Monthly Archive: September 2017

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भावना सिन्हा की तीन कविताएं

  डॉ भावना सिन्हा जन्म तिथि -19 जुलाई शिक्षा – पीएचडी (अर्थशास्त्र ) निवास – गया ,बिहार ईमेल — sbhawana190@ gmail.com प्रकाशित कृतियां– यथावत, अंतिम जन, पुस्तक संस्कृति आदि कुछ पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित । 1. पांच बज गए पांच बज गएअभी तक नहीं आए पापा पापा  अब तक क्यों नहीं आएकहीं...

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आनन्द विश्वास के चार गीत

  आनन्द विश्वास जन्म तारीखः– 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *मिटने वाली रात नहीं* (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4.*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)...

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भगवान हो सकता है कलेक्टर

  जयप्रकाश मानस www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी : किस्त 6 25 अगस्त, 2015 एक कली दो पत्तियाँ फाइल में उलझे-उलझे बरबस याद आ गये महान संगीतकार भूपेन दा और उनका यह सुमधुर गीत – मन है कि भीतर-ही-भीतर...

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लौट आओ गौरैया

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 5 दिल्ली में बरसों से नन्हीं सुकोमल गौरैया नहीं दिख रही। किसी को मालूम भी नहीं कि वह कहां गुम हो गई। एक दिन दफ्तर के सबसे युवा साथी धीरेंद्र ने बताया कि उसके करावल नगर इलाके में गौरैया दिखने लगी है।...

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पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं

  पल्लवी मिश्रा असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला, देहरादून एक पन्नों पर कलम दर्ज़ करती है, दिनों की बर्खास्तगी रातों के बदलते मायने, पन्नों की तारीखें बयाँ करती हैं – दिनों के दस्तावेज़ो में कमतर होती रोशनी और महसूस होती है कलम की मायूसी l पन्नों पर बने फूल,चिड़ियाँ,तारे...

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अंशू सिंह की कविता ‘अंतहीन भूख’

                  अंशू सिंह जन्म 30 अक्टूबर 1987 वाराणसी   काशी हिन्दू वि वि  से स्नातक एवं   स्नातकोत्तर मिट न सकी अंतहीन भूखअभ्यंतर से मेरे अभ्यंतर से बार बार पुनःजन्म हुआचाहिये मुझकोभरपाईतृप्त भरपाई संकीर्ण से अनंततक की प्यास पुनः बुझानी है कालविजयी दशाओं मेंअक्सर भूखा थाउस रोज़ और प्यासा था जब फूटती थीएक...

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परमानन्द रमन की चार कविताएं

परमानन्द रमन जन्मतिथि : 20/12/1983 जन्म-स्थान : जमशेदपुर(तात्कालीन बिहार, वर्तमान झारखण्ड) ग्राम: करहसी, जिला- रोहतास (बिहार) आरंभिक शिक्षा बारहवीं तक जमशेदपुर में ही, तत्पश्चात कला शिक्षा में स्नातक के लिये इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग में दाखिला। स्नातकोत्तर की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  के...

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মৌসুমি ভৌমিকের গল্প ‘আমার দুর্গা !’

মৌসুমি ভৌমিক “উফফফ…।এতো টুকু তেল পড়ে আছে? এতে কি আর রান্না হবে? আজকে কাজে বেরোতে আবার দেরী হয়ে যাবে…মাআআ…আমি দোকান বেরোচ্ছি…।“………মধুজার সকাল প্রায়ই শুরু হয় এইভাবে। নুন আনতে পান্তা ফুরনো হয়তো তাদের সংসার নয়। কিন্তু স্বভাব তাদের গুছানো নয়। দাদাটা সকাল থেকেই বিড়ি মুখে দু কাপ চা ধ্বংস করে রাজা...

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सारिका भूषण की दो लघुकथाएं

सारिका भूषण शिक्षा – विज्ञान स्नातक प्रकाशित काव्यसंग्रह —-  ” माँ और अन्य कविताएं ” 2015                            ” नवरस नवरंग ”  साझा काव्य संग्रह 2013  “कविता अनवरत ” (अयन प्रकाशन ) 2017 एवं  ” लघुकथा अनवरत ” ( अयन...

