Author: literaturepoint

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अभी तो दुनिया में अन्धेर है

  जयप्रकाश मानस एक कवि की डायरी : किस्त 7 29 अगस्त, 2015 अभी तो दुनिया में अन्धेर है दिन कब का ढल चुका है, जबकि मेरे भीतर हेमंत दा का स्वर गूँज रहा है, प्रदीप का यह अमर गीत, लक्ष्मीकांत – प्यारेलाल का लाजबाब संगीत के साथ, जो मेरे...

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मो. शफ़ीक़ अशरफ की लघुकथा ‘सुबह के पटाखे’

  मो0 शफ़ीक़ अशरफ मोहिउद्दीनपुर, समस्तीपुर (बिहार) टीवी पर संदेश आ रहा था, दिवाली पर पटाखे कम जलाएँ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ ही ध्वनि-प्रदूषण भी, पटाखों की तेज़ आवाज़ से बच्चे-बूढ़े, पशु-पक्षी सब परेशान हो रहे हैं, ऑफिस जाने का समय हो रहा था जल्दी से तैयार...

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रवि कुमार गुप्ता की कहानी ‘बेपटरी’

  रवि कुमार गुप्ता नवभारत (भुवनेश्वर) में संवाददाता सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई संपर्क : 9471222508, 9437767065 रात का सन्नाटा. सङकें वीरान. स्टेशन की ओर तेजी से बढ़ रहा था. ट्रेन छूट ना जाए कहीं! इस डर ने मेरी रफ्तार बढ़ा दी थी. थैंक गॉड! सही टाइम पर स्टेशन पहुंच गया....

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सेवा सदन प्रसाद की तीन लघुकथाएं

  सेवा सदन प्रसाद एक हिंदी लेखक मोबाइल की घंटी बजी ।ऑन करने पे आवाज आई — “हेलो,  सुधीर जी नमस्कार ।” ” नमस्कार भाई साहब ।” ” सुधीर जी, आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी “कैसी कहानी  ? ” सुधीर जी ने थोड़ा आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा । ”...

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বর্ণালী চন্দের দুটি কবিতা

প্রথম কবিতা গভীর হয় রাত যন্ত্রণারা মনকে ক্ষতবিক্ষত করে হিংস্র হায়নার মতো। পূর্ণিমার চাঁদ পোড়ায় শরীর চিতার আগুনের মতো। দ্বিতীয় কবিতা নির্ঘুম রাত কাটে প্রহর গুনে। শ্রান্ত মন খোঁজে ভালোবাসার ওম। নিশ্চিন্ত , নিরুদ্বিগ্নঘুম চাই। যে ঘুমের শেষে ভোর নেই। তিনকবির সংলাপ ” মেঘবালিকার ধারাপাত…” পামেলা চক্রবর্তীর কবিতা “একটি রূপকথার...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

  मनी यादव अश्क़ जब आँख में आ जाते हैं हम इक नई  ग़ज़ल सुनाते हैंं ताइरे दिल बंधा है यादों से पर परिंदे के फड़फड़ाते हैंं यूँ कलाई पकड़ तो ली तुमने शर्म से रोयें मुस्कराते हैंं बर्क़ की चीख़ सुनके बादल भी उसके हालात पर रो जाते हैंं...

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परसाई की रचनाओं का रंगमंचीय दृष्टिकोण

  अखतर अली मूलतः नाटककार, समीक्षा एवं लघु कथाआें का निरंतर लेखन, आमानाका, कुकुर बेड़ा रायपुर (छ. ग.) माे. न. 9826126781 हरिशंकर परसाई को पढ़ना स्वयं को अपडेट करना है | जब हम परसाई जी को पढ़ रहे होते हैं दरअसल उस क्षण हम अपने समय को पढ़ रहे होते...

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बीएचयू में बेटियों पर बर्बरता से गुस्से में साहित्यकार

अब महिषासुर को टॉलरेट नहीं करेंगे मैंने तीन दिन पहले नवरात्रि की शुभकामनाएँ दी थी, क्योंकि मैं उस समय आशावादी थी। डंडों से खेला जा रहा है देश में हर तरफ। कहीं पर गरबों के नाम पर तो कहीं पर छेड़छाड़ का विरोध कर रही लड़कियों को हटाने के नाम पर। डांडिया...

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संगीता गांधी की कविता ‘शाब्दिक जुलाब’

संगीता गांधी वो लिखते हैं बहुत लिखते हैं लेखन से क्रान्ति उद्घोष करते हैं कल स्वयं क्रांति ने पूछा हे लेखक शिरोमणि चलो जो लिखते हो सार्थक करो आओ दो धक्का सत्ता के मकबरों को एक बार ज़ोर से चिल्लाओ प्रतिष्ठानों की सुरंगों में ऐसे कि सब विसंगतियां हों जाएं कम्पित वो बोले —अभी अस्वस्थ हूँ साथ तुम्हारे न चल सकूँगा लगे हैं ” जुलाब...

