मुकेश बोहरा अमन की कविता ‘शब्द-साधना’

शब्दों को जानो, शब्दों को मानो ,
शब्दों की बातें होती निराली ।

शब्दों का व्यापार, शब्दों का व्यवहार ,
शब्दों से है होली, दीवाली ।।

शब्दों से तुम हो , शब्दों से मैं हूँ ।
शब्दों से हारा , शब्दों से जय हूँ ।।

शब्द है करेला व अम्बुआ की डाली ।
शब्दों की बातें होती निराली ।।

शब्द है नौका , लहरों का झोंका ।
कभी देते उलझा, कभी देते मौका ।।

अदब से सवारी , शब्दों की आली ।
शब्दों की बातें होती निराली ।।

शब्दों से रिश्ते, शब्दों से घिसते ।
शब्दों से खेले , कभी हम पिसते ।।

शब्दों से प्रीति , शब्दों से जाली ।
शब्दों की बातें होती निराली ।।

शब्दों के अपने होते हैं सौ अर्थ ।
अमन शब्द पूजो, करो ना कभी व्यर्थ ।।

शब्द कटारी, है फूलों की डाली ।
शब्दों की बातें होती निराली ।।

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मुकेश बोहरा अमन
बाड़मेर राजस्थान
8104123345

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