मुहम्मद अब्यज ख़ान की दो कविताएं

सात जन्म

जब कभी तुमको
महसूस हो अकेलापन
जब कभी उचट जाये
ज़िन्दगी से मन
थाम लेना
फिर मेरा हाथ तुम
ये वादा रहा मेरा
तुमसे सनम
सात जन्मों तक न सही
उम्रभर साथ निभाएंगे हम

एहसास

आँखों में समंदर है
और चेहरा उदास है
बिखरी हुई ज़िन्दगी
टूटी हुई आस है
उलझन सी दिल में है
और लब खामोश हैं
तेरे बगैर जीना है
यही मुश्किल एहसास है

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