सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘और फिर अंधेरा’

सुशान्त सुप्रिय

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इस माह के आखिरी हफ्ते में प्रकाश्य

प्रिय गुरमीत ,                       यहाँ हैवलॉक द्वीप , अंडमान के डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस से मैंने पिछले हफ़्ते भी तुम्हें पत्र लिखा था  पर तुमने इस पते पर मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया है । क्या तुम मुझे पत्र लिखने का अपना वादा भूल गए हो? पिताजी बता रहे हैं कि वहाँ दिल्ली में बहुत गड़बड़ चल रही है । पिछले हफ़्ते से विश्व की सभी प्रमुख महाशक्तियाँ विनाशकारी तृतीय विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं । पिताजी का कहना है किअमेरिका और यूरोपीय देश एक ओर हैं जबकि चीन , रूस और उत्तर कोरिया दूसरी ओर हैं । चारो ओर भयऔर आतंक का माहौल छाया हुआ है । डाक-व्यवस्था भी बाधित हुई होगी । शायद इसीलिए तुम्हारी लिखी चिट्ठी मुझे नहीं मिली है । वहाँ हमारा दोस्त नफ़ीस  कैसा है ? और जेनेलिया कैसी है ?  मैं तुम्हारे और  स्कूल के सभी दोस्तों के लिए चिंतित हूँ ।

सच कहूँ तो मुझे पिताजी की तृतीय विश्वयुद्ध वाली बात पर पूरा यक़ीन नहीं है । हो सकता है , वहाँ दिल्ली में सब ठीक हो और तुमने आलस के मारे मुझे पत्र लिखा ही नहीं हो । हमें यहाँ अंडमान के हैवलॉक द्वीप आए हुए एक हफ़्ते से ज़्यादा समय हो गया है । तुम्हें पता है , मम्मी तो यहाँ आना ही नहीं चाहती थी । वह तो कश्मीर जाना चाहती थी , पर पिताजी हम सब को मना कर यहाँ ले आए । वैसे मेरी  इच्छा शुरू से ही अंडमान के जंगलों में घूमने की थी । अब तो मम्मी को भी यहाँ के समुद्र-तट और यहाँ की हरियाली अच्छी लगने लगी है । इस बीच वहाँ दिल्ली में रितिक रोशन की नई फ़िल्म  लगने वाली थी । जब मैं वापस आऊँगा और सब ठीक होगा तो हम दोनों अपने पापा-मम्मी के साथ इकट्ठे वह फ़िल्म देखने जाएँगे ।

यहाँ डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस के पास के ‘ बीच ‘ से समुद्र में सूर्योदय और सूर्यास्त बहुत सुंदर लगते हैं । पास ही मछलियों से भरी एक छोटी सी नदी भी बह रही है । हमें बहुत मज़ा आ रहा है । हमने बहुत सारी तस्वीरें खींची हैं । जब मैं वापस दिल्ली आऊँगा तब तुम्हें ये सारी सुंदर फ़ोटो दिखाऊँगा । हमारे पड़ोस में  केरल का एक परिवार ठहरा हुआ है । अंकल-आंटी के साथ एक प्यारी-सी छोटी बच्ची भी है । मैं उसके साथ खेलता हूँ ।

तुम्हारी बहुत याद आ रही है । तुम कैसे हो ? मैं मोबाइल फ़ोन पर तुमसे बात करना चाहता था पर इन  दिनों यहाँ कोई भी फ़ोन काम नहीं कर रहा । पोस्ट-ऑफ़िस यहाँ से दूर है । यहाँ के रसोइया माइकेल अंकल हफ़्ते में दो बार दूर के बाज़ार जा कर खाने-पीने का सामान ख़रीद लाते हैं । लौटते हुए वे डाक-घर से यहाँ की चिट्ठियाँ भी ले आते हैं । तुम्हारी चिट्ठी की प्रतीक्षा है , दोस्त ।

