Monthly Archive: January 2018

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दुनिया को रौशन करने वाली एक ‘चरित्रहीन’ लड़की

संजय स्वतंत्र इन्हें भी पढ़ें आज उससे मिलने जाते वक्त खुद का चरित्र आईने में निहार रहा हूं। कितना आसान होता है न, किसी को चरित्रहीन कहना। खास तौर से जब वह खुले विचारों की हो और करिअर बनाने के लिए शादी करने से लगातार इनकार कर रही हो। आधुनिक...

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महाप्राण की ‘निष्प्राण’ होतीं स्मृतियां

आशीष सिंह सारी  तस्वीरें : आशीष सिंह तस्वीरों में निराला का गांव मेरे भाई ! उनकी निगाह में “गढ़ाकोला ” इसलिये नहीं है क्योंकि उनकी निगाह में आम -अवाम है ही नहीं – “”- – महाकवि के गांव से वापस आकर एक कुछ देखी — कुछ सुनी रपट आपके लिए...

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आयरिश कहानी ‘पहली उड़ान’

सुशान्त सुप्रिय नाम : सुशांत सुप्रिय जन्म : 28 मार्च , 1968 शिक्षा : अमृतसर ( पंजाब ) , व दिल्ली में ।प्रकाशित कृतियाँ :—————–# हत्यारे ( 2010 ) , हे राम ( 2013 ) , दलदल ( 2015 ) , ग़ौरतलब कहानियाँ ( 2017 ) , पिता के नाम ( 2017 ) : पाँच कथा – संग्रह ।# इस रूट की सभी...

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हाथ में उजाला लेकर चलने वाला कवि

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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चरित्रहीन

संजय स्वतंत्र उस दिन नोएडा जाने वाली मेट्रो के आखिरी कोच में सवार हुआ, तो मुझे नहीं पता था कि स्त्रियों को चरित्रहीनता का प्रमाणपत्र देने वाले उस शख्स से मेरी मुठभेड़ हो जाएगी। मैं दरवाजे के पास कोने की सीट पर बैठा नोटपैड पर लिख रहा था। बगल में...

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दिल्ली में कब मरी यमुना? यमुना का हत्यारा कौन?

नीलय उपाध्याय   कब मरी यमुना ? किसने मारा दिल्ली में यमुना को पता करना आसान है। वज़ीराबाद वो जगह है जहाँ कुछ दिन पहले सूर्य तनया यमुना का दिल्ली मे प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इस जगह पर बना बैराज यमुना की धार को आगे बढ़ने से रोक देता...

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आदमी और राजा

जयप्रकाश मानस 6 नवंबर, 2015 बेटियों के साथ कुछ पल फ़ैशन इंस्टीट्यूट (काईट कॉलेज, रायपुर) में पढ़-सीख रही हमारी बेटियों द्वारा दीपावली पर बहुत सारी चीज़ों के डिजाइनों की प्रदर्शनी और सेल में घूमते हुए आज लगा : “बेटियों की क्रियाशीलता को पहचानना और उन्हें सही दिशा में प्रोत्साहित करना...

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बारीआम के आम में अब वो स्वाद कहां!

आरती तिवारी अपनी जन्मभूमि की मिट्टी की सौंधी गन्ध कभी विस्मृत हुई है भला! हर मौसम हर सुबह हर शाम डायरी का एक सफ़ा है,..ज़रा सी हवा सहलाती है और एक सरसराहट सी होती है,..और यादों का एक खरगोश सरपट दौड़ने लगता है उन साफ-सुथरी,शफ्फाक सड़कों पर जिसे पकड़ने मेरा...

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बंद कमरे से आतीं चीखें

संजय स्वतंत्र उस शहर में किराए के दो कमरे वाला हमारा घर था। तब छठी कक्षा का विद्यार्थीं था। बस होश संभाल ही रहा था मैं। मकान मालिक की बेटी सुनीता मेरी अच्छी दोस्त बन गई थी। वह आठवीं में पढ़ती थी। बात बरसों पुरानी है। उस समय गुड्डे-गुड़ियों का...

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भैरव प्रसाद गुप्त : व्यक्तित्व के कुछ पहलू

कर्ण सिंह चौहान साहित्य से समाज के मन को बदलने की बात भले ही कुछ लोगों को नागवार गुजरे लेकिन ऐसा तो शायद ही कोई लेखक हो जो अपने लिखे को इतना अर्थहीन मानता हो कि अपने पाठक पर किसी प्रतिक्रिया की आशा ही न करे । सामाजिक परिवर्तन में...

