Monthly Archive: April 2017

0

বর্নালী চন্দ র অনুগল্প ‘ফিরে দেখা’

ছাতাটা নিয়ে যা, বাইরে কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি আসছে তেড়ে। মার কথা কানে না তুলেই একছুটে বাইরে বেরিয়ে গেল অহনা। কোচিং ক্লাসে দেরি হয়ে যাবে। বেরিয়েই দেখল, চারিদিকে ঘন কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি নামল বলে। প্রায় দৌড়ে মন্দিরের মোড়টা ঘুরেই কুন্তলদাদের বাড়ির সামনে আসতেই পাদুটো অজান্তেই আস্তে হয়ে গেল। বুকের...

0

नूर मुहम्मद ‘नूर’ की दो भोजपुरी ग़ज़लें

एक आदमिन के ढ़हान, चारू ओर उठि रहल बा मकान चारू ओर एगो बस जी रहल बा नेतवे भर मू  रहल  बा  किसान चारू ओर अब के पोछी हो लोर, ए, दादा रो रहल, समबिधान चारु ओर ई अन्हरिया, बड़ा पुरनिया  हो कब ले  होई  बिहान चारू ओर जे बा...

0

अजमेर अंसारी ‘कशिश’ की एक ग़ज़ल

पस्ती में जिसने माना के तदबीर इश्क़ है पहुँचा बुलन्दियों पे तो तक़दीर इश्क़ है ! क्यों देखूँ इस जहान कीं रंगीनियाँ तमाम मेरी नज़र में यार की तस्वीर इश्क़ है हर लम्हा आता–जाता बताता है दोस्तो दुनिया है एक ख़्वाब तो ताबीर इश्क़ है मुझ सा कोई गनी नहीं...

0

তিনকবির সংলাপ ” মেঘবালিকার ধারাপাত…”

ভেজা মেঘের আলাপে আবেগ করে স্নান আমার মনে তোমার ছবি হয়না কভু ম্লান। আকাশের মেঘ যখন মনের মাঝে এসে জমাট বাঁধে অগোছালো ভাবনা গুলো তখন কবিতা হয়ে ডুব দেয় মন দরিয়ায়। পামেলা, দেবারতি, শেলী এরা তিন বন্ধু।না চাক্ষুষ কেউ কাউকে দেখেনি। তবুও তারা বন্ধু। ভার্চুয়াল জগৎ এর মোহজালে আবদ্ধ তিন...

0

पवन तिवारी की कविता किताबें

अब लोगों के हाथों में किताबें नहीं दिखतीं पर सच यह भी है कि मेरे हाथों में भी किताबें नहीं दिखतीं कुछ दोस्तों के हाथों में कभी-कभी दिखती थीं किताबें पर मेरे हाथों में तो रोज रहती थी किताबें जो रिश्ता था रुहानी सा किताबों से,किताबी हो गया कल जब...

0

लिटरेचर प्वाइंट काव्यगोष्ठी में आनन्द गुप्ता का कविता पाठ

लिटरेचर प्वाइंट लाइव में सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का कविता पाठ लिटरेचर प्वाइंट लाइव में राजेंद्र राजन की कविता ‘बामियान में बुद्ध’ Literature Point LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ भाग 2 लिटरेचर प्वाइंट LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ : भाग 1

0

लिटरेचर प्वाइंट लाइव में सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का कविता पाठ

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

0

चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव की सात कविताएं

जब कविताएं नहीं होंगी सोचो जरा ऐसे कल के बारे में जब कविताएं नहीं होंगी सोचो जब गीतों में सुर नहीं होंगे सोचो जब आल्हा चैती के स्वर नहीं होंगे सोचो जब ताल, धुन और लय नहीं होंगे सोचो जब किस्से और किस्सागो नहीं होंगे सोचो जब बच्चे सपने देखना...

0

लिटरेचर प्वाइंट लाइव में राजेंद्र राजन की कविता ‘बामियान में बुद्ध’

भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं डॉ निधि अग्रवाल की तीन कविताएं

1

दीपक अरोड़ा स्‍मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना-2017 हेतु पांडुलिपियां आमंत्रित

कवि दीपक अरोड़ा की स्‍मृति में शुरु की गई पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना के दूसरे वर्ष के लिए बोधि प्रकाशन की ओर से हिन्‍दी कविता पुस्‍तकों की पांडुलिपियां सादर आमंत्रित हैं। पहले वर्ष में पांच पुस्‍तकों का चयन किया गया था- जिनका प्रकाशन हो चुका है। इस वर्ष तथा आने...