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क्यों न खुश रहें हम

  संजय स्वतंत्र द लास्च कोच : किस्त 6 मेरे आज लिखे के साथ जो तस्वीर देख रहे हैं ना, वो हॉलीवुड की अदाकारा क्रिस्टिन बेल की है, जो हाल में अनजाने में ही अपने एक बयान से सबको खुशियों की सौगात दे गर्इं। कैसे? इसकी चर्चा आगे करूंगा। दरअसल,...

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भावना सिन्हा की तीन कविताएं

  डॉ भावना सिन्हा जन्म तिथि -19 जुलाई शिक्षा – पीएचडी (अर्थशास्त्र ) निवास – गया ,बिहार ईमेल — sbhawana190@ gmail.com प्रकाशित कृतियां– यथावत, अंतिम जन, पुस्तक संस्कृति आदि कुछ पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित । 1. पांच बज गए पांच बज गएअभी तक नहीं आए पापा पापा  अब तक क्यों नहीं आएकहीं...

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आनन्द विश्वास के चार गीत

  आनन्द विश्वास जन्म तारीखः– 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *मिटने वाली रात नहीं* (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4.*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)...

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भगवान हो सकता है कलेक्टर

  जयप्रकाश मानस www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी : किस्त 6 25 अगस्त, 2015 एक कली दो पत्तियाँ फाइल में उलझे-उलझे बरबस याद आ गये महान संगीतकार भूपेन दा और उनका यह सुमधुर गीत – मन है कि भीतर-ही-भीतर...

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लौट आओ गौरैया

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 5 दिल्ली में बरसों से नन्हीं सुकोमल गौरैया नहीं दिख रही। किसी को मालूम भी नहीं कि वह कहां गुम हो गई। एक दिन दफ्तर के सबसे युवा साथी धीरेंद्र ने बताया कि उसके करावल नगर इलाके में गौरैया दिखने लगी है।...

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पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं

  पल्लवी मिश्रा असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला, देहरादून एक पन्नों पर कलम दर्ज़ करती है, दिनों की बर्खास्तगी रातों के बदलते मायने, पन्नों की तारीखें बयाँ करती हैं – दिनों के दस्तावेज़ो में कमतर होती रोशनी और महसूस होती है कलम की मायूसी l पन्नों पर बने फूल,चिड़ियाँ,तारे...

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अंशू सिंह की कविता ‘अंतहीन भूख’

                  अंशू सिंह जन्म 30 अक्टूबर 1987 वाराणसी   काशी हिन्दू वि वि  से स्नातक एवं   स्नातकोत्तर मिट न सकी अंतहीन भूखअभ्यंतर से मेरे अभ्यंतर से बार बार पुनःजन्म हुआचाहिये मुझकोभरपाईतृप्त भरपाई संकीर्ण से अनंततक की प्यास पुनः बुझानी है कालविजयी दशाओं मेंअक्सर भूखा थाउस रोज़ और प्यासा था जब फूटती थीएक...

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परमानन्द रमन की चार कविताएं

परमानन्द रमन जन्मतिथि : 20/12/1983 जन्म-स्थान : जमशेदपुर(तात्कालीन बिहार, वर्तमान झारखण्ड) ग्राम: करहसी, जिला- रोहतास (बिहार) आरंभिक शिक्षा बारहवीं तक जमशेदपुर में ही, तत्पश्चात कला शिक्षा में स्नातक के लिये इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग में दाखिला। स्नातकोत्तर की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  के...

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মৌসুমি ভৌমিকের গল্প ‘আমার দুর্গা !’

মৌসুমি ভৌমিক “উফফফ…।এতো টুকু তেল পড়ে আছে? এতে কি আর রান্না হবে? আজকে কাজে বেরোতে আবার দেরী হয়ে যাবে…মাআআ…আমি দোকান বেরোচ্ছি…।“………মধুজার সকাল প্রায়ই শুরু হয় এইভাবে। নুন আনতে পান্তা ফুরনো হয়তো তাদের সংসার নয়। কিন্তু স্বভাব তাদের গুছানো নয়। দাদাটা সকাল থেকেই বিড়ি মুখে দু কাপ চা ধ্বংস করে রাজা...

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सारिका भूषण की दो लघुकथाएं

सारिका भूषण शिक्षा – विज्ञान स्नातक प्रकाशित काव्यसंग्रह —-  ” माँ और अन्य कविताएं ” 2015                            ” नवरस नवरंग ”  साझा काव्य संग्रह 2013  “कविता अनवरत ” (अयन प्रकाशन ) 2017 एवं  ” लघुकथा अनवरत ” ( अयन...