हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य

आलोक प्रकाश

एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड से मैच नहीं करता है. कई बार मैने सर के ग्रुप में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजी हैं ,लेकिन एक भी छपी नहीं है अभी तक. ग्रुप का काम- धंधा देखने के लिए उन्होंने एक मॉडरेटर रखा हुआ है. मैं उससे मिलने ग्रुप के ऑफिस गया . बात-चीत का अंश प्रस्तुत है आप सब की सेवा में . आप सब पढ़ें .

क्या  लिखते हैं आप?- कवि  हैं? आलोचक  हैं? व्यंगकार  हैं? कथाकार  हैं? उपन्यासकार  हैं?

छोटी छोटी कहानियाँ और छोटे छोटे संस्मरण लिखता हूँ.

अच्छा! गल्प लिखते हो!

जी नही!  लघु कथा!

हाँ वही! हिन्दी कामज़ोर है तुम्हारी.

मॉडरेटर महोदय आप से तुम पर उतर आए . मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँची. लेकिन मैं खून का घूँट पीकर रह गया.

थोड़ा-बहुत लिख लेता हू. अपनी लेखनी पर विश्लेषण नही किया है मैंने.

तो अब करना शुरू कर दीजिए. आपको अगर खुद ही नही मालूम है कि आप क्या बेच रहे हैं तो आपको खरीदार कैसे मिलेंगे.

बेचना नहीं चाहता हूँ. लोगों तक अपनी क्रिएटिविटी पहुँचना चाहता हूँ.

ये कुछ अच्छा कहा तुमने! तुम्हारी भाषा में सुधार हो रहा है. अच्छी संगति में रहोगे तो क्रमश: सुधार आएगा.  अब तक कहीं कुछ छपा है तुम्हारा?

जी हाँ, फेसबुक पर लिखता रहता हूँ.

कुछ ब्लॉग कुछ साइट बना कर रखी है?

जी नही !  what is on your mind पर पोस्ट करता हूँ.

उसको पोस्ट करना कहते हैं,पब्लिश होना नहीं.

सिर्फ़ गप लिखते हो या कुछ छन्द भी लिखते हो ? ग़ालिब को पढ़ा है तुमने?

जी हाँ! ग़ालिब तो मेरे पसंदीदा शायर हैं

कुछ सुनाओ .

कुछ मीठा सा खिलाती थी वो,

स्वाद के लिए थोड़ा नमक मिलाती थी वो,

इतना लजीज दवा नहीं होता,

दिल समझता था जहर खिलाती है वो.”

वाह वाह! क्या लिखा है!लाजबाब है ग़ालिब

ये मेरी लिखी हुई  है!

अरे वाह! तुम तो छुपे रुस्तम निकले यार!

कवि को काव्य में ढूंढ़ो सर ,काया में नहीं

तारीफ सुनकर मैं कुछ ज़्यादा ही फूल गया- फूल कर कुप्पा हो गया.

लेकिन आज कल ऐसी कविताएँ या शायरी नहीं चलती हैं. कविता में संगीत नहीं होना चाहिए. सिर्फ़ अर्थ और भाव होना चाहिए.

मॉ़डरेटर को लगा उसने मुझे कुछ ज्याद भाव दे दिया. मेरी अकड़ उसे पसंद नही आई.

अगर कानों में संगीत  नहीं गूँजे तो वो कविता कैसी

तुम्हारी सोंच और शायरी दोनों ग़ालिब के जमाने की है और दूसरी मत्वपूर्ण बात ,तुम्हारी शायरी में बापवाद की बू आती है. देखो ये समय माँवाद का है.

माओवाद तो  सुन रखा है, माँवाद पहली बार सुन रहा हूँ.

तुम अपनी माँ के बेटे हो – ये सोंच रखना माँवाद है

देखो सर! मैं अपने माँ-बाप दोनों का बेटा हूँ. आप रिश्ते को गाली मत दीजिए.