0

संजीव ठाकुर की कविता ‘वे भूल गए’

वे भूल गए वे दिन जब बाढ़ में डूबे गाँव से निकलते थे सतुआ खाकर चिलचिलाती धूप में जाते थे शहर के कॉलेज नंगे पाँव ! अब वे महानगर में माल रोड पर रहते हैं चार कमरों के मकान में ए॰सी॰ में सोए बगैर नहीं निकलता पेट का पाखाना कमोड...

0

14 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में वार्षिक साहित्यिक सम्मानों हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित

रायपुर । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यिक वेब पत्रिका ‘सृजनगाथा डॉट कॉम’ द्वारा पिछले 13 वर्षों से प्रतिवर्ष दिए जानेवाले सम्मानों/पुरस्कारों के लिए हिंदी के रचनाकार, प्रकाशक, संपादक, साहित्यिक संस्थाएं एवं अनुशंसक पाठक प्रविष्टियाँ 30 जून 2017 तक प्रेषित कर सकते हैं ।...

1

‘कविता लिखना आसान काम नहीं’

1.कविता के प्रति आपका झुकाव कैसे उत्पन्न हुआ ? शहंशाह आलम : मेरा पूरा समय अभाव में गुज़रा है। होश संभाला तो देखा पिता हम पाँच भाई और तीन बहनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिता बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुंगेर प्रतिष्ठान में मामूली ड्राइवर थे। जो...

0

Literature Point LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ भाग 2

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

0

अनुपमा शर्मा की कविता ‘अस्तित्व की जड़’

अदृश्य है ,है दृश्य भी, सजीव में है,निर्जीव में भी, ज्ञान में है, अश्रु में है, मुस्कान में है, आवाज़ में है, साज़ में भी, नृत्य की मुद्राओ में भी, अभिनय में भी, शिक्षा में भी, आत्मविश्वास में भी, विश्व की हर काबिलियत में भी, उसकी प्राथमिकता है केवल सम्मान,...

0

मनोज चौहान की तीन कविताएं

ऐ कविता   दस्तक देना तुम कभी ऐ कविता दिनभर कमर तोड़ चुके ईंट-भठ्ठे के मजदूरों की उन बास छोड़ती झुग्गियों में बीड़ी के धुंएं और सस्ते देशी ठर्रे के घूंट पीकर जो चाहते हैं मिटा देना थकान और चिंताओं को व भीतर उपजती वेदना को भी और बुनते हैं सपनों...

0

পামেলা চক্রবর্তীর কবিতা “একটি রূপকথার জন্ম!”

   সব শব্দের অর্থ থাকলে অর্থহীন শব্দেরা নিঃশব্দ হয়ে যায়।           “হাজার কথা”র ভীড়…                     নিঃশব্দ হলে মন্দ কি? তবে ,সেইদিন, এক ‘সাধারণ’ছেলে….                     যখন এক ‘অ’ মেয়ের...

0

দেবারতী পাঠক চ্যাটার্জীর গল্প “এক বৈশাখে দেখা হল দুজনায়…”

এই সুন্দর স্বর্নালী সন্ধায়…. একটানা গানের আওয়াজ ভেসে আসছে পাশের বাড়ি থেকে।   মল্লিকা দি গান গাইছে। খুব সুন্দর গান গায় মল্লিকা দি। কি মিঠে গলা। রোজ ভোরে মল্লিকা দির রেওয়াজের সুরেই ঘুম ভাঙ্গে আমার। প্রথমে সা ধরে রেওয়াজ চলে বেশ কিছুক্ষন।  ভৈরব-ভৈরবীর সুরে আর ভোরের আধো অন্ধকারে চোখ খুলি...

0

संगीता गांधी की लघुकथा ‘अज्ञात अंधेरे’

सरकारी हस्पताल के एक कोने में आमिर  बुत बना बैठा था ।अनजाना अँधेरा उसके चारों ओर छाया था । ये क्या हो गया ?उसने अपने ही हाथों से अपने दिल के टुकड़े को कैसे मार दिया ! अंदर डॉ उसके 12 साल के बेटे का इलाज कर रहे थे ।सर...

0

लिटरेचर प्वाइंट LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ : भाग 1

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं