Monthly Archive: December 2016

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‘ऐनुल’ बरौलीवी की ग़ज़ल

मेरी दुआओं में असर दे दे मौला फ़क़त अपनी नज़र दे दे ये ज़िन्दगी मेरी संवारो तुम ऐसी इनायत का शजर दे दे ईमान मेरा ये मुक़्क़मल हो मुझको मदीने का सफ़र दे दे इज़्ज़त मुझे भी बख़्श दे मौला रहमत तू अपनी मेरे सर दे दे मैं दुश्मनों का...

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नित्यानंद गायेन की पांच कविताएं

उफ़नती  नदी  का  दर्द और तुम्हारे आंसुओं ने बता दिया उफ़नती नदी का दर्द कमजोर आदमी का दावा मेरा यकीन था या भ्रम कि करता रहा दावा तुम्हें जानने का ! यह भरोसा अपने भीतर छिपे उस कमजोर आदमी का दावा था, जो खुद को जान नहीं पाया आज तक...

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पद्मश्री स्वर्गीय बेकल उत्साही को श्रद्धांजलि

एक इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगे मंदिर-मस्जिद कुछ नहीं होंगे घर-घर में मयख़ाने होंगे जीवन के इतिहास में ऐसी एक किताब लिखी जाएगी जिसमें हक़ीक़त औरत होगी मर्द सभी अफ़्साने होंगे राजनीति व्यवसाय बनेगी संविधान एक नाविल होगा चोर उचक्के सब कुर्सी पर बैठ के मूँछें ताने...

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क़ैस जौनपुरी की कविता ‘वो चड्ढी पहना हुआ आदमी’

सुबह का सूरज पीली धूप चाय की दुकान भूख लगी है, चाय पिला दो!   नज़र उठाके सबने देखा चड्ढी पहना हुआ एक आदमी सामने खड़ा था सिर्फ़ चड्ढी और धूल-मिट्टी से सना हुआ पता नहीं कहाँ से आया था? और पता नहीं कहाँ को जाएगा?   भूख लगी है,...

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अनुजा शर्मा की दो कविताएं

एक तुम्हें याद है वो रात वो रंगों की बरसात कि जिसमें से कुछ रंग बिखेरे थे तुमने मुझ पर वो प्रेम पक्के रंग सा मुझ पर ऐसा चढ़ गया है मानो कभी उतरेगा ही नहीं पर अब बिसरा दी तुमने वो सारी बातें तुम्हें तो ज़रा सा भी मलाल...