Monthly Archive: October 2017

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पल्लवी मुखर्जी की चार कविताएं

  पल्लवी मुखर्जी जन्म- 26 नवंबर, 1967 रामानुजगंज,सरगुजा,छत्तीसगढ़शिक्षा- बी.एएकइस पूरे प्रकरण मेंवे दोनों साक्षी थेपर हर बार तुमजलील होती रहीऔर वोतमाम बेगुनाही का सबूत देकरबच निकलता थाहर बार वो तय मुताबिक उसके अस्तित्व को तार-तार कर देता थावो मूक स्तब्ध होकरदेख रही थी उन आँखों कोजिसने उसे एक नज़र दी थीदुनिया...

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खुद को बदलो, देश को बदलो

  संजय स्वतंत्र किस्त : 10 आज घर की दिनचर्या पूरी करने के बाद जब दफ्तर के लिए चला तो देखा कि बाहर पिताजी गमछा-बनियान में ही खड़े हैं और ठेले वाले से सब्जियां खरीद रहे हैं। एक रिटायर आला अफसर को यों इस अंदाज में देख मैं संकोच में...

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बुढ़ापे में पत्नी और पैसा ही काम आते हैं

  जयप्रकाश मानस किस्त : 11 8 सितम्बर, 2015 कौन हिंदुस्तानी, कौन पाकिस्तानी 1965 के युद्ध के बाद रेडियो पाकिस्तान से फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़लें बजनी बंद हो गईं थीं, पता चला कि अब किसी भी हिंदुस्तानी शायर का कलाम नहीं बजेगा। किसी ने रेडियो पाकिस्तान, कराची की दीवार पर...

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रमेश शर्मा की पांच कविताएं

  रमेश शर्मा जन्म: 06.6.1966, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में . शिक्षा: एम.एस.सी. (गणित) , बी.एड. सम्प्रति: व्याख्याता सृजन: एक कहानी संग्रह मुक्ति 2013 में बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित . छह खंड में प्रकाशित कथा मध्यप्रदेश के छठवें खंड में कहानी सम्मिलित . *कहानियां: समकालीन भारतीय साहित्य , परिकथा, हंस ,पाठ...

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नीलाम्बर द्वारा ‘लिटरेरिया’ साहित्योत्सव का आयोजन

आनन्द  गुप्ता कोलकाता की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था नीलाम्बर द्वारा 12 से 15 अक्टूबर 2017 के बीच चार दिवसीय साहित्योत्सव ‘लिटरेरिया’ का शानदार आयोजन किया गया। गौरतलब है कि इस संस्था ने इस उत्सव के लिए किसी भी प्रकार का सरकारी या कॉरपोरेटी मदद नहीं लिया है। प्रथम दिन 12...

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’ 0

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’

कितनी छोटी सी ख्वाहिश थी उसकी वह दुनियाभर के उन बच्चों के लिए सचमुच रोटी बन जाना चाहता था जो उस वक्त उसे रोटी समझ बैठे थे जब वो भूख से बिलबिला रहे थे सुनिए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’ उन्हीं का आवाज़ में नूर मुहम्मद नूर...

नूर मुहम्मद नूर की कविता ‘बच्चे अभी पढ़ रहे हैं’ 0

नूर मुहम्मद नूर की कविता ‘बच्चे अभी पढ़ रहे हैं’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

  शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’ पांच कविता-संग्रह प्रकाशित। सभी संग्रह चर्चित। आलोचना की पहली किताब ‘कवि का...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘कलिंग कहां-कहां है?’

  निर्मल गुप्त बहुत दिन बीते कलिंग की कोई सुधबुध नहीं लेता चक्रवर्ती सम्राट को बिसराए हुए अरसा हुआ प्रजा लोकल गोयब्ल्स के इर्द गिर्द जुटती है उसे इतिहास की तह में उतरने से अधिक शब्द दर शब्द फरेब के व्याकरण में अपना त्रिदर्शी भविष्यकाल इस किनारे से साफ साफ...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

  भास्कर चौधुरी परिचय जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण,...

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हाफ गर्लफ्रेंड

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 9 राजीव चौक से वह मेरे साथ ही आखिरी डिब्बे में सवार हुई है। वह जिस तरह बार-बार अपने चेहरे को पोंछ रही है, उससे लगता है कि वह काफी दूर से और कई काम निपटा कर आई है। रूमाल से वह...

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प्यार की रगड़ वाला कवि नीलकमल

  शहंशाह आलम मेरे पास एक माचिस की डिबिया है माचिस की डिबिया में कविता नहीं है माचिस की डिबिया में तीलियाँ हैं माचिस की तीलियों में कविता नहीं है तीलियों की नोक पर है रत्ती भर बारूद रत्ती भर बारूद में भी कहीं नहीं है कविता आप तो जानते...

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महान होने का मतलब

  जयप्रकाश मानस किस्त -दस 3 सितम्बर, 2015 फूले कास सकल मही छाई रायपुर और नया रायपुर के बीच 30-35 किलोमीटर का फ़ासला है । दोनों तरफ़  हरे-भरे खेत, घास या फूलों की क्यारियाँ । आज मंत्रालय जाते वक्त एकाएक दिख पड़े कास के सफेद फूल । बरबस याद आ...

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अनिरुद्ध सिन्हा की छह ग़ज़लें

  अनिरुद्ध सिन्हा नाम –अनिरुद्ध सिन्हा जन्म -2 मई 1957 शिक्षा –स्नातकोत्तर प्रकाशित कृतियाँ ——————– -(1)नया साल (2)दहेज (कविता-संग्रह ) (3)और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह)  (4)तिनके भी डराते हैं  (5)तपिश  (6)तमाशा (7)तड़प  (8)तो ग़लत क्या है (ग़ज़ल-संग्रह) (9)हिन्दी-ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (10)हिन्दी-ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन(11)उद्भ्रांत की ग़ज़लों का सौंदर्यात्मक...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की दो कविताएं

  परितोष कुमार ‘पीयूष’ इस समय के हत्यारे! हत्यारे अब बुद्धिजीवी होते हैंहत्यारे अब शिक्षित होते हैंहत्यारे अब रक्षक होते हैं हत्यारे अब राजनेता होते हैंहत्यारे अब धर्म गुरु होते हैं हत्यारे अब समाज सेवक होते हैं० हत्यारे अब आधुनिक हो गये हैंहत्यारों ने बदल लिया है हत्या को अंजाम देने के अपने तक तरीकों...

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आचार्य बलवन्त का गीत ‘बेटी’

  आचार्य बलवन्त विभागाध्यक्ष हिंदी कमला कॉलेज ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीस 450, ओ.टी.सी.रोड,  कॉटनपेट,  बेंगलूर-560053 (कर्नाटक) मो. 91-9844558064 , 7337810240 Email- balwant.acharya @gmail.com बेटी चेहरे की मुस्कान है बेटी। घर आयी मेहमान है बेटी। क्षमा, प्रेम, करुणा की मूरत, ईश्वर का वरदान है बेटी। श्रद्धा  और विश्वास है बेटी। मन की पावन प्यास है बेटी। चहल-पहल है घर-आँगन की, खुद में ही कुछ खास है बेटी।...

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दिलीप कुमार की पांच लघुकथाएं

  दिलीप कुमार बलरामपुर जन्मभूमि मुंबई कर्मभूमि रचनाएं विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित संपर्क –9454819660 धूप की छांह पुरानी दिल्ली, सीलमपुर की मंडी। लोग बाग खचाखच, तर-ब-तर, रेलमपेल। सहाफी शीबा ने मुझे मछली मंडी की राह दिखायी। चिलचिलाती धूप, सकीनन अप्रैल, की थी मगर मौसम की बेदर्दी साफ नुमाया थी।...

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विद्वानों की परिभाषा

  जयप्रकाश मानस एक कवि की डायरी :  किस्त 9 30 अगस्त, 2015 विद्वता : कुछ उत्तर आधुनिक परिभाषाएँ महान और तुच्छ में जो कोई फ़र्क न बता सके, उसे ज्ञानपीठी विद्वान कहा जाये । जो राग-द्वेष के आधार पर निर्णय लिखे, उसे पहले-पहल विद्वान समझा जाये । जो इतिहास...

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राजनीति और सरोकार

  संजय स्वतंत्र द लास्च कोच : किस्त 8 आज दफ्तर जाने के लिए घर से निकला तो देखा कि चुनाव जीत चुके नेताजी होर्डिंग पर टंग गए हैं। अब वे तस्वीरों में ही नजर आाएंगे, उन सरमाएदारों के साथ जो चुनाव के दौरान उनके साथ लगे रहे। जमीन-जायदाद का...

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अनुपम निशान्त की चार कविताएं

  अनुपम निशान्त चुनार (मिर्जापुर) में जन्म। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पत्रकारिता में परास्नातक। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम। संप्रति अमर उजाला, वाराणसी में वरिष्ठ उप संपादक। 1- अपना शून्य गढ़ो कभी-कभी जिंदगी के लिए जरूरी खुशी करीब होकर भी गुम जाती है तलाशने लगो तो मिलती...