Monthly Archive: October 2019

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी शब्द मरते नहीं मेंरे भीतर की आग का थोड़ा सा हिस्सा लेकर तुमने सुलगाई जीवन की लौ बाकि बचे हुए आग की आँच को हवा देती हूँ मैं उसकी लौ पर उबलते हैं शब्द शब्दों की भाषा को पढ़ते हो तुम शब्द मिट्टी में मिलने से पहले एक...

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जो पढ़ रहे हैं, वही कहानियों को बचा रहे हैं : शंकर

कहानी के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ कथाकार और परिकथा के संपादक शंकर से ख़ास बातचीत। बातचीत की है वरिष्ठ कथाकार हरियश राय और सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने सत्येंद्र : शंकर जी, आप वरिष्ठ कथाकार भी हैं और संपादक भी। तो शुरुआत इसी सवाल से करते हैं कि आखिर कहानी है...

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वरिष्ठ कथाकार रमेश उपाध्याय से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की बातचीत

हिन्दी साहित्य में एक आंदोलन की ज़रूरत रमेश उपाध्याय जन्म  : 1 मार्च 1942 शिक्षा : एमए, पीएचडी कार्य : एक दशक तक पत्रकार  रहने के बाद तीन दशकों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। साहित्य और संस्कृति की पत्रिका ‘कथन’ के साथ-साथ ‘आज के सवाल’ नामक पुस्तक श्रृंखला का संपादन।...