Monthly Archive: June 2017

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माया मृग की पांच कविताएं

मुझे तुम्‍हारे हाथ देखने हैं तुमने लौ को छुआ वह माणिक बन गई बेशुमार मनके तुम्‍हारी मुट्ठी में सिमटते चले गए मुझे बहुत देर बाद पता चला कि दरअसल लौ से तुम्‍हारे हाथ जल गए थे तुमने जले पोर मुझसे छिपाने को मुट्ठियां बन्‍द कर ली थीं …. ! उस...

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जगजीत गिल की तीन कविताएं

जगजीत गिल उप संपादक पंजाबी त्रैमासिक साहित्यक पत्रिका ’अक्खर’, काव्य संग्रह ’मील पत्थरां बिन शहर’ और ’रेत के घर’ प्रकाशित। कहानी संग्रह ’हदबस्त नंबर 211’ प्रकाशन हेतु। 095920-91048 याद याद अकेले, कभी आती नहीं, गाल सुर्ख़, तो आंखें नम भी हैं। बसती रुह अगर, चेहरे में किसी के, रुकी सीने...

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डॉ० छेदी साह की कविता ‘मुस्कान’

मुर्दे में भी डाल देगी जान उषा की प्रथम किरणों सा तुम्हारी लम्बी बाहें संगमरमरी देह बालों पर छाई सावन की घटा हिरणी सी आँखें देखती हो जब तुम और होती आँखें चार तब तुम्हारी मीठी मुस्कान मुझे लगती है बड़ी ही कान्तिमान,     राजेश”ललित”शर्मा की दो रचनाएं राजेश”ललित”शर्मा की...

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नकुल गौतम की ग़ज़ल

ग़ज़ल झड़ी जब लग रही हो आँसुओं की कमी महसूस क्या हो बदलियों की हवेली थी यहीं कुछ साल पहले जुड़ी छत कह रही है इन घरों की वो मुझ पर मेहरबां है आज क्यों महक-सी आ रही है साज़िशों की मुझे पहले मुहब्बत हो चुकी है मुझे आदत है...

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मुकेश बोहरा अमन की कविता ‘शब्द-साधना’

शब्दों को जानो, शब्दों को मानो , शब्दों की बातें होती निराली । शब्दों का व्यापार, शब्दों का व्यवहार , शब्दों से है होली, दीवाली ।। शब्दों से तुम हो , शब्दों से मैं हूँ । शब्दों से हारा , शब्दों से जय हूँ ।। शब्द है करेला व अम्बुआ...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एक तल्खियां खून की विरासत है छोड़ ना यार ये सियासत है मुफ़लिसी जा रही है महफ़िल में मुफ़लिसी को कफ़न की दावत है हुस्न तेरा मिटा के दम लूंगा सांस तुझसे मेरी बगावत है वाकया ये समझ नहीं आता रात को दिन से क्यों शिकायत है भागता क्यों है...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

  सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ? — बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है । — इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।...

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विशाल मिश्रा की कविता ‘आज भी’

गुलाबी सूती कपड़े पर हरे धागे से कढ़े फूल आज भी ख़ुशबू देते हैं। बेतरतीब बालों को सलीका सिखाने की ख़ातिर वो चार चिमटियां आज भी उनको दाबे हैं। चमकता नग नाक पर उस चेहरे की नूर बढ़ाने में सबसे आगे है। गोरी पतली दूसरी वाली उंगली में सोने का...

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नीरू मोहन की कविता ‘ईश्वर की कृपा जीवलोक तक’

जापानी काव्य शैली ताँका संरचना- 5+7+5+7+7= 31 वर्णदो कवियों के सहयोग से काव्य सृजन पहला कवि-5+7+5 = 17 भाग की रचना , दूसरा कवि 7+7 की पूर्ति के साथ श्रृंखला को पूरी करता |पूर्ववर्ती 7+7 को आधार बनाकर अगली श्रृंखला 5+7+5 यह क्रम चलता रहता है इसके आधार पर अगली...

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कमलेश भारतीय की दो कविताएं

एक जादूगर नहीं थे पिता पर किसी जादूगर से कम भी नहीं थे सुबह घर से निकलते समय हम जो जो फरमाइशें करते शाम को आते ही अपने थैले से सबको मनपसंद चीजें हंस हंस कर सौंपते जैसे किसी जादूगर का थैला हो अब पिता बन जाने पर समझ में...

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मनीषा जोबन देसाई की कहानी ‘अब क्या कहे ?’

“जितवन …..क्या कर रहे हो बाहर ? देखो ये कौन आया है ?” माँ की आवाज़ सुनकर अपने स्कूटर की लाइट ठीक कर रहा जित जल्दी से घर के अंदर आया । “ओह ,कब आये आप बिजल भैया ?” “बस अभी अभी… मेरी मुंबई की पढाई ख़त्म हुई और वापस...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्रा w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल...

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मनीषा जोबन देसाई की कविता ‘काफी नहीं?’

बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मे , आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजो ले !   पर .. ये जो समय है, वो दूर से चमक कर टूटते हुए तारे की तरह बिखर बिखर जाता है, और ..आंसुओ की...

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राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘पुल’

कहाँ आसान है पुल होना दो पाटों को पाटना टूटने का ख़तरा है हरदम लरजता है जैसे ही कोई गुज़रता है जाता है कोई इस ओर से उस ओर पुल होना बहुत कठिन है दरक जाये ईंट ढह जाता है सारा पानी भी बहता अपनी लय से कभी तेज़ कभी...

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पीयूष शिवम की ग़ज़ल ‘अम्मा’

रो रहा था मैं करूँगा क्या अंधेरा हो गया, ज्यों छिपाया माँ ने आँचल में सवेरा हो गया।   मिल्कियत सारे जहाँ की छान ली कुछ न मिला, गोद में जाकर गिरे माँ की, बसेरा हो गया।   इस फ़रेब-ओ-झूठ  की दुनिया की नज़र न लगे, माँ की बाँहों में...

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आरती कुमारी की दो कविताएं

आरती कुमारी जन्म तिथि:  25 मार्च, 1977 पता:  द्वारा – श्री ए. एन. पी. सिन्हा,  शशि भवन, आजाद काॅलोनी, रोड- 3,  माड़ीपुर, मुजफ्रपफरपुर- 842001,’ शिक्षा: एम.ए. अंग्रेजीद, एम.एड, पीएच-डी. व्यवसाय: सहायक शिक्षिका के रूप में राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा, मुजफ्रपफरपुर में  पदस्थापित। प्रकाशन : कैसे कह दूँ सब ठीक...

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शशांक सफ़ीर की कविता याद

याद आए कभी जो मेरी आपको देखकर आईना मुस्कुरा दीजिए अक्स मेरा तेरी आँख में यदि दिखे सनम पलकों का मोती बना लीजिए दिल की दुनिया अमावस सी बदरंग हो जब स्वयं की स्वयं से प्रबल जंग हो राह तन्हा हो या फिर कोई रंज हो दूर मंजिल लगे न...

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भास्कर चौधुरी की दस कविताएं

भास्कर चौधुरी जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्टा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि...

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समीर कुमार ठाकुर की कहानी “लव यू डैड”

समीर कुमार ठाकुर समीर नवोदित कथाकार हैं। लिटरेचर प्वाइंट में उनकी ये पहली कहानी प्रकाशित हो रही है। उम्मीद है वो और बेहतर लिखेंगे। ‘पापा..पाप..’ राहुल गुस्से में चिल्लाते हुए पापा केे कमरे में आया, ‘नेट क्यों नहीं चल रहा है पाप? मैंने आप से कहा था कि आप ठीक...