तुम तो इमोशनल हो गये! इस टॉपिक को हम यहीं क्लोज़ करते हैं

सर को कैसे जानते हैं? आपकी लेखनी से वो अवगत हैं क्या?.

हाँ, जब कुछ लिखता था उनकी लाइक आती थी. कितनी बार उन्होंने दिल बिखेरा. अभी कुछ दिनों से उनके कॉमेंट्स आने बंद हो गये हैं

उनके फ्रेंड लिस्ट में हैं क्या?

जी हाँ! हूँ ना!

क्या नाम है आपका ?

‘आलोक प्रकाश’

नाम में तो विज्ञान झलकता है,साहित्य नज़र नहीं आता.तुम अगर इमोशनल  नही होगे तो तुम्हें एक और सजेशन दूँगा.

बोल दो सर ! बची- खुची कसर पूरी कर दो.

इस प्रकार के नाम साहित्यकारों के नही होते हैं. बेहतर होगा तुम अपना नाम बदल लो.

अब इस उमर में नाम कैसे बदलूँ?

नाम के आगे ‘कमीना’ ,’जलील’ या कुछ और जोड़ दो. राइटर्स वाली टच आएगी तुम्हारे नाम में.

नाम में क्या रखा है सर, काम अच्छा होना चाहिए!

अच्छा ठीक है. सर के फ्रेंड लिस्ट में तुम्हारा नाम ढूँढ रहा हूँ मैं.

मॉ़डरेटर ने तुरंत चेक किया.

बकौल उसके मैं सर के फ्रेंडलिस्ट में नही था.

आपका नाम दिख नहीं रहा है. किसी छद्म नाम से अकाउंट खोला रखा है क्या?

क्या बात कर रहे हैं ? लैपटॉप दीजिए मुझे 2 मिनट के लिए. अरे! ये सर की फोटो कैसे बदल गई?वैसे  मस्त दिख रहे हैं इसमें सर!मेरे पास दूसरा प्रोफाइल है उनका.शायद दो प्रोफाइल बना रखी है उन्होंने.

नये प्रोफाइल पर ही एक्टिव रहते हैं वो. पुराना प्रोफाइल virtually inactive हो गया है.वो प्रोफाइल तो उन्होंने बुक लॉंच के समय लाइक्स पाने के लिए और बिक्री बढाने के लिए बनाया था.उसमें दादी चाची और बहुत सारे उनके भाई बंधु  हैं . जिनको साहित्य की समझ नही है.  जब उनका पहला बुक लांच हुआ तो उन्‍होनें सब को साथ ले कर चलने की सोची. लेकिन उससे किताब की बिक्री पर ख़ास असर नहीं हुआ.

मैने तो उनकी बुक खरीदी थी. क्या लाजवाब लिखा है उन्होंने! उनकी लेखनी में तो सरस्वती का वास है.

अरे आप समझदार हैं -इंटेलेक्चुअल  हैं. लेकिन उनके फ्रेंड लिस्ट में बहुत सारे unwanted लोग समा गये थे. अब बुक पब्लिश होने के बाद सर का social status भी चेंज हो गया.बड़े-बड़े साहित्यकारों के साथ उठना बैठना होता है उनका.First impression is the last impression-आपका प्रोफाइल पिक, आपका फ्रेंड लिस्ट ये सबसे important है. साथ ही आप किस तरह के पोस्ट्स share करते हैं. फालतू लोगों को वो फ्रेंड लिस्ट से निकालते तो वो अनुचित होता. इसलिए उन्होंने एक नया प्रोफाइल बनाया.

अच्छा,छोड़ो इन बातों को,अब आपके profile का analysis करते हैं.

ये क्या !आपने भूखे नंगे लोगों की फोटो शेयर की है, शहीदों के फोटो पोस्ट कीजिए. आपको काफ़ी लाइक्स मिलेंगे.

