राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘पुल’

कहाँ आसान है
पुल होना
दो पाटों को पाटना
टूटने का ख़तरा है
हरदम लरजता है
जैसे ही कोई गुज़रता है
जाता है कोई
इस ओर से उस ओर
पुल होना बहुत कठिन है
दरक जाये ईंट
ढह जाता है सारा

पानी भी बहता
अपनी लय से
कभी तेज़ कभी मद्धम
जब भी टकराता
पुल के खंबे से
लरजता कभी गरजता
कभी बाढ़ कभी सूखा
रहते याद उसे तटबंध
सीमाओं में रहना
याद दिलाता सेतु
तुम्हें मिलाने को
मैं हूँ तो
———————–

You may also like...

3 Responses

  1. Tanu Dutta Sharma says:

    Pul” ek Shandar Kavita hai

  2. Mona says:

    “Pul” is a poem to be read .

  3. राजेशललित"शर्मा says:

    दीपेश जी का आभार प्रोत्साहित करने के लिये ।

Leave a Reply