Author: literaturepoint

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नकुल गौतम की लघुकथा ‘तिरपाल’

मुम्बई में बारिशें इस बार जल्द शुरू हो गयी थीं। पूरी बस्ती रंग बिरंगी तिरपालों से ढंकी जा चुकी थी। बुधिया की छत पहली बारिश में ही साथ छोड़ गयी और घर में यहाँ वहाँ पानी टपकने लगा। बीवी साल भर कहती रही कि छत पर डाम्बर लगवा लो, पर...

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राजेश”ललित”शर्मा की दो कविताएं

समय समय ज़रा सरक बैठने दे मुझे अपने साथ गुज़ारने दे चंद पल कुछ करें बात चलें कुछ क़दम समझें हम तुम्हें तुम हमें समझो सच में बहुत तेज़ चलते हो रुको तो सुनो तो फिर निकल गये आगे चलो मैं ही दम भरता हूँ ज़िंदगी ही से सवाल करता...

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प्रेम नन्दन की पांच कविताएं

 प्रेम नंदन जन्म – 25 दिसम्बर 1980,को फतेहपुर (उ0प्र0) के फरीदपुर गांव में| शिक्षा – एम.ए.(हिन्दी), बी.एड.। पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। लेखन – कविता, लघुकथा, कहानी, आलोचना । परिचय – लेखन और आजीविका की शुरुआत पत्रकारिता से। दो-तीन वर्षों तक पत्रकारिता करने तथा तीन-चार वर्षों तक भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टरी  के पश्चात...

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प्रशान्त पांडेय की लघुकथा ‘पगलिया’

एगो कुसुमिया है. हड़हड़ाते चलती है. मुंह खोली नहीं की राजधानी एक्सप्रेस फेल. हमरे यहां काम करने आती है. टेंथ का एक्जाम था तो काम छोड़ दी थी. दू-तीन महीना बाद अब जा के फिर पकड़ी है. “तब सब ठीक है?” हम अइसही पूछ लिए. गलती किये। माने कुसुमिया का...

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विशाल मिश्र का एक गीत

जब कोई हक़ीक़त चंद पलों में अफ़साना बन जाए भरने वाले ज़ख्म कोई जब फिर ताज़ा कर जाए मैं क्यूँ न रो दूं। मुद्दत से थी राह तकी के बादल एक दिन बरसेंगे धूल उड़ रही, न मालूम था के ऐसे तरसेंगे मैं क्यों न रो दूं। हम कितना चाहें...

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प्रेरणा शर्मा ‘प्रेेरणा’ की सात प्रेम कविताएं

प्रेरणा शर्मा ‘प्रेरणा’ पेशे से अध्यापिका विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं , समाचार पत्रों  में लेख, कविताएं प्रकाशित बोधि प्रकाशन द्वारा  प्रकाशित पुस्तक ‘ स्त्री होकर सवाल करती है ‘  में कविताएं प्रकाशित  हो चुकी हैं । एक प्रभात  के आगमन  से .. निशा  के अवसान  तक .. घूमती  रहती  हूँ...

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सुरेंद्र भसीन की चार कविताएं

सुरेन्द्र भसीन पेशे से एकाउंटेंट, कई निजी  कंपनियों में काम किया। पता के 1/19A, न्यू पालम  विहार, गुड़गांंव, हरियाणा मो-9899034323 मेरी बेटी /सबकी बेटी मैं जब भी अपनी बीवी की आँखों में देखता हूँ उसमें मेरी बेटी का चेहरा नजर आता है। जो बड़ी होकर अपने पति को जैसे बड़ी उम्मीद से याचक होकर निहार रही है तो मैं बिगड़ नहीं पाता हूँ वहीं ढीला पड़ जाता हूँ। क्रोध नहीं कर पाता उबलता दूध जैसे छाछ हो जाता है. हाथ-पांव शरीर और दिल अवश होकर जकड़ में आ जाता है और आये दिन अख़बारों में पढ़े अच्छे-बुरे समाचारों की सुर्खियाँ याद आ-आकर मुझे दहलाने लगती हैँ। और मेरी पाशविक जिदें, नीच चाहतें बहुत घिनौनी और बौनी होकर मेरा मुँह  चिढ़ाने लगती है। कोई भला ऐसे में कैसे अपने परिवार को भूल अपनी बेटी के भावी सुखों को नजरअंदाज कर अपना सुख चाहता है ? वह ऐसा बबूल कैसे बो सकता है जिसे काटने की सोचते ही उसका कलेजा मुँह  को आता है? तभी जब मैं कुछ कहने को होता हूँ...

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नीरू मोहन की लघुकथा ‘एहसास’

यह कथा एक सत्य घटना पर आधारित है गोपनीयता बनाए रखने के लिए पात्रों के नाम और जगह बदल दिए गए हैं|*मीना बनारस के एक मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखती है| परिवार में पति मनीष के अलावा सास-ससुर और मीना की दो वर्ष की एक सुंदर-सी बिटिया है| मीना...