— तुम्हारा मित्र ,

पलाश ।

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प्रिय गुरमीत ,

सच-सच बताओ , तुम वहाँ ठीक-ठाक हो न ?  यहाँ पिताजी ,केरल वाले अंकल और सारे बड़े लोग बहुत चिंतित दिखाई देते हैं । वे रेडियो पर हो रहा  प्रसारण सुनते रहते हैं । बात-बात पर उनके मुँह से ‘ परमाणु बम ‘ और ‘ तीसरा विश्व-युद्ध ‘ जैसे शब्द निकलते रहते हैं । उनके बीच हमेशा अमेरिका , रूस , चीन और उत्तर कोरिया की बातें हो रही होती हैं । उन सब की बातें सुनकर मम्मी भी चिंतित रहने लगी है। पूछने पर मम्मी ने बताया कि दुनिया में परमाणु-युद्ध शुरू हो गया है । जब मैंने वापस दिल्ली लौट चलने की बात की तो मम्मी ने बताया कि विश्व-युद्ध के कारण जहाज़ और विमान सेवाएँ बंद पड़ी हुई हैं । क्या यह सच है ? तब तो हम लोग न जाने कब तक के लिए यहाँ फँस गए हैं ।

आज सुबह से रेडियो पर भी कोई प्रसारण नहीं हो रहा । टी. वी . पर प्रसारण तो दो-तीन दिनों पहले ही बंद हो गया था । सुबह से मम्मी की तबीयत भी ख़राब चल रही है । पापा यहाँ अपने   जो दवाइयाँ लाएथे , वे सब अब ख़त्म होने वाली हैं । मैं यहाँ के माहौल में बढ़ रहे तनाव को महसूस कर  सकता हूँ ।

दोस्त , मैं तुम्हें एक राज की बात बताता हूँ । मेरी मम्मी को ‘ बेबी ‘ होने वाला है । कल रात मम्मी ने मुझे यह बात बताई । उन्होंने मुझे यह बताया कि मेरे इस बेबी ( भाई या बहन ) को पाँच-छह महीने के बाद भगवान जी हमारे पास भेजेंगे । मम्मी ने मुझे कहा कि अभी मैं यह बात किसी को नहीं बताऊँ । तुम भी प्लीज़ यह सीक्रेट अभी किसी से शेयर नहीं करना । गुरमीत , तुम तो जानते हो कि मुझे एक बेबी बहन  चाहिए।मैं रोज़ भगवान जी से प्रे कर रहा हूँ कि ऐसा ही हो । मम्मी कहती है कि भाई हो या बहन , सेहतमंद होना चाहिए । हमारी क्लासमेट नेहा के भाई की तरह बीमार नहीं ।

गुरमीत , अभी सुबह के ग्यारह ही बजे हैं , पर बाहर अँधेरा-सा  छाया  हुआ  है ।  हवा  भी  साफ़  नहीं  है । पिछले दो दिनों से हमें सूरज की रोशनी ही नहीं दिखी है । यहाँ सब बड़े लोग बहुत फ़िक्रमंद हैं । तुम  सब वहाँ कैसे हो ? मैं अब भगवान जी से प्रार्थना करने जा रहा हूँ । अपने पापा-मम्मी को मेरी नमस्ते कहना ।

— तुम्हारा मित्र ,

पलाश ।

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प्यारे दोस्त गुरमीत ,

तुम कैसे हो ? यहाँ पिछले नौ-दस  दिनों  से  बाहर  अँधेरा  छाया  हुआ  है ।  अब  तो  मुझे  तारीख़  भी  याद नहीं । जिस अँधेरे की बात मैंने अपनी पिछली चिट्ठी में की थी , अब वही अँधेरा जैसे हमेशा के लिए  यहाँ छा गया है । यहाँ हमारे ठहरने की जगह पर खाना-पानी ख़त्म होता जा रहा है ।  इतने दिनों से  यहाँ सूरज ही नहीं उगा ।  चारो ओर घुप्प अँधेरा है । सूरज की गर्मी के  बिना ठंड बढ़ती  जा रही है ।  बड़े लोग आपस में बातें कर रहे हैं कि परमाणु-युद्ध की वजह से  धरती पर बहुत समय  के लिए  ‘ न्यूक्लिअर विंटर ‘ आ जाएगी और सारे जीव-जंतु और पेड़-पौधे नष्ट हो  जाएँगे ।  हे भगवान् ,  अब क्या होगा ? मुझे यहाँ घबराहट हो रही है ।