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সৃজনী মুখার্জীর অনুগল্প ‘সব চরিত্র কাল্পনিক’

সৃজনী মুখার্জী সিগন্যালটা লাল হতেই মানুষের দঙ্গল টার সাথে একজন বৃদ্ধাও রাস্তা পার হচ্ছেন বয়সের ভারে ঈষৎ ন্যুব্জ ; দেখতে পাচ্ছেন ? আপনার অন্যতম প্রিয় কবিতার সত্বা চিনতে পারছেন ওঁকে ? পাখির নীড়ের মতো চোখে হাই পাওয়ারের চশমা ; তাও বহুদিন পরীক্ষা করানো হয় নি , অভাবের সংসারে আবার উপরি...

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मां जियेगी तो हम जियेंगे

संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 4 गंगा-यमुना को लेकर जिस दिन उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया, तब से इन दोनों नदियों को लेकर मैं बेहद भावुक हो गया हूं। यों भी हम सभी भारतीय दिल से भावुक और कल्पनाशील होते हैं। कोई एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री...

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বর্নালী চন্দর গল্প ‘নতুন অধ‍্যায়’

            বর্নালী চন্দ ঘুম থেকে উঠে রাতুল দেখল বেশ বেলা হয়ে গিয়েছে। ঘড়ির দিকে চোখ পড়তেই লাফিয়ে উঠল, বাপ্ রে আটটা বেজে গিয়েছে। সকাল ছটার অ্যালার্ম দিয়েছিল মোবাইলে, কখন যে বেজে বেজে বন্ধ হয়ে গিয়েছে, বুঝতেই পারে নি। আসলে মায়ের ডাক শুনে উঠতে অভ‍্যস্ত ও,...

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शहर काइयांपन सिखाता है

जयप्रकाश मानस www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी किस्त : 5 28 नवंबर, 2011 तदर्थ उपाय मलेशिया ने टैक्सी चालकों द्वारा महिलों के साथ बलात्कार और डकैती की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए महिलाओं के लिए महिला चालकों द्वारा...

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उजाले की संभावना तलाशती कहानियां

  किताब कहानी संग्रह : बबूगोशे लेखक : स्वदेश दीपक प्रकाशक :   जगरनॉट बुक्स मूल्य : 250 रुपए सत्येेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव इस साल 7 जून को कथाकार स्वदेश दीपक की गुमशुदगी के ग्यारह साल पूरे हो गए। इन ग्यारह सालों  में उन्हें चाहने वाले ठीक वैसे ही बेचैन रहे, जैसी...

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दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

दीप्ति शर्मा दिल्ली काले तिल वाली लड़की कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लडकियो! ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल आनाज नहीं होता ये पूरी दुनिया होता है जिससे मिलो सँभल कर मिलो ये मिलना...

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सुषमा सिन्हा की कहानी ‘रिश्ता’

सुषमा सिन्हा शिक्षा : बीए ऑनर्स (अर्थशास्त्र), फाइल आर्ट में डिप्लोमा छात्र जीवन से ही चित्रकला और लेखन में रुचि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कई बार रचनाओं का पाठ। चित्रकला के लिए कई बार पुरस्कृत। कृतियां :  मिट्टी का घर (कविता संग्रह), बहुत दिनों के...

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डॉ निधि अग्रवाल की तीन कविताएं

डॉ निधि  अग्रवाल मूल निवासी    गाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश डॉक्टर (पैथोलोजिस्ट) झाँसी उत्तर प्रदेश तीन तलाक केवल तुम्हें ही नहीं है.. तलाक का हक, मैंने भी दिया है तलाक… उन अवांछित-सी कामनाओं को, जो मुझे मेरे अस्तित्व का हर पल अहसास कराती हैं, जब मैं झुक जाती हूँ तुम्हारे निर्णयों...

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अर्जित पांडेय की लघुकथा ‘लाल लिपस्टिक’

अर्जित पांडेयछात्र, एम टेकआईआईटी, दिल्लीमोबाइल–7408918861 मैंने देखा उसे ,वो शीशे में खुद को निहार रहा था ,होठों पर लिपस्टिक धीरे धीरे लगाकर काफी खुश दिख रहा था मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो । बेहया एक लड़का होकर लडकियों जैसी हरकतें! हां,  इसके आलावा मैं और क्या सोच सकता...

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नींद क्यों रात भर नहीं आती

संजय स्वतंत्र बिहार की उस मिट्टी से जन्म का नाता है, जो अभावों और सपनों के संघर्ष के साथ एक इंसान बनने की तमीज पैदा करती है। जब हिंदी पट्टी विचार और बाजार से जूझ रहा था, तब पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता...