Author: literaturepoint

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শ্বেতা ভট্টাচার্য-এর অনুগল্প ‘রঙ’

গল্পের বই থেকে চোখ তুলতেই শিমুল ফুল ভরা গাছে, খুনসুটি রত দুটো চাতক পাখির দিকে নজর যায় মিলির। বসন্তের আভাস পুরো প্রকৃতিতে বিদ্যমান বোঝে সে। “শুধু কি তার মনের ঘরেই?” আচমকা কথাটা মনে আসতেই একটা মুখ আর শিহরণ খেলে যায় সারা শরীরে। রুবি,নেহা তার অফিস কলিগ হলেও, কাছের মানুষ। তাদের...

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দেবায়ন কোলের অনুগল্প ‘ভালোবাসার রঙ’

বিয়ের পরে একবারই মাত্র দোল খেলার সুযোগ হয়েছিল সুতপার। অর্ণব পেছন থেকে সেদিন হঠাৎ করে তার শ্যামলা রঙের মুখটাতে আবীর মাখিয়ে বলেছিল, “শুভ দোলযাত্রা,তপা। এরকমই সুন্দর থেকো সবসময়।” লজ্জায় আবীরের থেকেও লাল হয়ে উঠেছিল সেদিন সুতপা। মুখে বলেছিল, “আমার রঙ মাখতে ভালো লাগে না, জানো না?” অর্ণব তাকে আলিঙ্গনাবদ্ধ করে...

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অঙ্কিতা ব্যানার্জীর কবিতা ‘অভিমানী প্রেম’

এ বসন্তদিনে প্রেমপদ‍্যই মানায় আমি নাহয় আজ বিরহী দুচোখ মেলে বলি ফাগুন, কষ্টও পেতে হয়! প্রেম ছেড়ে যাক ,জলে ভরে যাক আঁখি বিশুদ্ধতম হৃদয়ের চেতনায় অনুভূতিদের যত্নে আগলে রাখি। আঘাতে আঘাতে বিদীর্ণ হোক মন ব্যথা দিয়ে যাক আপেক্ষিক আত্মজন হৃদয়ে তবু রয়ে যাবে ভালোবাসা- মস্তিষ্ক হিসেব কষবে পাওয়ার, আজ প্রেমভরা...

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সুচেতনা গুপ্তর অনুগল্প ‘বুরা না মানো, আজ হোলি হ্যায়’

হোলি হ্যায়! উফ, আবার শুরু হলো। সবে সকাল দশটা। এর মধ্যেই গোটা কমপ্লেক্স জুড়ে লোকে লোকারণ্য। সুতপার কাছে এই দিনটা একটা বিভীষিকা। চেষ্টা করেছিল ঘরের সব দরজা জানলা বন্ধ করে এসিটা চালিয়ে কম্বল মুড়ি দিয়ে শুয়ে থাকবে, যতক্ষণ না এই রঙ খেলার প্রহসন শেষ হয়। মা বাবা অনেকবার করে বলেছিল...

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দোলা সেনের গল্প ‘বসন্ত –রাগ’

শনির রাতে দমকা ঝড় উঠল। হালকা, খুব হালকা ধারাপাত। তাতেই রবিবারের সকালটায় বেশ শিরশিরে আমেজ। ছটার সময় নিত্যকার প্রাতঃভ্রমণে যাই যাই করছি, সৌরভের আধ-ঘুমন্ত গলা কানে এল, – “ঘণ্টাখানেকের মধ্যে বেরোতে পারবে ?” তা, ‘পাগলা খাবি ? না, আঁচাবো কোথায় !’ ঝড়ের বেগে স্নান, টোস্ট সহযোগে চা, তারপরেই গাড়ী —-...

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পিউ দাশের গল্প ‘প্রেম’

“হোলি হ্যায়!” দূর থেকে ভেসে আসে কাদের যেন চিৎকার। সেই শব্দকে ছাপিয়ে ওঠে ধ্রুবর গলা। “অসম্ভব!” চেঁচিয়ে ওঠে ধ্রুব। “অসম্ভব!” ওর কপালের উপরের শিরা ফুলে ওঠে। নাকের পাটা ফুলে ওঠে। লাল হয়ে ওঠে ওর মুখ। “কি মনে করিস তুই আমাকে? কি ভাবিস?” প্রবল তিক্ততায় চাপা গলায় ওর জিজ্ঞাসা কঠোর হয়ে...

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आदमी को मुकम्मल बनाने वाली कविताएं

शहंशाह आलम आनन्द गुप्ता जन्म : 19 जुलाई 1976, कोलकाता शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर प्रकाशन : देश की कुछ महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन। कुछ आलेख भी प्रकाशित। कई ब्लॉग पर कविताएँ प्रकाशित। कुछ भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन...

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सादगी और आत्मीयता का पारस्परिक रचाव

उमाशंकर सिंह परमार भास्कर चौधुरी छत्तीसगढ़ के हैँ, युवा कवि हैं, गद्य और पद्य दोनों में समान हस्तक्षेप रखते हैँ। मैंने उनका लिखा जो भी पढ़ा है, उस आधार पर मेरी मान्यता है कि भास्कर कवियों की भारी भरकम भीड़ में बड़ी दूर से पहचाने जा सकते हैं । वह...

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मनी यादव की 4 ग़ज़लें

मनी यादव  एक शाम    कोयल   और   हवा   के    साथ   गाई  मैंने ज़िन्दगी   के   साज़   पर   जो  धुन   बनाई     मैंने कैसे     लफ़्ज़े-बेवफ़ा    लायें    ग़ज़ल   में  अपनी बेवफ़ाई      की       शमा      ख़ुद    जलाई     मैंने छोड़कर  घर  कुछ  कमाने  के  लिये  निकला तब ज़ीस्त     बच्चे     के     कटोरे    से   कमाई    मैंने आज    तेरी   ज़ुल्फ़    क़ाबू  ...

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अनुराग अन्वेषी की ‘भरोसे’ की 10 कविताएं

अनुराग अन्वेषी ए-802, जनसत्ता सोसाइटी, सेक्टर 9, वसुंधरा, गाजियाबाद 201012 (उत्तर प्रदेश) मोबाइल : 9999572266 भरोसा-1 घात-प्रतिघात के एक से बढ़कर एक तूफान देखे हैं मैंने पर हर बार थोड़ा सा हिलता-डुलता और फिर संभलता हुआ टिका रह गया हूं पूरी मजबूती के साथ शायद इसकी एक बड़ी वजह वह भरोसा है जो...

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राजगोपाल सिंह वर्मा की कहानी ‘…सोलह प्रेम पत्र’

राजगोपाल सिंह वर्मा पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर शिक्षा. केंद्र एवम उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में प्रकाशन, प्रचार और जनसंपर्क के क्षेत्र में जिम्मेदार वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का अनुभव. पांच वर्ष तक प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका “उत्तर प्रदेश “ का स्वतंत्र सम्पादन. इससे पूर्व उद्योग मंत्रालय तथा स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत...

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आम आदमी का संत्रास बयां करने वाले कवि विनय सौरभ

शहंशाह आलम इस हफ्ते के कवि:  विनय सौरभ एक गोरखा गुज़रा है सीटी बजाता हुआ संदर्भ : विनय सौरभ की कविताएँ शहंशाह आलम संथाल परगना का यह छोटा-सा गाँव : नोनीहाट जो असल में अब गाँव भी नहीं रहा क़स्बा कह सकते हो लेकिन इसकी पहचान पर अब शहर के...

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मगर वह छूती है आसमान

संजय स्वतंत्र वह टीवी पत्रकार है। बेहद खूबसूरत। दिलकश आवाज। समाचार पढ़ने का अंदाज मुझे ही क्या, सभी को मुग्ध कर देता है। लेकिन अब वह टीवी चैनल छोड़ कर ऑनलाइन मीडिया में नौकरी ढूंढ़ रही है। मेरी उससे मुलाकात बस इत्तेफाक से हुई। नौकरी के सिलसिले में उससे तीन-चार...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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पंखुरी सिन्हा की 4 कविताएं

पंखुरी सिन्हा शिक्षा —एम ए, इतिहास, सनी बफैलो, 2008 पी जी डिप्लोमा, पत्रकारिता, S.I.J.C. पुणे, 1998 बी ए, ऑनर्स, इतिहास, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 1996 अध्यवसाय—-BITV, और ‘The Pioneer’ में इंटर्नशिप, 1997-98 —- FTII में समाचार वाचन की ट्रेनिंग, 1997-98 —– राष्ट्रीय सहारा टीवी में पत्रकारिता, 1998—2000   प्रकाशन———हंस, वागर्थ,...

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क्या कोई भी रचनाकार दुष्ट नहीं?

जयप्रकाश मानस 13, नवंबर, 2015 हिंदी की शुष्कता या उर्दू की रवानी ? गोपेश्वर सिंह जी हिंदी के ऐसे जाने-माने प्रोफ़ेसर-लेखक-आलोचक हैं, जिनकी बातें गंभीरता से सुनी जाती रही हैं । कई बाबा नागार्जुन से लेकर अब की पीढ़ी और उनकी दुनिया की रंगत को क़रीब से देखते-परखते रहे हैं...

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विहाग वैभव की 5 कविताएं

विहाग वैभव शोध छात्र – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) नया ज्ञानोदय , वागर्थ , आजकल , अदहन, सहित विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ प्रकाशित । मोबाइल – 8858356891  1. हत्या-पुरस्कार के लिए प्रेस-विज्ञप्ति वे कि जिनकी आँखों में घृणा समुद्र सी फैली है अनंत नीली-काली जिनके हृदय...

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केशव शरण की 6 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   9415295137 न संगीत, न फूल उसका हंसना याद आ रहा है संगीत का बिखरना...

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औजार की तरह भाषा का इस्तेमाल करते उमाशंकर सिंह परमार

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान,...