राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘अहं ब्रह्म न अस्मि’

शब्द ब्रह्म हैं
न,बिल्कुल न;
ये सिर्फ हैं
अभिव्यक्ति का माध्यम
जो आप दे सकते हैं
बिना बोले भी
गूँगे गुज़ार देते हैं
उम्र सारी
इशारों ही इशारों में
चिड़िया भी
चहकते चहकते
ममता देती
चुगा देती
चोंच से बच्चे भी
ख़ुश होते,वैसे जलस्तर स
जैसे मेरी पत्नी देती
कौए भी करते क्रोध
खूब करते काँव काँव न
दुश्मनों से करते मुक़ाबला
करते हाथी अपना झुंड बना के
शेर भी राजा बन दहाड़ते
कुते भागते दुम दबा के
हिरन आम आदमी से
रहते डरे डरे से
कछुए भी रहते मुँह छुपा के
मगरमच्छ भी आँसू बहाते
भगत हैं बगुले भी
है न हर अभिव्यक्ति
उनके पास भी
जो न बोलते
न कुछ कहते
“शब्द ही ब्रह्मास्मी”
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1 Response

  1. Tanu Dutta Sharma says:

    Aham Braham Na Asami ” ek shandar Kavita hai jisme Kavi ne apne bhavon ko prakat karne ki baat kahi hai. Asha hai aage bhi inki aur kavitaen padne ko milengi

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