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दूधनाथ सिंह कभी मरते नहीं, दिलों में रहते हैं

मैं मरने के बाद भी याद करूँगा तुम्हें तो लो, अभी मरता हूँ झरता हूँ जीवन की डाल से निरन्तर हवा में तरता हूँ स्मृतिविहीन करता हूँ अपने को तुमसे हरता हूँ ।”   इन पंक्तियों के रचयिता मशहूर साहित्यकार और साठोत्तरी कहानी के नायक दूधनाथ सिंह नहीं रहे। 11...

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‘राजनीतिक रूप से अशिक्षित व्यक्ति सबसे निकृष्ट अशिक्षित’

साहित्यिकी या राजनीति पश्चिमी दुनिया की तर्ज़ पर हिन्दी की कुछ गिनी चुनी पत्र-पत्रिकाएँ भी हर साल कथित श्रेष्ठता के अनुमापन के लिए अपने-अपने हिसाब से पुस्तक-पाठक सर्वेक्षण कराती रही हैं। ताज्जुब नहीं कि हर आयोजकों द्वारा घोषित संबंधित विधाओं की वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कृतियों की सूची एक-सी नहीं होती...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

भास्कर चौधुरी 1 मनुष्य तुम्हारे चेहरे में जो उदासी का रंग है ऐसा बहुत कम होता है उन्हें जब मैं पढ़ पाता हूँ हाँ जो रंग खुशियों के संग हैं जो रंग ताज़ा हैं जो अभी फीके नहीं पड़े हैं अक़्सर मैं उन्हें ताड़ लेता हूँ .. ऐसा कब होगा...

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डी एम मिश्र की 5 ग़ज़लें

1. दूर से बातें करो अब वो विधायक है कम मुलाकातें करो अब वो विधायक है। खुद अँधेरे में रहो उसके लिए लेकिन चॉदनी रातें करो अब वो विधायक है। नोट की माला पिन्हाओ, थैलियाँ लाओ धन की बरसातें करो अब वो विधायक है। जन्मदिन उसका मनाओ खुद रहो भूखे...

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ज्योति साह की तीन कविताएं

ज्योति साह हिन्दी प्राध्यापिका रानीगंज, अररिया बिहार शहर के बीचों-बीचपहलेशहर में मैं थी,अब शहर मुझमें है, उनकी तमाम परेशानियों को समेटेसींझती/पकतीऔर उबलती हूँ, अभी उम्मीद के हर दरख्त बंद है शायद….., चलो फिरनिकलो घरों सेढूंढ लायें एक कतरा उम्मीद दरख्तों से अंगोछे में भर,डाल देंशहर के बीचों-बीचहर कोई नहाये/डूबे और इतराये, फिरखिलखिलाये बचपनमुस्कुराये बुढ़ापाऔर होश में हो ज़वानी।। कठपुतली बना के कठपुतली नचाते रहोरखो...

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देह में स्त्री या पुरुष होता ही है

जयप्रकाश मानस 29 अक्टूबर, 2015 मिस्र में टैगोर अहमद स्वाकी मिस्र के जाने-माने कवि थे । नाटककार भी । उन्हें आधुनिक मिस्र साहित्य का पायोनियर माना जाता है । उनका जन्म 16 अक्टूबर, 1868 में हुआ । 14 अक्टूबर 1932 तक उन्होंने अपने जीवन काल में कई नाटकों और कविताओं...

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हताश लोगों के साथ खड़ा कवि विमलेश त्रिपाठी

शहंशाह आलम कवि परिचय विमलेश त्रिपाठी परिचय : विमलेश त्रिपाठी बक्सर, बिहार के एक गाँव हरनाथपुर में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही। प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातकोत्तर, बीएड। कलकत्ता विश्वविद्यालय से केदारनाथ सिंह की कविताओं पर पी-एच.डी। देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, समीक्षा, लेख आदि का प्रकाशन।...

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शिवराम के की तीन कविताएं

शिवराम के ग्राम-कुसौली, पो-  नथईपुर, जिला –  भदोही, उत्तर प्रदेश, 221304 शिक्षा- एम.ए- अंग्रेजी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (BHU) मोबाइल – +918826222604 ब्लॉग-   shivramkblog. wordpress.com प्रकाशित पुस्तक- Lamp Post And Other Poetry collection (अंग्रेजी में) विश्वविद्यालयी काव्य-प्रतियोगिता में पुरस्कृत व प्रकाशित । कुछ यादें कुछ यादें महफूज रहती हैं सांसों के साथ...