Author: literaturepoint

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शिक्षा की दशा और दिशा पर केंद्रित जरूरी अंक

चर्चित पत्रिका कथन संपादक संज्ञा उपाध्याय सहयोग राशि 100 रुपए पता 107, साक्षरा अपार्टमेंट, ए-3, पश्चिम विहार, नई दिल्ली 110063 फोन –011 25268341 सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव अच्छी शिक्षा और बेहतर इलाज—ये 2 ऐसी चीजें हैं, जो इस देश के गरीब और निम्नमध्य वर्ग की पहुंच से बाहर निकल चुकी हैं।...

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ग़ज़ल का क़द मनुष्यता से तो ऊँचा नहीं

ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि, गीतकार एवं आलोचक। ‘शब्‍द सक्रिय हैं'(कविता संग्रह) एवं ‘शब्‍दों से गपशप'(आलोचना),  ‘भाषा की खादी'(निबंध) सहित भाषा व आलोचना-समीक्षा की अनेक कृतियां प्रकाशित। अज्ञेय सहित कई कवियों के कविता-चयन, अधुनांतिक बांग्ला कविता एवं कुंवर नारायण पर केंद्रित आलोचनात्‍मक पुस्‍तक ‘अन्‍वय’ एवं ‘अन्‍विति’ का संपादन। उत्तर...

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केशव शरण की 5 ग़ज़लें

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह), जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह), दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह), कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह), एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह), दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह), क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) , न संगीत न फूल ( कविता संग्रह), गगन नीला धरा धानी नहीं है (...

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आलोक कुमार मिश्रा की 4 कविताएं

आलोक कुमार मिश्रा  1-आँखों की मशाल अपनी बेटी को  सिखा रहा हूँ आँख मारना जिससे वो एक झटके में ही  ध्वस्त कर दे उसे घेरने वाली मर्दवादी किलेबंदी उसे सिखा रहा हूँ आँखें मटकाना  कि वो देख सके तीन सौ साठ डिग्री और भेद सके  चक्रव्यूह के सारे द्वार उससे...

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अंधेरे होते समय में उम्मीद की किरण है ‘काठ में कोंपल’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लंबी कहानी को निभाना बहुत कठिन होता है लेकिन अगर कहानीकार का नाम रमेश उपाध्याय हो तो फिर कुछ भी असंभव नहीं है। अपनी नई कहानी ‘काठ में कोंपल’ में रमेश जी ने यह चमत्कार कर दिखाया है। 6 अप्रैल को गांधी-शांति प्रतिष्ठान, आईटीओ में ‘कथा-कहानी’ की...

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रमेश उपाध्याय की कहानी ‘काठ में कोंपल’

रमेश उपाध्याय सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार (केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा), साहित्यिक पत्रकारिता पुरस्कार (वनमाली सृजनपीठ, भोपाल), ‘नदी के साथ’ (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा पुरस्कृत), ‘किसी देश के किसी शहर में’, ‘डॉक्यूड्रामा तथा अन्य कहानियाँ’ (दोनों पुस्तकें हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत) संपर्क 107, साक्षरा अपार्टमेंट्स, ए-3, पश्चिम...

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अनुपमा तिवाड़ी की 2 कविताएं

अनुपमा तिवाड़ी ए – 108, रामनगरिया जे डी ए स्कीम,  एस के आई टी कॉलेज के पास, जगतपुरा, जयपुर 302017  मुझे बहुत कुछ हो जाना है मुझे पेड़ों से प्यार करते हुए, एक दिन पेड़ हो जाना है मुझे नदी से प्यार करते हुए, एक दिन नदी हो जाना है...

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मोहन कुमार झा की 3 कविताएं

मोहन कुमार झा अररिया, बिहार सम्प्रति अध्ययनरत् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मो. 78390450071. हारे हुए लोग अच्छा होता है बेहतर चुननामगर उससे भी अच्छा होता है सबसे बेहतर चुननासिर्फ जीतने वाले नहींहारे हुए लोग भी अच्छे होते हैं। ख्वाब बगैर नींद के भी देखी जा सकती हैआदमी को बनाया जा सकता है देवताएक पल में...

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जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत   पुस्तक समीक्षा यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि...

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शालिनी मोहन की 4 कविताएं

शालिनी मोहन विभिन्न राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित। ‘अहसास की दहलीज़ पर’ साझा काव्य संग्रह के. जी. पब्लिकेशन द्वारा  2017 में प्रकाशित .  रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से कविता संग्रह ‘दो एकम दो’ वर्ष 2018 में प्रकाशित.   वर्तमान पता फ्लैट नं 402 वंदना रेसिडेंसी अपार्टमेंट मनीपाल काउन्टी रोड सिंगसान्द्रा बंगलुरू(कर्नाटक)-560068  ...

