संजीव ठाकुर की बाल कथा ‘जालिम सिंह’

स्कूल का चपरासी बच्चों को बहुत बदमाश लगता था। बच्चे उसे जालिम सिंह नाम से पुकारते थे।

जालिम सिंह स्कूल के बच्चों पर हमेशा लगा ही रहता था। किसी को मैदान में दौड़ते देखता तो गुस्साता, झूले पर अधिक देर झूलते देखता तो गुस्साता। कोई बच्चा फूल तोड़ लेता तब तो उसकी खैर ही नहीं थी। टिफिन के वक्त कोई बच्चा गेट से बाहर तो नहीं ही जा सकता था, अगर बाहर बिक रही किसी चीज को कोई खरीदने की कोशिश करता तो जालिम सिंह कहीं से जरूर प्रकट हो जाता और पीछे से बच्चों के बाल खींच लेता। बच्चे उससे बहुत परेशान रहते थे। चाहते थे कि किसी तरह जालिम सिंह यह स्कूल छोड़कर चला जाए। मगर वह था कि जाता ही नहीं था!

एक दिन बच्चों को बहुत मजा आया। जालिम सिंह को प्रिंसिपल सर खूब डाँट रहे थे। टिफिन के समय उसे डाँट पड़ रही थी। बच्चे खुश थे। सबसे ज्यादा खुश रोहन और जय थे। दो-चार दिन पहले ही छोटी-सी बात पर जालिम सिंह इन दोनों को पकड़कर प्रिंसिपल सर के पास ले गया था। प्रिंसिपल सर ने दोनों को डाँट पिलाई थी। 'आज अच्छा हुआ!’ दोनों सोच रहे थे।

लेकिन उस दिन रोहन ने जालिम सिंह को बचा लिया था। इतवार का दिन था। शाम का समय। रोहन अपने पापा के साथ बाजार गया हुआ था। एक दुकान के पास जालिम सिंह की किसी से बहस हो रही थी। बहस बढ़ते-बढ़ते जालिम सिंह मार-पीट करने लगा था। अब उसे चारों ओर से कई लोगों ने घेर लिया था और पीटने लगे थे। रोहन का ध्यान उधर ही लगा था। वह अपने पापा से कह पड़ा—''पापा, पापा, देखो जालिम सिंह को लोग पीट रहे हैं।‘’

''कौन है जालिम सिंह?” पापा ने पूछा तो रोहन बोला—''हमारे स्कूल का चपरासी पापा! प्लीज उसे बचा लो?”

पापा बोले—''मैं कैसे बचा लूँ? कई लोग मिलकर उसे पीट रहे हैं बेटा!”

''कुछ तो करो पापा?” रोहन रुआँसा हो गया था।

अचानक पापा को एक उपाय सूझा। उन्होंने अपना स्कूटर स्टार्ट किया। वे चौराहे तक गए। चौराहे पर खड़े पुलिस वालों को इस घटना की जानकारी दी। पुलिस वाले वहाँ पहुँचे और उन्होंने जालिम सिंह को बचाया।

रोहन के पापा जालिम सिंह को डॉक्टर के पास ले गए। पट्टी करवाई और रिक्शे पर बैठाकर घर पहुँचाया।

दो-चार दिन बाद जब जालिम सिंह स्कूल लौटा था तब वह बिलकुल बदल गया था। वह रोहन को बहुत प्यार करने लगा था। यही नहीं, वह सभी बच्चों को प्यार करने लगा था। अब वह बच्चों को बहुत कम डाँटता था। हाँ, बच्चे जब बाहर की कोई चीज खरीदना चाहते तो वह जरूर पीछे से उनके बाल पकड़ लेता था!

 

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