सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘मिसफिट’

सुशान्त सुप्रिय मार्फ़त श्री एच. बी. सिन्हा , 5174, श्यामलाल बिल्डिंग , बसंत रोड, ( निकट पहाड़गंज ) , नई दिल्ली – 110055 मो:  8512070086 ई-मेल: sushant1968@ gmail.com उसका सिर तेज़ दर्द से फटा जा रहा था । उसने पटरी से कान लगा कर रेलगाड़ी की आवाज़ सुननी चाही । कहीं कुछ नहीं था । उसने जब-जब जो जो चाहा, उसे नहीं  मिला । फिर आज  उसकी  इच्छा   कैसे  पूरी हो सकती थी । पटरी  पर लेटे-लेटे उसने कलाई-घड़ी

সবুজ নীলের দেশে, সাদা কালোর দেশে

বেড়াতে যেতে চান অথচ অনেকদিন ঘোরা হয়নি?  পিউ দাশের ট্রাভেলগ সবুজ নীলের দেশে, সাদা কালোর দেশে । প্রতি রবিবার ও

मौजूदा राजनीति पर व्यंग्यात्मक उपन्यास ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’

किंडल ई बुक : प्रजातंत्र के पकौड़े व्यंग्यात्मक उपन्यास लेखक :  राकेश कायस्थ मूल्य :  49 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

नवीन गोपाल कानगो की 5 ग़ज़लें

प्रोफेसर नवीन गोपाल कानगो प्राध्यापक एवं अध्यक्ष सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग समन्वयक, परिष्कृत उपकरण केंद्र डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर

सुशान्त सुप्रिय की 5 कविताएं

सुशान्त सुप्रिय A-5001, गौड़ ग्रीन सिटी, वैभव खंड, इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ.प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com बचपन  दशकों पहले एक बचपन था बचपन उल्लसित, किलकता हुआ सूरज, चाँद और सितारों के नीचे एक मासूम उपस्थिति बचपन चिड़िया का पंख था बचपन आकाश में शान से उड़ती रंगीन पतंगें थीं बचपन माँ का दुलार था बचपन पिता की गोद का प्यार था समय के साथ