Monthly Archive: October 2018

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मिथिलेश कुमार राय की 3 कविताएं

मिथिलेश कुमार राय 1. दिसंबर (कल दिसम्बर की बात छिड़ गई तो उसने कहा कि यादों में सब कैद हो जाता है यहाँ तक कि आवाजें भी हमेशा के लिए हवा में कैद होकर रह जाती हैं) मेरी जनवरी में थोड़ी सी सर्दी है गेंदे के कुछ फूल हैं लाल-लाल...

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पल्लवी मुखर्जी की 2 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी स्त्री स्त्री शब्द-शब्द उतारती है तुम्हेंअपने जीवन मेंभोर की लालिमा मेंलिपे चूल्हे परतुम्हारी चाय कीभीनी खुशबू सेफैलती है उसकी सुबहपूरा दिन और पूरी रात पढ़ती रहती है तुम्हें स्त्री बिना तुम बासी रोटी पर उगे फफूंद को भी उदरस्थ कर लेते हो  स्त्री तुम्हारे भीतर की सुगंध है…..। जो बासीपन हटा देती है       2.   पुरुष    ...

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देवेंद्र कुमार पाठक के 4 गीत

देवेंद्र कुमार पाठक म.प्र. के कटनी जिले के गांव भुड़सा में 27 अगस्त 1956 को एक किसान परिवार में जन्म. शिक्षा-M.A.B.T.C. हिंदी शिक्षक पद से 2017 में सेवानिवृत्त. नाट्य लेखन को छोड़ कमोबेश सभी विधाओं में लिखा ……’महरूम’ तखल्लुस से गज़लें भी कहते हैं 2 उपन्यास, ( विधर्मी,अदना सा आदमी...

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केशव शरण की 41 कविताएं : व्यथा, जो कविता में ढल गई

कविता एक आवेग है। एक ऐसा आवेग, जिसे कवि शब्दों से संभालने की कोशिश करता है। वह शब्द देता है, आवेग उसमें ढलता जाता है। इस तरह जन्म लेती है एक कविता। कवि अपने और अपने आसपास के लोगों के जीवन, सामाजिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। यही परिस्थितियां उसे...

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रमेश शर्मा की 5 कविताएं

रमेश शर्मा  92,  श्रीकुंज बीज निगम के सामने , बोईर दादर रायगढ़, छत्तीसगढ़ 496001 मोबाइल 9752685148 छोटी छोटी लड़कियां  क्या करेंगी ये छोटी छोटी  लड़कियां खिलौनों से खेलेंगी पुचकारेंगी सुनाएंगी कहानियां अपनी तोतली भाषा में उन्हें! फिर चुपचाप दुबक जाएंगी खिलौनों की तरह घर के किसी कोने में खिलौनों से...