सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘रिवाज’

विमलेश शोध के सिलसिले में जलपाईगुड़ी पहुंचा ।वह जनजाति पर शोध कर रहा था ।जलपाईगुड़ी के टोटापड़ा कस्बे में जनजातियों की काफी संख्या है ।विमलेश को वही जगह उचित लगा ।वहां पर आवास की व्यवस्था करने में जुटा था तभी बाबलू से मुलाकात हुई जो जनजाति का ही था ।बाबलू ने कहा — ” आमार बाड़ी ते  (हमारे घर में ) एक कमरा खाली है ।बस विमलेश की समस्या का समाधान हो गया ।
विमलेश जनजातियों की गरीबी और अशिक्षा को देखकर चिंतित हो उठा ।बाबलू थोड़ा पढ़ा लिखा था और मजदूरी कर गुजारा करता ।सुबह मजदूरी के लिए निकल जाता और शाम को जब वापस लौटता तो उसके साथ एक लड़की होती ।लड़की रात भर बाबलू के साथ रहती और सुबह अपने मां – बाप के पास चली जाती ।विमलेश तो दोनों को पति पत्नी ही समझ रहा था ।

आखिर बाबलू से पूछ ही डाला — ” तूम्हारी बीवी हर सुबह मायके क्यों चली जाती है  ? तुम मजदूरी करने जाते हो तो वह घर तो संभाल सकती है । ”
” ओरे बाबा,  अभी शादी नहीं हुआ ।” बाबलू ने सच्चाई बताई ।
” फिर हर रात तुम्हारे साथ – – – –  ”
” साब ,पहले बच्चा पैदा कोरेगा फिर शादी कोरेगा – – – यह हमारा ‘ टोटो जनजाति ‘ का रिवाज है ।”
विमलेश को बड़ा अजीब लगा । उसने  बाबलू को समझाते हुए कहा — ” पहले तो शादी करना चाहिए फिर बच्चा पैदा करने का प्रयास  ” ।
बाबलू ने तब विहंसते हुए कहा — ” शादी के बाद उसको बच्चा नहीं हुआ तो   ? “

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