराती रहीं

और लड़का

उन्हें अपने गालों पर

महसूस करता रहा


वे घूमते रहे महलों में

जहाँ

बादशाह

प्रेम किया करते थे

और अब

परिंदे प्रेम करते हैं

वे घूमते रहे

हाथों में हाथ डाले

उनके हाथों ने स्पर्श किया

उन पत्थरों से बनी

आदमकद खिड़कियों को

जिन्हें कभी

रानियाँ स्पर्श किया करती थीं


वे

ताजमहल शीशमहल

लाल किला चार मीनार

कुतुबमीनार

जाने कहाँ कहाँ गए

यहाँ तक की कश्मीर की वादियों

और ऊटी की सड़कों पर

चीख चीख कर

एक दूसरे को

‘आइ लव यू कहा’

कि वादियों से टकराकर लौटे

तो सुन पायें अपनी आवाज़

कि वे प्यार करते हैं एक दूसरे को

दिल की गहराइयों से

 

वे

मंदिरों मस्ज़िदों और दरगाहों में गए

यहाँ तक की दलाई लामा के पैगोडा भी गए

वे जहाँ भी गए

एक दूसरे का हाथ पकड़े रहे

इस तरह वे करते रहे प्रेम का इज़हार


वे

जहाँ जहाँ गए

लोगों की आँखों से ओझल न हो सके

लोगों की आँखें उनका

पीछा करती रहीं

और अंत में आँखों से ही पकड़ लिया

दोनों हाथों को ज़ुदा किया

एक सुर में कहा लोगों ने –

खुदा को यह मंजूर नहीं

कहा यह भी

कि अगर चाहा खुदा ने

तो ज़न्नत में रह सकती है यह

जोड़ी सलामत

और उन्हें ज़न्नत बख़्श दिया…

 

3

उसने कहा

उसने कहा –

बहुत कड़क है वह

मर्द की तरह  डांटती है

 

उसने कहा –

रौबदार है उसकी आवाज़

वह ‘मैनली वुमैन’ है

बच्चे डरते हैं उससे

उसने कहा –

कितनी ताकत है उसके पास

बुलेट चलाती है फर्राटे से

मर्द की तरह

 

उसने कहा –

क्या खेलती है वह

खेलते-खेलते चीखती है

मर्द की तरह

 

उसने कहा

वह छिपाती नहीं कुछ भी

कितना बोल्ड लिखती है

मर्द की तरह

 

उसने कहा

बच्चों को पाला है उसने अकेले

पिता की तरह

 

कहा नहीं उसने –

वह औरत है

औरत की तरह !!

 

4

इन दिनों

इन दिनों 
आम है 
झूठ का बताशा होना 
और घुल जाना 
सच के पानी में…

 

इन दिनों 
आम है 
मीठे पानी में गोते लगाना
ज़रूरी नहीं जिसके लिए 

छलांगें लगाना
किसी पहाड़ी झील में 

आसान है इस झील का दिख जाना
बाज़ार के बीचों बीच 
किसी भी कस्बे में 
शहर में 
दिल्ली में दून में
इज़राइल में रंगून में … !

 

5

शुतुर्मुर्ग

मैंने बंद कर ली आँखें
और सोचा शुतुर्मुर्ग की तरह
कि अंधी है दुनिया

जम्हाई ली मैंने
और सोचा चिड़ियाघर में 
कैदी शेर की तरह
उबासियाँ ले रही है सारी दुनिया

चुप हो गया मैं 
और सोचा सीतनिद्रा में पड़े
ध्रुवी भालू की तरह 
कि इन दिनों ऐसी ही है दुनिया… !!

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