अर्जित पांडेय की कविता ‘पुरुष तू देवता क्यों नहीं?’

अर्जित पाण्डेय

अर्जित आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग  के छात्र हैं। अच्छा लिखते हैं। पुरुष और महिला को लेकर जिस सोच के साथ हम केवल दिखावे के लिए जीते हैं, उसमें उनकी ये कविता कई लोगों को अजीब लग सकती है लेकिन अर्जित जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, उसकी भी तो अनदेखी नहीं की जा सकती।

 

पुरुष तू देवता क्यों नहीं?

मेरे साथ बैठकर सिगरेट की
कश लगाती वो लड़की
शराब के नशे में पब में
थिरकती वो लड़की
मुझे देख आँख मारती वो लड़की
देवी है
और मैं पुरुष प्रधान समाज का
एक आवारा लड़का।
मै पुरुष देवता क्यों नहीं
मुझपर कमेंट्स कसने वाली वो लड़की
मेरे बाल रूप का यौन शोषण
करने वाली वो लडकी
लिव इन रिलेशनशिप में रहकर बलात्कारी
बना झूठा आरोप लगाने वाली वो लड़की
देवी है
और मैं पुरुष प्रधान समाज का
एक आवारा लड़का
मै पुरुष देवता क्यों नहीं
अपनी मर्जी से मेरे साथ घर छोड़कर
भागने वाली वो लड़की
बहला फुसलाकर भगाने का
दोष लगाने वाली वो लड़की
वेश्यालयों में अपनी सहेली को
चंद पैसे में बेचने वाली वो लड़की
ननद सास बन भाभी बहू को तड़पाकर
जलाकर मार डालने वाली वो लड़की
देवी है
और मैं पुरुष प्रधान समाज का
एक आवारा लड़का
मैं पुरुष देवता क्यों नहीं

You may also like...

3 Responses

  1. Quality articles or reviews is the secret to be a focus for the people to pay a visit the site, that’s what this website is providing.

  2. परितोष कुमार 'पीयूष' says:

    अच्छी रचना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *