बी आर विप्लवी की रचना प्रक्रिया : आदमियत का आरजूनामा

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1 Response

  1. कुमार विजय गुप्त , munger says:

    सब मिल कर जन-गण-मन को अब सन्मति दें

    आओ सरभाव-शील को नयी प्रगति दें

    कुल-वंश, जन्म का भेद, घृणा का घर है

    मानवता इन सिध्दांतों से ऊपर है….सरल ह्रदय का उद्बोधन है दुनिया को बेहतर बनाने का ! विप्लवी जी को हार्दिक बधाई साथ ही अच्छी विवेचना के लिए आपको साधुवाद !

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