शहर काइयांपन सिखाता है

जयप्रकाश मानस

www.srijangatha. com
कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक)
एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा
रायपुर,

एक कवि की डायरी किस्त : 5

28 नवंबर, 2011

तदर्थ उपाय

मलेशिया ने टैक्सी चालकों द्वारा महिलों के साथ बलात्कार और डकैती की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए महिलाओं के लिए महिला चालकों द्वारा चलाई जाने वाली टैक्सी सेवा शुरू की है। ख़बर अच्छी है किन्तु यह तदर्थ उपाय ही है । जब तक मानसिकता और संस्कार में तब्दीली नहीं आयेगी यह सब जारी रहेगा न मलेशिया में न अपने देश में ।

कोई नहीं है नामलेवा

लेखकश्री बनवारीलाल ऊमर वैश्य जी से पता चला कि भारतेंदु मंडल के सशक्त हस्ताक्षर पं. बदरी नारायण उपाध्याय चौधरी (प्रेमघन) की कोठी आज वीरान पड़ी है । कभी यह भारतेंदु मंडल के बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र, रायकृष्ण दास, बालमुकुंद गुप्त, बाबू गोकुलचंद, अम्बिका प्रसाद व्यास आदि उन्नायकों से गुलज़ार हुआ करती थी । क्या कोई नहीं है नामलेवा ?

उम्र 100 – पेशी 2009 बार

आज नवभारत में छपा एक समाचार पढ़कर मन भर आया….उम्र-100 वर्ष, पेशी-2009 बार, फिर भी नहीं मिला न्याय । यह सच्चाई है तो ऐसी सच्चाईयाँ अन्याय और तंत्र और प्रशासनिक मनमानी की सच्चाईयाँ भी हैं । जशपुर जिले के फरसाबहार विकास खंड की माँगीबाई 80 वर्षों से न्यायालय की चक्कर लगा रही है पर ज़मीन विवाद का निपटारा आज तक नहीं हुआ है ।

अदम गोंडवी आयेंगे

कल मुमताज भाई और मैंने दुष्यंत कुमार के बाद हिन्दी के सबसे ज़्यादा चर्चित और प्रतिभाशाली गज़लकार श्री अदम गोंडवी जी से जमकर बातें की । कितनी सहज आवाज़ है उनकी, लेकिन ठोस और सरल भी !

सबसे बड़ी बात पहली ही बार में अपनी एक घरू समस्या के बारे में वे बातें करने लगे । यह भावुकता नहीं आत्मीय गहराई है । गाँव-देहात मनुष्य को सरस बनाता है । शहर काइयाँपन सिखाता है ।  वे रायगढ़ के युवा रचना शिविर ( 7 – 9 जनवरी 2012) में मार्गदर्शन करने आ रहे हैं । उनकी एक किताब का भी विमोचन रायगढ़ में होगा । इससे आत्मीय ख़ुशी और क्या होगी ?

चांदनी चौक के पिजरों में

दिल्ली में लालकिले की प्राचीर से कबूतर उड़ाने की रस्म साल में बमुश्किल एकाध बार निभायी जाती है लेकिन उसके ठीक सामने चांदनी चौक की पटरियों पर पिजरों में क़ैद कबूतरों के अलावा अन्य अनेक पक्षी और दूसरे जीव सरेआम बिकते देखे जा सकते हैं।

3 दिसंबर, 2011

टूटे हुए प्यार का स्मरण

देवानंद ने अपनी आत्मकथा ‘रोमाँसिंग विद लाइफ’ में लिखा है कि वे जीनत अमान से बेहद प्यार करते थे और इसीलिए उन्हें अपनी फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में अभिनेत्री बनाया था। लेकिन देवानंद का यह प्यार परवान चढ़ने से पहले ही टूट गया, क्योंकि उन्होंने जीनत को एक पार्टी में राजकपूर की बाहों में देख लिया था। देव साहब के टूटे हुए प्यार को स्मरण करते हुए आज के दिन की शुरूआत… टूट कर भी कोई जोड़ सकता है । देव बन सकता है और आनंद भी बटोर सकता है । कभी पढ़ा है याद आता है इस वक्त, गोपाल दास नीरज कहते हैं – ये देवानंद ही थे जिन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा, जैकी श्रॉफ, जीनत अमान, टीना मुनीम..तमाम लोगों को फ़िल्मो में मौका दिया ।

 

पता नहीं कहाँ है !

कवि-मित्र व आकाशवाणी के अधिकारी राजेन्द्र उपाध्याय बता रहे थे – उनके घर के पास ही अमर कवि सुभाष मुखोपाध्याय रहते थे। वे उनसे मिलने का साहस नहीं कर पाये। उनको ज्ञानपीठ मिलने के बाद ही वे उनसे मिलने गये ।

वे फटी लुंगी में बीड़ी पी रहे थे। ज्ञानपीठ सम्मान में मिली वाग्देवी की मूर्ति कहीं ‘शोकेस’ में नहीं सजी हुई थी।

‘पता नहीं कहाँ है ?’- उपाध्याय जी के पूछने पर वे बड़ी सहजता से बोल गये थे।

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