Monthly Archive: June 2017

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एकतल्खियां खून की विरासत हैछोड़ ना यार ये सियासत हैमुफ़लिसी जा रही है महफ़िल मेंमुफ़लिसी को कफ़न की दावत हैहुस्न तेरा मिटा के दम लूंगासांस तुझसे मेरी बगावत हैवाकया ये समझ नहीं आतारात को दिन से क्यों शिकायत हैभागता क्यों है तू “मनी” ग़म सेग़म तो अल्लाह की इबादत हैदोमुकद्दर...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ?– बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है ।– इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।— मुझे वसीम अकरम...

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विशाल मिश्रा की कविता ‘आज भी’

गुलाबी सूती कपड़े पर हरे धागे से कढ़े फूल आज भी ख़ुशबू देते हैं। बेतरतीब बालों को सलीका सिखाने की ख़ातिर वो चार चिमटियां आज भी उनको दाबे हैं। चमकता नग नाक पर उस चेहरे की नूर बढ़ाने में सबसे आगे है। गोरी पतली दूसरी वाली उंगली में सोने का...

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नीरू मोहन की कविता ‘ईश्वर की कृपा जीवलोक तक’

जापानी काव्य शैली ताँका संरचना- 5+7+5+7+7= 31 वर्णदो कवियों के सहयोग से काव्य सृजन पहला कवि-5+7+5 = 17 भाग की रचना , दूसरा कवि 7+7 की पूर्ति के साथ श्रृंखला को पूरी करता |पूर्ववर्ती 7+7 को आधार बनाकर अगली श्रृंखला 5+7+5 यह क्रम चलता रहता है इसके आधार पर अगली...

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कमलेश भारतीय की दो कविताएं

एकजादूगर नहीं थे पितापर किसी जादूगर से कम भी नहीं थे सुबह घर से निकलते समय हम जो जो फरमाइशें करतेशाम को आते ही अपने थैले सेसबको मनपसंद चीजेंहंस हंस कर सौंपते जैसे किसी जादूगर का थैला होअब पिता बन जाने परसमझ में आया कि जादूगर की हंसी के पीछेकितनी पीडा छिपी होती...

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मनीषा जोबन देसाई की कहानी ‘अब क्या कहे ?’

“जितवन …..क्या कर रहे हो बाहर ? देखो ये कौन आया है ?” माँ की आवाज़ सुनकर अपने स्कूटर की लाइट ठीक कर रहा जित जल्दी से घर के अंदर आया । “ओह ,कब आये आप बिजल भैया ?” “बस अभी अभी… मेरी मुंबई की पढाई ख़त्म हुई और वापस...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्राw/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक )फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउसखंदारी अपार्टमेंट , खंदारीआगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल पहले की नहीं, कुछ...

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मनीषा जोबन देसाई की कविता ‘काफी नहीं?’

बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मे , आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजो ले !   पर .. ये जो समय है, वो दूर से चमक कर टूटते हुए तारे की तरह बिखर बिखर जाता है, और ..आंसुओ की...

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राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘पुल’

कहाँ आसान है पुल होना दो पाटों को पाटना टूटने का ख़तरा है हरदम लरजता है जैसे ही कोई गुज़रता है जाता है कोई इस ओर से उस ओर पुल होना बहुत कठिन है दरक जाये ईंट ढह जाता है सारा पानी भी बहता अपनी लय से कभी तेज़ कभी...

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पीयूष शिवम की ग़ज़ल ‘अम्मा’

रो रहा था मैं करूँगा क्या अंधेरा हो गया, ज्यों छिपाया माँ ने आँचल में सवेरा हो गया।   मिल्कियत सारे जहाँ की छान ली कुछ न मिला, गोद में जाकर गिरे माँ की, बसेरा हो गया।   इस फ़रेब-ओ-झूठ  की दुनिया की नज़र न लगे, माँ की बाँहों में...

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आरती कुमारी की दो कविताएं

आरती कुमारीजन्म तिथि:  25 मार्च, 1977पता:  द्वारा – श्री ए. एन. पी. सिन्हा,  शशि भवन, आजाद काॅलोनी, रोड- 3,  माड़ीपुर, मुजफ्रपफरपुर- 842001,’शिक्षा: एम.ए. अंग्रेजीद, एम.एड, पीएच-डी.व्यवसाय: सहायक शिक्षिका के रूप में राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा, मुजफ्रपफरपुर में  पदस्थापित। प्रकाशन : कैसे कह दूँ सब ठीक है (काव्य संग्रह),  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं...

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शशांक सफ़ीर की कविता याद

याद आए कभी जो मेरी आपको देखकर आईना मुस्कुरा दीजिए अक्स मेरा तेरी आँख में यदि दिखे सनम पलकों का मोती बना लीजिए दिल की दुनिया अमावस सी बदरंग हो जब स्वयं की स्वयं से प्रबल जंग हो राह तन्हा हो या फिर कोई रंज हो दूर मंजिल लगे न...

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भास्कर चौधुरी की दस कविताएं

भास्कर चौधुरीजन्म: 27 अगस्त 1969रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.)शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एडप्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्टा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।यात्रा:   ...

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समीर कुमार ठाकुर की कहानी “लव यू डैड”

समीर कुमार ठाकुरसमीर नवोदित कथाकार हैं। लिटरेचर प्वाइंट में उनकी ये पहली कहानी प्रकाशित हो रही है। उम्मीद है वो और बेहतर लिखेंगे। ‘पापा..पाप..’ राहुल गुस्से में चिल्लाते हुए पापा केे कमरे में आया, ‘नेट क्यों नहीं चल रहा है पाप? मैंने आप से कहा था कि आप ठीक करवा...

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अर्जित पांडेय की कविता ‘पुरुष तू देवता क्यों नहीं?’

अर्जित पाण्डेयअर्जित आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग  के छात्र हैं। अच्छा लिखते हैं। पुरुष और महिला को लेकर जिस सोच के साथ हम केवल दिखावे के लिए जीते हैं, उसमें उनकी ये कविता कई लोगों को अजीब लग सकती है लेकिन अर्जित जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, उसकी भी...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की कविता ‘इस कठिन समय में’

परितोष कुमार ‘पीयूष’ (s/o स्व० डॉ० उमेश चन्द्र चौरसिया(अधिवक्ता) मुहल्ला- मुंगरौड़ा     पोस्ट- जमालपुर(बिहार)पिन- 811214   इस कठिन समय में इस कठिन समय मेंजब यहाँ समाज के शब्दकोश सेविश्वास, रिश्ते, संवेदनाएँऔर प्रेम नाम के तमाम शब्दों कोमिटा दिये जाने की मुहिम जोरों पर है तुम्हारे प्रतिमैं बड़े संदेह की स्थिति में हूँकि आखिर...

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डाॅ. मृणालिका ओझा की कहानी ‘पिता, जाने के बाद’

  उस वक्त भैया गए थे, पिता जी के साथ, उनके अंतिम प्रवास पर। नाव पर नाविक भी था और जीजा जी भी। आज बीच संगम, नदियों के मंझधार, वे पिताजी को पूरी तरह छोड़ आएंगे। अब वे पिताजी की अत्यधिक पानी खर्चने की आदत से परेशान नहीं होंगे। बीच...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

टूटे मकाँ में रहता तो गुलदान बुरा है ग़ुरबत में मुहब्बत का भी अंजाम बुरा है भूखा था वो मासूम जिसे चोर कहा तुमने खुद का तेरा भी झांक गिरेबान बुरा है था आसरा मुझको भी बहुत अच्छे दिनों का अच्छा भी सियासत में तो पैगाम बुरा है कोशिश न...