Monthly Archive: July 2018

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रंजना जायसवाल की कहानी ‘कैसे लिखूं उजली कहानी’

रंजना जायसवाल जन्म  : ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पड़रौना जिले में | शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी | प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय साहित्य,वसुधा,वागर्थ,संवेद सहित राष्ट्रीय-स्तर की सभी पत्रिकाओं तथा जनसत्ता ,राष्ट्रीय सहारा,दैनिक जागरण,हिंदुस्तान इत्यादि पत्रों के राष्ट्रीय,साहित्यिक परिशिष्ठों...

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सबका शायर : शीघ्र प्रकाश्य ग़ज़ल संग्रह

हैं निगह में, पहाड़ के मंज़र और उस पर, उजाड़ के मंज़र ज़िंदगी सिल रही है, फट -फट के कैसे – कैसे, जुगाड़ के मंज़र नूर मुहम्मद नूर के ग़ज़ल संग्रह सबका शायर की प्री-बुकिंग जारी है। यह संग्रह अगस्त के आखिरी हफ्ते में प्रकाशित होगा। अगर आपने अभी तक...

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कसक : लघु उपन्यास

पहले प्यार में आदमी आमतौर पर नाकाम हो जाता है। और फिर यह पहला प्यार बहुत तकलीफ देता है। अनमित्र भी भूलने की कोशिश कर रहा था लेकिन अचानक पहला प्यार जिस रूप में उसके सामने आकर खड़ा हो गया, उसकी कल्पना भी उसने नहीं की थी। पढ़िए मुहब्बत में...

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वह जो कल्पना है : कविता संग्रह

#LiteraturepointEbooks प्रेम क्या है इस प्रेम की जगह कहाँ है जितना पूछता हूँ मैं ख़ुद से उतना डूबता हूँ मैं ख़ुद में जो भी यह सवाल करेगा, ऐसे ही डूबता जाएगा। प्रेम होता ही इतना अनन्त है। प्रेम के कई रंगों को अपने शब्दों में साकार किया है अर्पण कुमार...

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रोटियों के हादसे : कविता संग्रह

भूखा बच्चा रोटी समझ चांद को लपकना चाहता है लेकिन काट दिये जाते हैं उसके पंख वो फड़फड़ाता है छटपटाता है उसका पंख लेकर कोई और उड़ जाता है उसके हिस्से में ना तो रोटी है ना ही उड़ान उसके हिस्से में सिर्फ भूख है सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के कविता...

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संजीव ठाकुर की बाल-कथा ‘डरपोक’

संजीव ठाकुर सीतेश पूरे हॉस्टल में बदनाम था। उसकी बदनामी इस बात में थी कि वह न तो कभी ठीक से नहाता था, न ही ढंग से कपड़े पहनता था और न ही बिस्तर ठीक करता था। उसकी किताबें-कापियाँ वगैरह भी जैसे-तैसे ही रहती थीं। वह कभी भी समय पर...

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चांदनी सेठी कोचर की लघुकथा ‘कामवाली’

चादनी सेठी कोचर रेणु की काम वाली सुनीता उसके घर में पिछले 4 साल से काम कर रही थी। दोनों एक दूसरे को बखूबी समझते थे लेकिन आज सुनीता को काम पर आने में थोड़ी देर क्या हुई, रेणु उस पर चिल्लाने लगी। “क्या बाता है सुनीता, आज तुमने आने...

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अर्पण कुमार की 5 कविताएं

अर्पण कुमार दो काव्य संग्रह ‘नदी के पार नदी’ (2002), ‘मैं सड़क हूँ’ (2011) एवं एक उपन्यास ‘पच्चीस वर्ग गज़’ (2017) प्रकाशित एवं चर्चित। कविताएँ एवं कहानियाँ, आकाशावाणी के दिल्ली, जयपुर एवं बिलासपुर केंद्र से प्रसारित। दूरदर्शन के ‘जयपुर’ एवं ‘जगदलपुर’ केंद्रों से कविताओं का प्रसारण एवं कुछ परिचर्चाओं में...

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मुकुल आनन्द की कविता ‘तुम्हारी याद’

मुकुल आनन्द ग्राम+पो- पटसाजिला-     समस्तीपुर राज्य-     बिहारपिन-     848206″बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत” वर्तमान निवास स्थान-  दुर्गाकुंड, वाराणसी तुम्हारी याद  तुम याद आती हो जैसे आती है रात आता है दिन लगती है भूख लगती है प्यास.. जैसे बच्चों के चोटिल होने पर माँ को आता है...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ की 2 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म : 17 :08 :1952 गांव :महासन, डाक : महुअवां कारख़ाना, जनपद : कुशीनगर। पिछले 5 दशक से निरंतर लेखन। हिंदी की तमाम पत्र- पत्रिकाओं  में अनगिनत रचनाओं का प्रकाशन। अबतक चार किताबें प्रकाशित। एक लंबी कविताओं, एक कहानियो और दो ग़ज़लों की। भारतीय रेलवे में 36...

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प्रशान्त तिवारी की 7 कविताएं

प्रशान्त तिवारी जौनपुर निवासी (उत्तर प्रदेश)वर्तमान में नोएडा में निवास एक न्यूज़ ऐप में कार्यरत माएं भी जादूगर जैसी होती हैं 10 रुपए की कमाई में 12 रुपए का खर्च चला लेती हैं और उसी 10 रुपए में से 3 रुपए बचा भी लेती हैं उस वक्त के लिए जब हम...

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राजेश ‘ललित’ शर्मा की 4 कविताएं

राजेश’ललित’शर्मा बी-९/ए:डी डी ए फ्लैटस होली चाईल्ड के पीछे टैगोर गार्डन विस्तार नई दिल्ली -११००२७ ज़ख्म ज़ख़्मों पर मरहम नहीं नमक लगा बना रहे घाव उठती रहे टीस दर्द की आह निकले। याद रहे हमेशा किसने दिया था ? ये जख्म !! तन्हा कुछ देर इंतज़ार करो,ए दोस्त ज़िंदगी ज़रा...