आपने एक भी अँग्रेज़ी का पोस्ट share नहीं किया है .

सारे के सारे हिन्दी के पोस्ट देख कर  इंटेलेक्चुअल क्लास आप से बिचक जाएगा.

ये कौन सा क्लास है?

आप अँग्रेज़ी में कुछ लिखते हैं कि नही?

नहीं! अँग्रेज़ी मेरी थोड़ी कमजोर है.

देशभक्ति पर लिखते हैं?

जी नहीं!

देखिए !ये  आपके weak points हैं.

जी! मैं शृंगार रस में लिखता हूँ- हिन्दी में लिखता हूँ.

देखिए अँग्रेज़ी हमारे रोम रोम में समाया हुआ है. और हम सारे भारतीय देशभक्त हैं. शृंगार रस -वीर रस ये सब भूल जाइए.

ये बच्ची को गोद में ले करके जो प्रोफाइल पिक बनाया है उसे चेंज कीजिए. आपके हाथ में एक किताब या माइक्रोफोन होना चाहिए. कवर पिक आपकी या आपकी बीवी की फोटो नहीं होना चाहिए. उसमें कुछ नयापन होना चाहिए.

किस तरह का नयापन?

गाएँ नदी का पानी पी रहीं हैं या फिर गधे की पीठ पर बंदर बैठा हुआ है. अगर ऐसा नहीं पसंद है तो सूर्योदय,सूर्यास्त झरने, पहाड़. कुछ भी चलेगा.

ये क्या लिखा है आपने ! Working in a private company

तो क्या लिखूं?

कवि-सवी,लेखक-वेखक, बिना पंख का परिंदा, इस तरह का कुछ लिखिए.

अरे! आपने तो अपना पूरा परिवार ही फ्रेंड लिस्ट में add कर लिया है. अरे! मामी- चाची-दादी इनके लिए हम facebook join नहीं करते हैं. उनका आशीर्वाद तो हमारे साथ हमेंशा बना रहता है.पाँच-दस सुंदरियों को अपने लिस्ट में add कीजिए. लोग आपकी तरफ़ सम्मोहित होंगे .

पहले आप बुनियादी बातों में चेंजेज लाइए ,उसके बाद आपकी रचना हमारे ग्रूप में प्रकाशन के लिए कन्सिडर की जाएगी.छापने का अधिकार तो सर और मैडम के पास है. अगर बुनियादी बातें सही हैं तो मैं फ़ॉरवर्ड कर दूँगा . देखिए पब्लिश करवाने के लिए आपको सर या मैडम को खुश करना होगा.

कैसे खुश होते हैं वो?

आप ग़लत समझ रहे हैं.

आपकी रचना में उनको खुश करने की ताक़त होनी चाहिए.

या फिर आप ग्रूप के लिए कुछ सहायता राशि दे दीजिए – ये फास्ट ट्रैक मेथड है. कम से कम 5001 रुपये.

ठीक है सर, बाद में फिर आता हूँ मैं आप से मिलने. अभी कुछ काम याद आ गया.

चोरों ने  दिन में शुरू कर दी है चोरी,

रातों को अब वो आरम करते हैं.

कत्ल करना है दिन में आसान,

दिन में पहरेदार आराम करते हैं.

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3 Responses

  1. नकुल गौतम says:

    आलोक भाई!
    अच्छा व्यंग्य,
    सटीक चोट।

    बधाई

  2. Anil says:

    एक असाधारण व्यंग्य इतनी साधारण भाषा में , मन मस्तिष्क ताज़ा हो गया 💐💐बधाई

  3. Rajesh"Lalit"Sharma says:

    आलोक प्रकाश का लेखकों के अंर्तमन को सामने रख दिया।छद्मावरण लपेटे लेखक एवं रचनाकार नाम पाना चाहते हैं बस किसी तरह कहीं कुछ छप जाये।बढ़िया व्यंग्य ।साधु।

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