‘ऐनुल’ बरौलीवी की दो ग़ज़लें

एक

राहबर माहिर     हमें मिलता नहीं
क्यूँ इनायत     यार भी करता नहीं

नाम तेरा हो गया     बदनाम अब
आजकल तू   नेक़ियाँ करता नहीं

आज जो भी हौसला था मिट गया
क्या करें अब ज़ख़्म ये भरता नहीं

नफ़रतों की आँधियों से आज क्यूँ
आशियाना प्यार का बसता नहीं

मौत आएगी        उसे ये मालूम है
बंदगी में सर कभी     झुकता नहीं

संगदिल मेरे सनम हैं      आज भी
दुश्मनी वो पालते हैं ,   रिश्ता नहीं

बैठिए दो पल         यहाँ बातें करें
आपकी बातों से     जी भरता नहीं

हसरतें दिल की        नहीं पूरी हुई
फूल दिल में आज भी खिलता नहीं

प्यार का इक फूल खिलने दो सनम
रात दिन ये दिल जले    अच्छा नहीं

आज रिश्ते हैं टिके       विश्वास पर
आज ‘ऐनुल’ को गिला शिक़वा नहीं

दो

क़त्ल जिसने है किया पा जाएगा इनाम भी
आएगा हम पर हमारे क़त्ल का इल्ज़ाम भी

अब सियासत है, यहाँ रहना ज़रा सा देखकर
ज़ुर्म कोई और करता,  जेल जाता आम भी

प्यार करना अब मना है   देखना यारों यहाँ
दिल बहुत टूटे हुए हैं, मौत सुबहो शाम भी

मुश्क़िलों से ज़िन्दगी है आज घिरती जा रही
बोलियाँ ईमान की हों  रात दिन बदनाम भी

ज़िन्दगी कैसे कटे अब    प्यार वो करते नहीं
हाल मेरा जो किए वो         देखती आवाम भी

थक गए हैं पाँव मेरे             आज मैं कैसे चलूँ
ज़िन्दगी में चाहिए           देखो मुझे आराम भी

जब तलक है प्यार अपना “”प्यार ही है बंदगी
आज मेरी ज़िन्दगी का “””भर गया गोदाम भी

प्यार ‘ऐनुल’ ज़िन्दगी में हो मुबारक अब तुम्हें
लाख खंज़र से करें वो “”आज कत्लेआम भी

 

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नाम- ऐनुल हक़ अंसारी
उपनाम- ऐनुल बरौलीवी
सम्प्रति- पूर्वोत्तर रेलवे में  कार्यरत
स्थानीय कई  पत्र- पत्रिकाओं में ग़ज़ल- कविताएँ प्रकाशित
* काव्योदय साझा संकलन(द्वितीय) में ग़ज़ल प्रकाशित
* काव्योदय स्मृति- चिह्न से 28 मई 2016 को नई दिल्ली में सम्मानित
* अखिल भारतीय कवि सम्मेलन/मुशायरा में सतत् आमंत्रित
पता- कोटवाँ, बरौली,
गोपालगंज(बिहार)

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