Monthly Archive: November 2016

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मनोज शर्मा की छह कविताएं

मोम ज़िन्दगी मोम सी जलती रही पिघलती रही हर पल इक नया रूप लिए बनती रही बिखरती रही नयी अनुभूति सी हर एक क्षण हर दिशा में एक जीजिविषा लिए जिन्दगी बदलती रही निखरती  रही एक आकार बना लिया जिन्दगी ने अब मोम की तरह क्षय होकर स्वयं को नया...

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प्रतिभा चौहान की पांच कविताएं

आज का दिन शताब्दियों ने लिखी है आज अपने वर्तमान की आखिरी पंक्ति आज का दिन व्यर्थ नहीं होगा चुप नहीं रहगी पेड़ पर चिड़िया न खामोश रहेंगी पेड़ों की टहनियाँ न प्यासी गर्म हवा संगीत को पियेगी न धरती की छाती ही फटेगी अंतहीन शुष्कता में न मुरझायेंगे हलों...

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कविता का नया रहस्य

शहंशाह आलम कविता को समझने के लिए कई प्रतिमान गढ़े गए हैं। प्रतिमान गढ़ने का तरीक़ा सबका अपना होता है। एक कवि होने के नाते कवितारत रहते अकसर मेरे मन में कविता को समझने की कोशिश चलती रही है और कशमकश भी। जिस तरह मनुष्य होने के नाते मैं एक...

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भरत प्रसाद की लंबी कविता ‘बंधक देश’

(अपने ही देश में  दर –ब –दर  हुई इराक की जनता को समर्पित ) तौल  दिया है खुद को गिरवी  रख दी  है , उसने शरीर  की बेच  डाली है आत्मा , मजहब  के हाथों तौल  दिया है खुद को , खुदा के आगे जी कर भी वह अपने लिए...

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अनिरुद्ध सिन्हा की पांच ग़ज़लें

एक कोई  तस्वीर  धुंधली  सी  ख़यालों में उभरती है मगर वो मजहबी झगड़ों में कुछ कहने से डरती है नए लफ़्ज़ों  के  लहंगे में सियासत जब उतरती  है सहम जाती है हर ख़्वाहिश शराफ़त घुटके मरती है किसी के  इश्क़ में  अपनी कोई  चाहत नहीं होती मुहब्बत  हुक़्म  देती  है ...

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परितोष कुमार पीयूष की तीन कविताएं

मत आना प्रिय तुम! सुनो प्रिय मत आना तुम मुझसे मिलने ठीक नहीं है मौसम मेरे शहर का यहाँ शहर की नालियों में लाशें ही लाशें हैं सड़कों पर धर्म और राजनीति के साँप फुफकार रहे हैं यहाँ की गलियों में खूनी फब्बारों का आनंद लेने आती है प्रशासनिक गाड़ियां...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘कबीरदास’

यह काल्पनिक कहानी नहीं है , सच्ची घटना है । पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने मामा के यहाँ रहने के लिए आया । वहीं मामाजी ने मुझे यह सत्य-कथा सुनाई । पिछले कई सालों से शहर के इलाक़े रामपुरा शरीफ़ में एक अर्द्ध-विक्षिप्त बूढ़ा भटकता हुआ दिख...

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राजेंद्र राजन की सात कविताएं

1. श्रेय पत्थर अगर तेरहवें प्रहार में टूटा तो इसलिए टूटा कि उस पर बारह प्रहार हो चुके थे। तेरहवां प्रहार करने वाले को मिला पत्थर तोड़ने का सारा श्रेय। कौन जानता है बाकी बारह प्रहार किसने किए थे। 2.   हत्यारों का गिरोह हत्यारों के गिरोह का एक सदस्य हत्या करता...

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दिनेश शर्मा की तीन कविताएं

बीड़ी तुम्हारी पैदाइश निम्नवर्गीय है जंगली पत्तों की तुम्हारी खाल गन्दे हाथों में आकर ही शक्ल लेती है। तुम्हारा जीवन एक चिंगारी से शुरू होता है आजीवन तुम शड़ड़-शड़ड़ साँस लेती हुई बुझती हो। तुम्हारे कुनबे का टी. बी. से क्या गहरा नाता है जिसके होंठ चूमती हो उसके फेफड़ों...

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पीड़ा और प्रेम की अजस्र धारा वाली ‘एक नदी जामुनी सी’

पुस्तक समीक्षा सुशील कुमार मालिनी गौतम अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका होते हुए हिंदी में लिखती हैं जो हिंदी के लिए एक बड़ी अच्छी बात है। गजल-संग्रह के बाद बोधि प्रकाशन से 2016 में उनकी एक कविता की किताब *एक नदी जामुनी सी* आई है। पूरे संग्रह से गुजरने पर मुझे...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

 विस्थापन मेरा यह विस्थापन करोड़ों-करोड़ बरस का है जाना हुआ जिसमें छिपाने जैसा कुछ भी नहीं न बचाने जैसा कुछ है कुछ है भी बचा हुआ तो वह दूर किया जा चुका है मुझसे   अड़ा खड़ा उस पेड़ को जब हटाया गया बलपूर्वक कितने-कितने पक्षी विस्थापित हो गए बरसात...