वह जो कल्पना है : कविता संग्रह

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प्रेम क्या है
इस प्रेम की जगह कहाँ है
जितना पूछता हूँ मैं ख़ुद से
उतना डूबता हूँ मैं ख़ुद में

जो भी यह सवाल करेगा, ऐसे ही डूबता जाएगा। प्रेम होता ही इतना अनन्त है। प्रेम के कई रंगों को अपने शब्दों में साकार किया है अर्पण कुमार ने। इस संग्रह की कविताएं पढ़ते वक्त अनायास ही आपको ऐसा लग सकता है कि कवि ने आपके मन की बात कैसे समझ ली। प्रेम करने वाले हर शख्स के लिए एक जरूरी संग्रह

आवरण : कुंवर रवींद्र

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