समकालीन कविता का महत्वपूर्ण दस्तावेज : दिल्ली की सेल्फी कविता विशेषांक

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लड़ना था हमें भय, भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ हम हो रहे थे एकजुट आम आदमी के

विभूति कुमार मिश्र की दो कविताएं

एक मैं पुरुष हूं मुझे स्त्रियों का मनोविज्ञान नहीं पता मुझे पता है प्रेम और वासना का अंतर देह मिलन

स्मिता सिन्हा की सात कविताएं

मेरा प्रेम और आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं देता चलो अब लौटते हैं हम अपने अपने सन्दर्भों में तथाकथित दायरे