Author: literaturepoint

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‘लोकभाषा बचेगी, तभी हिन्दी बचेगी’

  जयप्रकाश मानस 30 सितंबर, 2015 उनके पड़ोस में आज के दिन विशेष तौर पर याद आ रहे हैं – छायावाद शब्द के प्रथम प्रयोक्ता, छायावादी कविता के जनक पद्मश्री मुकुटधर पांडेय । उनकी कविता ‘कुर्री के प्रति’ पहली छायावादी रचना मानी जाती है। आज यानी 30 सितम्बर 1895 को...

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डॉ विनीता राहुरिकर की दो कविताएं

  डॉ विनीता राहुरिकर M.Sc. botany, spec. Air microflora, plant pathology.M.A. drawing painting, हिंदीD.C.H.,  1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 150 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 62 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह,ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रहघर-आँगन, पुस्तक मित्र  बाल कथा संग्रहTwo loves of...

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एक था रिक्शावाला

  संजय स्वतंत्र दफ्तर के लिए निकल गया हूं। मगर मेट्रो स्टेशन जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा। न फीडर बस और न ही बैटरी रिक्शा। काफी इंतजार के बाद एक रिक्शावाला आता दिख रहा है। उसे रुकने का इशारा किया है। ओह! इस बंदे की तो पूरी...

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अनुपम निशान्त के तीन गीत

  अनुपम निशान्त 1. तुम प्रेम का दीप जला देना जब जीवन की साँझ ढलेगी, दिन धुंधले पड़ जाएंगे तब दरवाजे की चौखट पर तुम प्रेम का दीप जला देना। अभी तो सबका संग-साथ है, हर दिन कोई नई बात है, ऋतुएं मद्धम राग सुनाती हैं, अभी प्रकृति में उल्लास...

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…तो सभी पत्रकार उपन्यासकार होते

  जयप्रकाश मानस 20 सितंबर, 2015 22 भाषा 43 कवि हिंदी अकादमी शायद देश की पहली सरकारी संस्था है जो भारतीय भाषाओं के कवियों को निरंतर दो दिनों तक एक मंच पर जोड़कर उनके मध्य संवाद रचती है । ‘भारतीय कविता बिम्ब’ नामक यह महत्वपूर्ण आयोजन दिल्ली में पिछले कई...

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डॉ सजल प्रसाद की कविता ‘इंकलाब’

  डॉ सजल प्रसाद शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी), पी-एच.डी.लेखन – ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’ पुस्तक प्रकाशित। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में दर्जनाधिक शोधालेख प्रकाशित। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में आलेख प्रस्तुत। सोशल मीडिया के दसाधिक साहित्यिक समूहों में निरंतर काव्य-लेखन।पत्रकारिता – ‘हिन्दुस्तान’ हिन्दी दैनिक से सम्बद्ध। इसके पूर्व ‘आज’ और ‘नवभारत...

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सोने की पाजेब

  संजय स्वतंत्र लेखक जनसत्ता, दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार हैं। कुछ दिन पहले की बात है। न्यूजरूम में काम करते हुए एक खबर पर मेरी नजर ठिठक गई। खबर थी-दुल्हन ने किया नशेड़ी से शादी से इनकार। यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की खबर थी, जहां एक युवती ने...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

  मनी यादव एक मौत को अपना आशना रक्खें ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें चाँद आ तो गया मेरे घर में चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें शाइरी सुनना कोई खेल नहीं शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें प्यास दरिया बुझा नही सकता इसलिए पास में कुआँ रक्खें पेड़ तहज़ीब का पड़ा...

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दरबारी रचनाकार जीता कम, मरता ज्यादा है

  जयप्रकाश मानस एक कवि की डायरी किस्त : 12 11 सितंबर 2015 अँधेरा : अदृश्य मदारी कथाकार उद्भ्रांत जी की एक चर्चित कहानी है – ‘डुगडुगी’, जिसमें अँधेरा अदृश्य मदारी का रूप धारण कर लेता है और तरह-तरह के खेल रचाता है । अब यह सच होते दिखाई देने...

