Monthly Archive: May 2016

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आरती तिवारी की तीन कविताएं

आरती तिवारी छाले माँ आँतों में छाले पाले जाने कैसे जीती रही बरसों हथेली में उगाती रही सरसों हम रहे अनभिज्ञ उसकी खामोश कराहों से दर्द फूलता रहा खमीर सा वो चढ़ाये रहती खोखली हँसी की परतें माँ का जिन्दा होना ही आश्वस्ति थी,हमारी खुशियों की हमारे लिए ही वो...

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श्रीराजेश की दो कविताएं

श्रीराजेश देखो कामरेड देखो कामरेड , देखो सर्दी की ठिठुरन की मार के निशान उसके रक्ताभ चेहरे पर किस कदर दिख रही है   अब वह बड़े मालिक को बेड टी देने लायक नहीं रहा उसकी धमनियों में बहता खून लंबे-चौड़े भाषण सुनते-सुनते फ्रिज हो गया हैं   अब हाथों...

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मज़दूर दिवस पर पांच कवियों की कविताएं

हड़ताल  के बाद गोपाल प्रसाद स्व. गोपाल प्रसाद खुद मज़दूर थे। जूट मिल में मशीन चलाते थे। मशीन चलाते हाथों ने जब कलम पकड़ा तो मज़दूरों का दर्द बखूबी उभर कर सामने आया। ये कविता उनकी किताब ‘फूलों में दुपहरिया हो गया हूं’ से ली गई है। गुल्ली-डंडा सब बंद...

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राकेश कायस्थ का व्यंग्य ‘मत रोइए मी लॉर्ड…’

राकेश कायस्थ मी लार्ड का सादर अभिवादन। आप इस देश के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश हैं और मैं इस देश का एक अदना सा नागरिक। मेरे बाप-दादा कहा करते थे—- समझदार वही है जो कोर्ट-कचहरी के चक्कर से दूर रहे। कानून के रखवाले बहुत रूलाते हैं। बचपन में जो...

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अर्पण कुमार की दो कविताएं

अर्पण कुमार भँवर तुम्हारे गाल पर भँवर पड़ते हैं मैं उस भँवर में डूब जाना चाहता हूँ तबस्सुम से भरे तुम्हारे होंठों को भरपूर पीना चाहता हूँ तुम हो तो दुनिया आबाद है मेरी तुम्हारे पास होने मात्र से हवा मेरे नाम का संगीत रचती है जब मुस्कुराती हो तुम...