इस बीच हम इस जगह के बेसमेंट में शिफ़्ट हो गए हैं । पिताजी ने बताया है कि परमाणु-युद्ध की वजह से बाहर की हवा ज़हरीली होती जा रही है । चारो ओर एक कड़वा धुआँ फैला हुआ है । यह  कैसा विनाशकारी युद्ध है ? नदी से आ रहा हमारा पीने का पानी भी अब बदबूदार हो गया है ।  उसे उबाल कर पीने के बावजूद हमें उल्टी हो रही है ।

दोस्त , जब से यहाँ अँधेरा आया है , केरल वाले अंकल-आंटी की छोटी गुड़िया  बीमार  रहने  लगी है । यहाँ पिछले कुछ दिनों से लाइट भी नहीं है । बिना बिजली के हम सब इन दिनों मोमबत्तियों के  सहारे अपना समय गुज़ार  रहे हैं । लेकिन मुझे डर है कि  हमारी मोमबत्तियाँ भी  जल्दी ही  ख़त्म हो  जाएँगी ।  तब हम क्या करेंगे ?

इस बीच हमारे रसोइया माइकेल अंकल एक दिन अँधेरे में ही बाज़ार और पोस्ट-ऑफ़िस के लिए निकले । पर वे लौट कर वापस नहीं आ पाए । पता नहीं वे कहाँ गुम हो गए ।

तुम अपना ख़याल रखना , दोस्त ।

— तुम्हारा मित्र ,

पलाश ।

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प्रिय गुरमीत ,

कुछ ही घंटे पहले केरल वाले अंकल-आंटी की छोटी  गुड़िया की मौत हो  गई । वह लगातार बहुत बीमार चल रही थी । उसके शरीर में जगह-जगह फोड़े-फुंसी उग  आए  थे , और उसके सारेबाल झड़ गए थे । वह सारा दिन दर्द से चीख़ती-कराहती रहती थी ।  यहाँ कोई डॉक्टर भी नहीं था । आज मैं बहुत दुखी और डरा हुआ हूँ और मुझे रोना आ रहा है …

— तुम्हारा मित्र ,

पलाश ।

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प्रिय गुरमीत ,

कल रात मेरी मम्मी ने समय से बहुत पहले एक मरे हुए बच्चे को जन्म दिया । हम सब बहुत रोए । जानते हो , उस बेबी के हाथ-पैर ही नहीं थे ।  पापा ने बताया कि ऐसा दुनिया में हो रहे परमाणु हथियारों के  इस्तेमाल से होने वाले रेडिएशन की वजह से हुआ है । पापा ने बताया कि आने वाले कई सालों तक दुनिया के ज़्यादातर बच्चे ऐसे ही टेढ़े-मेढ़े पैदा होंगे ।

पहले तो मम्मी कई घंटे तक उस मरे हुए बेबी को अपनी छाती से चिपकाए रहीं । फिर वह फूट-फूट कर बहुत रोईं । मैं भी बहुत दुखी और उदास हूँ । पापा और केरल वाले अंकल ने उस मरे हुए बेबी को बाहर अँधेरे में जा कर कहीं दफ़ना दिया । मम्मी की हालत ख़राब होती जा रही है । इस घटना से वह भीतर तक हिल गई हैं । वे अचानक ही कभी हँसने लगती हैं , कभी बेतहाशा रोने लगती हैं , तो कभी चीख़ने-चिल्लाने लगती हैं । मुझे यहाँ बहुत डर लग रहा है । पता नहीं वहाँ दिल्ली में तुम लोगों का क्या हाल है । काश यह अँधेरा जल्दी दूर हो जाता और सूरज दोबारा दिख जाता । तब सब पहले जैसा ठीक हो जाता और हमवापस दिल्ली लौट आते । मुझे तुम सब की बहुत याद आ रही है ।

— तुम्हारा मित्र ,

पलाश ।

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