अनुजा शर्मा की दो कविताएं

एक

तुम्हें याद है वो रात
वो रंगों की बरसात
कि जिसमें से कुछ रंग बिखेरे थे
तुमने मुझ पर
वो प्रेम पक्के रंग सा
मुझ पर ऐसा चढ़ गया है
मानो कभी उतरेगा ही नहीं
पर अब बिसरा दी तुमने वो सारी बातें
तुम्हें तो ज़रा सा भी मलाल नही
कैसे कहू मैं कि तुम्हें तो मेरा ख्याल ही नहीं

2.
हां, दिल करता है मेरा,
तुम संग पहाड़ों पर जाने को
झरने के संग कोई गीत गुनगुनाने को
नरम घास के गलीचे पर बैठ कर
फूलों सा मुस्कुराने को
पंछियों सा चहचहाने को
बच्चों सा खिलखिलाने को,
कुछ तेरी कुछ मेरी सुनने सुनाने को
वो गुज़रा सुहाना लम्हा,फिर से दोहराने को
अपने अतीत में एक बार फिर से जी जाने को
हा दिल करता हैं मेरा….

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