‘ऐनुल’ बरौलीवी की ग़ज़ल

मेरी दुआओं में असर दे दे
मौला फ़क़त अपनी नज़र दे दे

ये ज़िन्दगी मेरी संवारो तुम
ऐसी इनायत का शजर दे दे

ईमान मेरा ये मुक़्क़मल हो
मुझको मदीने का सफ़र दे दे

इज़्ज़त मुझे भी बख़्श दे मौला
रहमत तू अपनी मेरे सर दे दे

मैं दुश्मनों का सर कुचल डालूँ
मुझको अभी ऐसा जिग़र दे दे

मौला रहम कर तू करम कर तू
तू आज किस्मत का सहर दे दे

गुमराह हूँ भटका हुआ हूँ मैं
तू आज ही मुझको बसर दे दे

‘ऐनुल’ खुदा की बंदगी ही हो
दुनिया में तू ऐसा बशर दे दे

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