आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा

आंखों का दरिया छुपाने के लिये
मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।।

बात दिल की अब समझता है कौन
जायें किसको गम दिखाने के लिये ।।

हां हमे मजबूत होना ही पड़ा
राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।।

सर झुकाना मंजूर कर “आरती ”
फ़ासले दिल के मिटाने के लिये ।।

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