Monthly Archive: December 2017

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केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   94152951371.क्यों नसीबों की बात करते हैंजब ग़रीबों की बात करते हैं फिर कहेंगे हमें उठाने...

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नीरज द्विवेदी की तीन कविताएं

नीरज द्विवेदी  (१)  स्त्री विमर्श पर मेरे सारे तर्क,सारा ज्ञान,सारा पौरुष,चुक जाता हैशब्द टूटने लगते हैं..मै, निरूत्तरित.. आवाकतुम्हे देखने लगता हूँ…..जब तुम बड़ी सहजता से पूछ लेती हो,कि…”मै औरत हूँं,पर…. मै हूँ कौन ?? (२) इतिहास में तुम्हारे साथ सबसे बड़ा छल तब हुआ, जब समाज ने तुम्हे ‘देवी’ कहा… मैं, तुममें ढूढ़ता रहा..माँ, बहन प्रेयसी, पत्नी, सखा,और खुरचता...

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हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्तां हमारा

संजय स्वतंत्र आज आखिरी कोच में बैठे हुए सोच रहा हूं कि हर साल पितृपक्ष में लोग पितरों को याद करते हुए पिंडदान करते हैं। ठीक इसके बरक्स हमारे यहां हिंदी पखवाड़ा शुरू हो जाता है। यह कैसा संयोग है कि दोनों पखवाड़ों में हम अपने अतीत को याद करते...

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कहानी विचार का पानी भी है

जयप्रकाश मानस 23 अक्टूबर 2015 मेरे घर आईं 3 नन्हीं परी शीला, अम्बिका और अहल्या !किसी और से मिलूँ न मिलूँ, इन तीन निश्छल परियों से ज़रूर मिलता हूँ। जब कभी गाँव जाता हूँ, मोहल्ले की ये तीनों बच्चियाँ ज़रूर चली आती हैं मुझसे मिलने। ये नहीं आती तो खुद...

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अकेले हैं तो क्या ग़म है!

संजय स्वतंत्र उस दिन अस्पताल के इमरजंसी वार्ड में वे व्हीलचेयर पर दिखे। तबीयत बहुत खराब थी उनकी। शायद उन्हें नौकर लेकर वहां आया था। मैंने उससे पूछा, ‘कोई साथ नहीं आया?’ उसका जवाब था, ‘घर में बेटे-बहू हैं, लेकिन किसी को फुर्सत नहीं।’ उसकी बात सुन कर मैं सन्न...

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सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘इंडियन काफ़्का’

सुशान्त सुप्रिय A-5001 ,             गौड़ ग्रीन सिटी ,             वैभव खंड ,             इंदिरापुरम ,             ग़ाज़ियाबाद – 201014             ( उ. प्र. )...

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फेंटिए, फेंकिए और फंसाइए !

जयप्रकाश मानस 16 अक्टूबर, 2015 तलाश मैं रोज़ एक अपरिचित संसार से परिचय की तलाश में रहता हूँ,  जहाँ नये सूरज, चाँद, सितारे, आकाश, लोग-बाग, घर-आँगन, अपनी नई उदासी और नई जिजीविषा के साथ मुझसे बतियाने की फ़िराक़ में हों । तलाश एकतरफ़ा तो है नहीं ? तलाश नदी से...

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दूसरी भाषा में पाठक ज्यादा, हिन्दी में कवि

जयप्रकाश मानस 3 अक्टूबर, 2015 चला अब बिहू प्रदेश की ओर आज से आने वाले 10 दिन तक चाय और बिहू प्रदेश आसाम में । जोरहाट में साथहोंगे असम के नवलेखक और देश के कुछ लेखक मित्र । मानव संसाधन विकास मंत्रालय(केंद्रीय हिंदी निदेशालय) के इस नवलेखक शिविर में नवागतों...

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सूर्यनाथ सिंह की कहानी ‘रजामंदी’

सूर्यनाथ सिंह जन्म : 14 जुलाई 1966 स्थान : सवाना, गाजीपुर इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढाई कई कहानी संग्रह और उपन्यास प्रकाशित। नया उपन्यास ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ हाल ही में प्रकाशित। जनसत्ता  में वरिष्ठ पत्रकार ‘साहब, मेम साहब आई हैं।’ मुन्नन मियां...