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पल्लवी मुखर्जी की चार कविताएं

  पल्लवी मुखर्जी जन्म- 26 नवंबर, 1967 रामानुजगंज,सरगुजा,छत्तीसगढ़शिक्षा- बी.एएकइस पूरे प्रकरण मेंवे दोनों साक्षी थेपर हर बार तुमजलील होती रहीऔर वोतमाम बेगुनाही का सबूत देकरबच निकलता थाहर बार वो तय मुताबिक उसके अस्तित्व को तार-तार कर देता थावो मूक स्तब्ध होकरदेख रही थी उन आँखों कोजिसने उसे एक नज़र दी थीदुनिया...

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खुद को बदलो, देश को बदलो

  संजय स्वतंत्र किस्त : 10 आज घर की दिनचर्या पूरी करने के बाद जब दफ्तर के लिए चला तो देखा कि बाहर पिताजी गमछा-बनियान में ही खड़े हैं और ठेले वाले से सब्जियां खरीद रहे हैं। एक रिटायर आला अफसर को यों इस अंदाज में देख मैं संकोच में...

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बुढ़ापे में पत्नी और पैसा ही काम आते हैं

  जयप्रकाश मानस किस्त : 11 8 सितम्बर, 2015 कौन हिंदुस्तानी, कौन पाकिस्तानी 1965 के युद्ध के बाद रेडियो पाकिस्तान से फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़लें बजनी बंद हो गईं थीं, पता चला कि अब किसी भी हिंदुस्तानी शायर का कलाम नहीं बजेगा। किसी ने रेडियो पाकिस्तान, कराची की दीवार पर...

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रमेश शर्मा की पांच कविताएं

  रमेश शर्मा जन्म: 06.6.1966, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में . शिक्षा: एम.एस.सी. (गणित) , बी.एड. सम्प्रति: व्याख्याता सृजन: एक कहानी संग्रह मुक्ति 2013 में बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित . छह खंड में प्रकाशित कथा मध्यप्रदेश के छठवें खंड में कहानी सम्मिलित . *कहानियां: समकालीन भारतीय साहित्य , परिकथा, हंस ,पाठ...

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नीलाम्बर द्वारा ‘लिटरेरिया’ साहित्योत्सव का आयोजन

आनन्द  गुप्ता कोलकाता की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था नीलाम्बर द्वारा 12 से 15 अक्टूबर 2017 के बीच चार दिवसीय साहित्योत्सव ‘लिटरेरिया’ का शानदार आयोजन किया गया। गौरतलब है कि इस संस्था ने इस उत्सव के लिए किसी भी प्रकार का सरकारी या कॉरपोरेटी मदद नहीं लिया है। प्रथम दिन 12...

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’ 0

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’

कितनी छोटी सी ख्वाहिश थी उसकी वह दुनियाभर के उन बच्चों के लिए सचमुच रोटी बन जाना चाहता था जो उस वक्त उसे रोटी समझ बैठे थे जब वो भूख से बिलबिला रहे थे सुनिए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’ उन्हीं का आवाज़ में नूर मुहम्मद नूर...

नूर मुहम्मद नूर की कविता ‘बच्चे अभी पढ़ रहे हैं’ 0

नूर मुहम्मद नूर की कविता ‘बच्चे अभी पढ़ रहे हैं’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कविता ‘चांद की मौत’

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

  शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’ पांच कविता-संग्रह प्रकाशित। सभी संग्रह चर्चित। आलोचना की पहली किताब ‘कवि का...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘कलिंग कहां-कहां है?’

  निर्मल गुप्त बहुत दिन बीते कलिंग की कोई सुधबुध नहीं लेता चक्रवर्ती सम्राट को बिसराए हुए अरसा हुआ प्रजा लोकल गोयब्ल्स के इर्द गिर्द जुटती है उसे इतिहास की तह में उतरने से अधिक शब्द दर शब्द फरेब के व्याकरण में अपना त्रिदर्शी भविष्यकाल इस किनारे से साफ साफ...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

  भास्कर चौधुरी परिचय जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण,...

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हाफ गर्लफ्रेंड

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 9 राजीव चौक से वह मेरे साथ ही आखिरी डिब्बे में सवार हुई है। वह जिस तरह बार-बार अपने चेहरे को पोंछ रही है, उससे लगता है कि वह काफी दूर से और कई काम निपटा कर आई है। रूमाल से वह...