जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत

 

पुस्तक समीक्षा

यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि जल्द ही दूसरी, तीसरी…आएं। अगरचे 66 साल के अवकाशप्राप्त इस शिक्षक-कथाकार का संकोच टूटे और वे प्रकाशकों के दर खटखटा सकें। 
उदयराज की दर्जनों कहानियाँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं । लेकिन कभी किसी प्रकाशक ने (कोलकाता के भी) अपनी तरफ से इनकी किताब छापने में दिलचस्पी नहीं दिखाई । यह कहने की बात नहीं कि संकोची, सीधे-सरल, गॉडफादर विहीन लेखकों की किताब का आना अब कठिन होता जा रहा है । 
बहरहाल, लेखक कोलकाता से लगे बैरकपुर शिल्पांचल में रहते हैं, जहां जूट मिलों की अच्छी तादाद है, जिनके बंद होने, खुलने का अंतहीन सिलसिला है। इन्हीं के दिए दुश्वारियों का असमाप्त चक्र भी। छोटे-छोटे दड़बेनुमा घर, बजबजाती नालियां, कर्ज, जुआ, शराब, मारपीट, दंगे-फसाद, पुलिस, नेता, मस्तानों से त्रस्त तमाम जिंदगियां। इसी में प्रेम, बेवफाई और उत्सव के क्षण भी। कथाकार इन्हें ही कथ्य का आधार बनाता है। यथार्थ के टुकड़ों को अपनी कहानियों में जीवंत करने की कोशिश करता है। संग्रह की पहली कहानी “दंगा” बताती है कि वह किसी भी बहाने किया, कराया जा सकता है। इस मौके का इस्तमाल बदले की आग बुझाने के लिए भी किया जा सकता है।
“दरकन” कहानी में मुकदमेबाजी के दंश रिश्ते में दो फाड़ होने के विद्रूप को दिखाया गया है। एक भाई गांव में दूसरा शहर में। दोनों जगह दोनों की अपनी-अपनी जंग। खेती को लेकर चाचा से मुकदमेबाजी, इससे कोई लाभ नहीं की नसीहत बड़े को भाती नहीं। बड़ा पांडे जी के कर्ज को चुकाने में छोटे से शायद मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, मगर शहर में होने का मतलब जेबें भरी होना ही तो नहीं। दुखी बड़ा पांडे जी के अपमान के कारण छोटे से भाग-बंटवारे तक पहुंच जाता है। इसी तरह “जोंक” में सूदखोरी के चक्र में फंसे लोगों की कथा कही गई है। पुत्र को यह धंधा पसंद नहीं, पर पिता उसे उसी में उतारना चाहते हैं, क्योंकि अच्छी नौकरी की उम्मीद नहीं। आखिर में पिता के निधन के बाद वह उनके बही-खाते को आग के हवाले कर कर्ज के जोंक से अभाव के गिरफ्त में फंसे कर्जदारों को मुक्त कर देता है। “पापिन” कहानी भी इसी परिवेश के एक हिस्से को बयान करती है। यह तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से उजड़ कर भारत ( बंगाल) आए परिवार की कहानी है। पेट भरने की मजबूरी में एक बेटी को पिता की उम्र के पुरुष से शादी करनी पड़ती है। पटरी पर आती जिंदगी को झटका तब लगता है जब कागज मिल बंद हो जाती है। पति कहीं गुम हो जाता है। इसके बाद गुलाबचंद उसे अपना लेता है। पहले पति से मिले दो बच्चों की परवरिश की खातिर वह यह समझौता करती है। पर पास-पड़ोस से उसे मदद कम बदनामी ज्यादा मिलती है। लोग उसे पापिन यानी चरित्रहीन मान मुहल्ले से निकाल देना चाहते हैं। इसका पता चलने पर वह दूसरी जगह चली भी जाती है।
ऐसी ही विसंगतियों से भरी मजदूर बस्तियों से जुड़ी दूसरी कई कहानियां हैं, जिनमें प्रेम की, भरोसे की, कामरेडों के संघर्ष और समझौते की कथा कही गई है। इन कहानियों की खासियत यह है कि पात्र और परिवेश जमीनी लगते हैं। कुल मिलाकर कहानियां पठनीय हैं। किताबों के इंतजार में रहने वाले पाठक लेखक की इस किताब से मिल सकते हैं।

कहानी संग्रह : आरंभ

कथाकार : उदयराज

प्रकाशक : लिटरेचर प्वाइंट

अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध। फ्लिपकार्ट पर कैश ऑन डिलीवरी सुविधा भाी उपलब्ध

अमेजन का लिंक

https://www.amazon.in/ARAMBH-UDAY-RAJ/dp/8193688325/ref=sr_1_1?keywords=arambh&qid=1555819676&s=gateway&sr=8-1

फ्लिपकार्ट का लिंक

https://www.flipkart.com/arambh/p/itmffp2hjkkan6cx?pid=9788193688328&lid=LSTBOK97881936883289MJLZL&marketplace=FLIPKART&srno=s_1_1&otracker=search&otracker1=search&fm=SEARCH&iid=c382b6b9-240a-4f1f-b4cc-3f8d2bf214ee.9788193688328.SEARCH&ppt=SearchPage&ppn=Search&ssid=rwb41m4e2o0000001555818912951&qH=70752a050054e8b4

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