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मौजूदा समय से मुठभेड़ करती कहानियां

दिनांक 6 अप्रैल, 2019 को कथा- कहानी की गोष्ठी गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में आयोजित की गई. इस गोष्ठी में वरिष्‍ठ कथाकार रमेश उपाध्याय ने अपनी कहानी ‘काठ में कोंपल’ व रचना त्‍यागी ने अपनी कहानी ‘ काला दरिया’ का पाठ किया.  रमेश उपाध्याय की कहानी पर बोलते हए...

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बांदा की आबोहवा में कविता का अक्स

पिछले रविवार, सात अप्रैल को राजकीय महिला डिग्री कालेज बाँदा में जनवादी लेखक मंच, बाँदा और लोकोदय प्रकाशन की ओर से समकालीन कविता पाठ और परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अधिवक्ता संघ, बाँदा के अध्यक्ष श्री सुबीर सिंह  ने की और संचालन जनवादी लेखक...

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एंटन चेखव की कहानी ‘एक कलाकृति’

सुशान्त सुप्रिय नाम : सुशांत सुप्रियजन्म : 28 मार्च , 1968शिक्षा : एम.ए.(अंग्रेज़ी ), एम . ए.  ( भाषा विज्ञान ) : अमृतसर ( पंजाब ) , व दिल्ली में । प्रकाशित कृतियाँ :—————–# हत्यारे ( 2010 ) , हे राम ( 2013 ) , दलदल ( 2015 ) , ग़ौरतलब कहानियाँ( 2017 ) , पिता के नाम ( 2017 , मैं कैसे हँसूँ ( 2019 ) : छह कथा–संग्रह । # इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं ( 2015 ) , अयोध्या से गुजरात तक ( 2017...

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अरुण कुमार की 4 कविताएं

अरुण कुमार विचार विचारशून्य नहीं था मैं, सदियों से कौंधते रहे मेरे मन में, विचार तुम्हारी मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ, मगर मेरे शब्दों को दबा दिया गया हजारों वर्षों के शोषण में, अछूत कहकर कुचल दिया गया मेरे वजूद को, ब्राह्मणवादी संस्कारों ने और थमा दिया गया झुनझुना मुझे जाति...

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2020 के मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘लहक’ 2020 के लिए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा कर दी है। अगले वर्ष ये सम्मान मधुरेश और कांति कुमार जैन को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान है, पुरस्कार नहीं। न ही इसमे किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं, न चयन की...

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श्रीधर करुणानिधि की 6 कविताएं

श्रीधर करुणानिधि जन्म पूर्णिया जिले के दिबरा बाजार गाँव में शिक्षा- एम॰ ए॰(हिन्दी साहित्य) स्वर्ण पदक,    पी-एच॰ डी॰, पटना  विश्वविद्यालय, पटना। प्रकाशित रचनाएँ-     विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। आकाशवाणी पटना से कहानियों का तथा दूरदर्शन, पटना से काव्यपाठ का प्रसारण। प्रकाशित पुस्तकें-1. ’’वैश्वीकरण और हिन्दी का बदलता हुआ स्वरूप‘‘(आलोचना...

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अमित कुमार मल्ल की 5 कविताएं

अमित कुमार मल्ल जन्म स्थान – देवरिया शिक्षा – स्नातक (दर्शन शास्त्र , अंग्रेजी साहित्य , प्राचीन इतिहास व विधि  ), परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) सम्प्रति  –  सेवारत रचनात्मक उपलब्धियां- प्रथम काव्य संग्रह – लिखा नहीं एक शब्द , 2002 में प्रकाशित । प्रथम लोक कथा संग्रह – काका...

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शहंशाह आलम के कविता संग्रह ‘थिरक रहा देह का पानी’ से 5 कविताएं

तीली आपके पास कितना कुछ बचा है अब भी जीने के लिए कई सदियां मेरे पास एक तीली बची है माचिस की आपके अंधेरे कोने को रौशन करने के लिए यह तीली बचाए रखना चाहूंगा उसके प्रेम के बचे रहने तक 2. मुझ में मैने देखा मेरे अंदर एक नदी...

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शशांक पांडेय की 7 कविताएं

शशांक पांडेय सुभाष लाँज, छित्तुपुर, बी.एच.यू, वाराणसी(221005) ● मो.नं-09554505947 ● ई.मेल-shashankbhu7@gmail.com 1. खिड़कियाँ मैंने बचपन में ऐसे बहुत से घर बनाएं और फिर गिरा दिए जिनमें खिड़कियाँ नहीं थीं दरवाजें नहीं थे बाकी सभी घरों की तरह उस घर में  मैंने सबकुछ लगाए थे लेकिन फिर भी  दुनिया को साफ-साफ...

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पल्लवी मुखर्जी की कविता ‘औरत और चिड़िया’

पल्लवी मुखर्जी वह औरत तमाम दुःखों को रखती है संदूक के भीतर तह लगाकर फिर एक-एक कर उन्हें खोलती जाती है परत दर परत उनसे गुज़रती है और डूबती जाती है आँखों के समुद्र में गोते लगाती हुई किनारे पर मिल जाती है एक चिड़िया से औरत और चिड़िया एक...