डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित की लघुकथा ‘बहुरिया’

रामानुज के घर में मातम का माहौल था, घर में छाती पीटने और रोने की जोर-जोर से आवाजें आ रही थी। रिश्‍तेदार और पड़ोसी ढांढस बंधा रहे थे, तो कुछ ऐसे भी थे जो मजमा देख रहे थे। रामानुज अपने बच्‍चों को सीने से लगाए दीवार के कोने में बैठा...