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नकुल गौतम की ग़ज़ल

अब मेरे दिल में नहीं है घर तेरा ज़िक्र होता है मगर अक्सर तेरा हाँ! ये माना है मुनासिब डर तेरा आदतन नाम आ गया लब पर तेरा भूल तो जाऊँ तुझे पर क्या करूँ उँगलियों को याद है नम्बर तेरा कर गया ज़ाहिर तेरी मजबूरियां टाल देना बात यूँ...

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राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘अहं ब्रह्म न अस्मि’

शब्द ब्रह्म हैं न,बिल्कुल न; ये सिर्फ हैं अभिव्यक्ति का माध्यम जो आप दे सकते हैं बिना बोले भी गूँगे गुज़ार देते हैं उम्र सारी इशारों ही इशारों में चिड़िया भी चहकते चहकते ममता देती चुगा देती चोंच से बच्चे भी ख़ुश होते,वैसे जलस्तर स जैसे मेरी पत्नी देती कौए...

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डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित की लघुकथा ‘बहुरिया’

रामानुज के घर में मातम का माहौल था, घर में छाती पीटने और रोने की जोर-जोर से आवाजें आ रही थी। रिश्‍तेदार और पड़ोसी ढांढस बंधा रहे थे, तो कुछ ऐसे भी थे जो मजमा देख रहे थे। रामानुज अपने बच्‍चों को सीने से लगाए दीवार के कोने में बैठा...

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माया मृग की पांच कविताएं

मुझे तुम्‍हारे हाथ देखने हैं तुमने लौ को छुआ वह माणिक बन गई बेशुमार मनके तुम्‍हारी मुट्ठी में सिमटते चले गए मुझे बहुत देर बाद पता चला कि दरअसल लौ से तुम्‍हारे हाथ जल गए थे तुमने जले पोर मुझसे छिपाने को मुट्ठियां बन्‍द कर ली थीं …. ! उस...

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जगजीत गिल की तीन कविताएं

जगजीत गिल उप संपादक पंजाबी त्रैमासिक साहित्यक पत्रिका ’अक्खर’, काव्य संग्रह ’मील पत्थरां बिन शहर’ और ’रेत के घर’ प्रकाशित। कहानी संग्रह ’हदबस्त नंबर 211’ प्रकाशन हेतु। 095920-91048 याद याद अकेले, कभी आती नहीं, गाल सुर्ख़, तो आंखें नम भी हैं। बसती रुह अगर, चेहरे में किसी के, रुकी सीने...

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डॉ० छेदी साह की कविता ‘मुस्कान’

मुर्दे में भी डाल देगी जान उषा की प्रथम किरणों सा तुम्हारी लम्बी बाहें संगमरमरी देह बालों पर छाई सावन की घटा हिरणी सी आँखें देखती हो जब तुम और होती आँखें चार तब तुम्हारी मीठी मुस्कान मुझे लगती है बड़ी ही कान्तिमान,    

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नकुल गौतम की ग़ज़ल

ग़ज़ल झड़ी जब लग रही हो आँसुओं की कमी महसूस क्या हो बदलियों की हवेली थी यहीं कुछ साल पहले जुड़ी छत कह रही है इन घरों की वो मुझ पर मेहरबां है आज क्यों महक-सी आ रही है साज़िशों की मुझे पहले मुहब्बत हो चुकी है मुझे आदत है...

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मुकेश बोहरा अमन की कविता ‘शब्द-साधना’

शब्दों को जानो, शब्दों को मानो , शब्दों की बातें होती निराली । शब्दों का व्यापार, शब्दों का व्यवहार , शब्दों से है होली, दीवाली ।। शब्दों से तुम हो , शब्दों से मैं हूँ । शब्दों से हारा , शब्दों से जय हूँ ।। शब्द है करेला व अम्बुआ...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एक तल्खियां खून की विरासत है छोड़ ना यार ये सियासत है मुफ़लिसी जा रही है महफ़िल में मुफ़लिसी को कफ़न की दावत है हुस्न तेरा मिटा के दम लूंगा सांस तुझसे मेरी बगावत है वाकया ये समझ नहीं आता रात को दिन से क्यों शिकायत है भागता क्यों है...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

  सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ? — बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है । — इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।...

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विशाल मिश्रा की कविता ‘आज भी’

गुलाबी सूती कपड़े पर हरे धागे से कढ़े फूल आज भी ख़ुशबू देते हैं। बेतरतीब बालों को सलीका सिखाने की ख़ातिर वो चार चिमटियां आज भी उनको दाबे हैं। चमकता नग नाक पर उस चेहरे की नूर बढ़ाने में सबसे आगे है। गोरी पतली दूसरी वाली उंगली में सोने का...

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नीरू मोहन की कविता ‘ईश्वर की कृपा जीवलोक तक’

जापानी काव्य शैली ताँका संरचना- 5+7+5+7+7= 31 वर्णदो कवियों के सहयोग से काव्य सृजन पहला कवि-5+7+5 = 17 भाग की रचना , दूसरा कवि 7+7 की पूर्ति के साथ श्रृंखला को पूरी करता |पूर्ववर्ती 7+7 को आधार बनाकर अगली श्रृंखला 5+7+5 यह क्रम चलता रहता है इसके आधार पर अगली...