Monthly Archive: June 2018

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘गलती’

सुशांत सुप्रिय A-5001 , गौड़ ग्रीन सिटी , वैभव खंड , इंदिरापुरम् , ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ. प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail शुक्लाजी ने चश्मा लगाया , थैला उठाया , छड़ी ली और बाज़ार से दूध , सब्ज़ी और अन्य सामान लाने के लिए धीमी चाल...

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राजेंद्र राजन की 3 कविताएं

राजेंद्र राजन बुखार पर्व जो फेंक दिए गए थे इतिहास के कूड़ेदान में आज वे घूम रहे हैं दल के दल बजा रहे हैं धर्म का बाजा हर सड़क हर गली में इतने जोर से कि बहरे हो जाएं कान सुनाई न दे पड़ोस का चीखना अपनी ही आवाज़। उनकी...

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विजेंद्र की 6 कविताएं

विजेंद्र एक तुम्हें बाहर आना ही होगा कहां मिलेगा उस आदमी का उजला ब्यौरा जिसे काले पत्थरों में चुन दिया गया है उन्हें करीब से देखो समुद्र की तूफानी लहरों का गरजन तुम्हें सुनाई देगा श्रमिकों और किसानों का एकजुट संघर्ष लोकतंत्र की पहली जरूरत है दबे कुचले लोगों की...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की 5 कविताएं

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव राजा एक उसे वो पसंद हैं जो मुंह नहीं खोलते उसे वो पसंद हैं जो आंखें बंद रखते हैं उसे वो पसंद हैं जो सवाल नहीं करते उसे वो पसंद हैं जिनका खून नहीं खौलता उसे वो पसंद हैं जो अन्याय का प्रतिकार नहीं करते उसे मुर्दे...

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आरती आलोक वर्मा की 3 ग़ज़लें

आरती आलोक वर्मा एक लगाई  उन्होंने  ही  आग  घर में बसाये हुये थे जिन्हें हम नजर में   घरौंदे बिखरते नजर आ रहे हैं  नये दौर के इस अनूठे शहर मेंचमन में पसरने लगी आग हरसू शरारे दिये छोड़ किसने शज़र में ।जहाँ मुफलिसी बसर कर रही होवहाँ कौन जीता नहीं डर फिक्र में किसी...