‘ऐनुल’ बरौलीवी की दो ग़ज़लें

 एक

ज़िन्दगी में दिल लगाना सीखिये
दीप उल्फ़त के जलाना सीखिये
नफ़रतें दिल के कभी ना पास हों
प्यार का दरिया बहाना सीखिये
दोस्ती ही प्यार का इक नाम है
दूसरों के ग़म उठाना सीखिये
हौसले से मुश्क़िलों को जीतकर
ज़िन्दगी में मुस्कुराना सीखिये
हौसले हों ज़िन्दगी में कम नहीं
मौत से पंजा लड़ाना सीखिये
ज़िन्दगी में दर्द सहना जब पड़े
अश्क़ आँखों में छुपाना सीखिये
मज़हबों की आड़ में लड़ना नहीं
प्यार से दिल को मिलाना सीखिये
दुश्मनों की चाल गहरी आज है
दिल सभी का आज़माना सीखिये
नफ़रतों को भूल जाने में भला
रौशनी दिल में जलाना सीखिये
प्यार की महफ़िल सजाकर आप भी
ख़्वाब अपने ख़ुद सजाना सीखिये
आज ‘ऐनुल’ मुश्क़िलों में प्यार से
गीत कोई गुनगुनाना सीखिये
दो
हमारी ये दुआ रब से “””””हमेशा ही बढ़े भारत

तरक्की पर तरक्क़ी हर तरफ़ करता रहे भारत
हमारे देश को खंडित नहीं अब फिर करे दुश्मन
सभी मिलकर रहेंगे अब नहीं फिर से झुके भारत
नहीं देखो कभी आँखें तरेरे”””””” तुम मुझे पाकी
मिला देंगे तुझे मिट्टी”””” सुनो फिर से कहे भारत
कभी भी नाम चमकेगा “”जहाँ में देख सूरज सा
बड़ा ही नाम वाला हूँ “””सभी कहते मुझे भारत
निग़ाहें हो बुरी जिसकी कभी भी आज़मा ले वो
लड़ेगा आज दुश्मन से”””” उसे तो मौत दे भारत
कभी गाँधी कभी आज़ाद””” पैदा आज भी होते
दुआ ‘ऐनुल’ करे दिल से “”सदा आगे बढ़े भारत
————-
नाम- ऐनुल हक़ अंसारी
उपनाम- ऐनुल बरौलीवी
शिक्षा- एम ए , बी एड ,
       डी पी एड, एल-एल बी
जन्म-तिथि- 02 अक्टूबर
                 1958
सम्प्रति- पूर्वोत्तर रेलवे में
            कार्यरत
उपलब्धियाँ- * स्थानीय कई  पत्र- पत्रिकाओं में ग़ज़ल- कविताएँ प्रकाशित
* काव्योदय साझा संकलन(द्वितीय) में ग़ज़ल प्रकाशित
* काव्योदय स्मृति- चिह्न से 28 मई 2016 को नई दिल्ली में सम्मानित
* अखिल भारतीय कवि सम्मेलन/मुशायरा में सतत् आमंत्रित
पता- कोटवाँ, बरौली,
       गोपालगंज(बिहार)

You may also like...

Leave a Reply