शशांक सफ़ीर की कविता याद

याद आए कभी जो मेरी आपको
देखकर आईना मुस्कुरा दीजिए
अक्स मेरा तेरी आँख में यदि दिखे
सनम पलकों का मोती बना लीजिए
दिल की दुनिया अमावस सी बदरंग हो
जब स्वयं की स्वयं से प्रबल जंग हो
राह तन्हा हो या फिर कोई रंज हो
दूर मंजिल लगे न कोई संग हो
अपने कदमों पे जब भी यकीं न रहे
देके आवाज मुझको बुला लीजिए
यूँ हथेली पे मुझको अगर लिख सको
तो समझिए कि पूरा मैं हो जाऊंगा
गुनगुनाओ मुझे जो मेरी जिंदगी
गीत बनकर हृदय मे उतर जाऊंगा
सुरमई राग सा मैं निखर जाऊं यदि
सुर्ख होंठो पे मुझको सजा लीजिए।

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2 Responses

  1. Ramachandra Pareek says:

    आपकी कविता याद बहुत अच्छी लगी।

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