हमसफ़र

बेटा-बहू के होते भी घोष बाबू अकेले थे लेकिन उन्हें फिर प्यार हो गया। पर तब क्या हुआ जब घोष बाबू का बुढ़ापे का ये प्यार एक अचानक बिना बताए घर छोड़ कर चली गई। अकेलेपन से जूझते एक बुजुर्ग की मार्मिक कहानी