सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’

कितनी छोटी सी ख्वाहिश थी उसकी
वह दुनियाभर के उन बच्चों के लिए
सचमुच रोटी बन जाना चाहता था
जो उस वक्त उसे रोटी समझ बैठे थे
जब वो भूख से बिलबिला रहे थे

सुनिए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’ उन्हीं का आवाज़ में

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