Monthly Archive: February 2018

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आम आदमी का संत्रास बयां करने वाले कवि विनय सौरभ

शहंशाह आलम इस हफ्ते के कवि:  विनय सौरभ एक गोरखा गुज़रा है सीटी बजाता हुआ संदर्भ : विनय सौरभ की कविताएँ शहंशाह आलम संथाल परगना का यह छोटा-सा गाँव : नोनीहाट जो असल में अब गाँव भी नहीं रहा क़स्बा कह सकते हो लेकिन इसकी पहचान पर अब शहर के...

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मगर वह छूती है आसमान

संजय स्वतंत्र वह टीवी पत्रकार है। बेहद खूबसूरत। दिलकश आवाज। समाचार पढ़ने का अंदाज मुझे ही क्या, सभी को मुग्ध कर देता है। लेकिन अब वह टीवी चैनल छोड़ कर ऑनलाइन मीडिया में नौकरी ढूंढ़ रही है। मेरी उससे मुलाकात बस इत्तेफाक से हुई। नौकरी के सिलसिले में उससे तीन-चार...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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पंखुरी सिन्हा की 4 कविताएं

पंखुरी सिन्हा शिक्षा —एम ए, इतिहास, सनी बफैलो, 2008 पी जी डिप्लोमा, पत्रकारिता, S.I.J.C. पुणे, 1998 बी ए, ऑनर्स, इतिहास, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 1996 अध्यवसाय—-BITV, और ‘The Pioneer’ में इंटर्नशिप, 1997-98 —- FTII में समाचार वाचन की ट्रेनिंग, 1997-98 —– राष्ट्रीय सहारा टीवी में पत्रकारिता, 1998—2000   प्रकाशन———हंस, वागर्थ,...

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क्या कोई भी रचनाकार दुष्ट नहीं?

जयप्रकाश मानस 13, नवंबर, 2015 हिंदी की शुष्कता या उर्दू की रवानी ? गोपेश्वर सिंह जी हिंदी के ऐसे जाने-माने प्रोफ़ेसर-लेखक-आलोचक हैं, जिनकी बातें गंभीरता से सुनी जाती रही हैं । कई बाबा नागार्जुन से लेकर अब की पीढ़ी और उनकी दुनिया की रंगत को क़रीब से देखते-परखते रहे हैं...

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विहाग वैभव की 5 कविताएं

विहाग वैभव शोध छात्र – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) नया ज्ञानोदय , वागर्थ , आजकल , अदहन, सहित विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ प्रकाशित । मोबाइल – 8858356891  1. हत्या-पुरस्कार के लिए प्रेस-विज्ञप्ति वे कि जिनकी आँखों में घृणा समुद्र सी फैली है अनंत नीली-काली जिनके हृदय...

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केशव शरण की 6 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   9415295137 न संगीत, न फूल उसका हंसना याद आ रहा है संगीत का बिखरना...

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औजार की तरह भाषा का इस्तेमाल करते उमाशंकर सिंह परमार

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान,...

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आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा आंखों का दरिया छुपाने के लिये मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।। बात दिल की अब समझता है कौन जायें किसको गम दिखाने के लिये ।। हां हमे मजबूत होना ही पड़ा राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।। सर झुकाना मंजूर कर “आरती ” फ़ासले दिल...

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तुम्हारे मौन का गट्ठर लिए घूम रहा

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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अखबार से इश्क की आधी सदी

संजय स्वतंत्र ‘क्या आप एक ऐसी सुबह की कल्पना करेंगे, जिसमें अखबार नाम की कोई चीज न हो? मेरा इरादा आपको डराने या दुखी करने का नहीं, लेकिन अमेरिका में जिस तरह अखबारों का सर्कुलेशन गिर रहा है और नई पीढ़ी जिस तरह इंटरनेट जैसे सूचना और संवाद के नए...

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धर्म अंहकार का विसर्जन, विजय अंहकार का विस्तार

जयप्रकाश मानस डायरी के ये पन्ने भी पढ़ें 10 नवंबर, 2015 पढ़ता था तो पानी के बर्तन लेकर (बिज्जी जी की पुण्यतिथि पर ) “खोजे खोजे खोजेगा तो तीन लोक को पायेगा, पाए पाए पायेगा तो कित्ता गडेरा खाएगा। विजयदान देथा जी कहते थे –“बचपन में जब शरतचंद्र को पढ़ता...

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सुभाष पाठक ‘जिया’ की 5 ग़ज़लें

सुभाष पाठक ‘जिया’ जन्मतिथि- 15 सितम्बर 1990 शिक्षा-  बी एस सी,बी एड, प्रकाशन :  कविताकोश, रेख़्ता, पर प्रकाशन, कादम्बिनी, ग़ज़ल के बहाने, दो दर्जन से अधिक ,देश की तमाम साहितियिक पत्रिकाओं ग़ज़ल विशेषांकों में ग़ज़लें प्रकाशित, आकाशवाणी शिवपुरी से समय समय पर काव्य पाठ, अखिल भारतीय मुशायरों कवि सम्मेलनों में...